राजस्थान विधानसभा उपचुनाव: सहाड़ा में 'कास्ट-कार्ड' चलेगा या सहानुभूति की लहर, आज होगा फैसला

इस बार सहाड़ा में सबसे कम 56.56 प्रतिशत वोट पड़े हैं. वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में यहां 73.56 प्रतिशत मतदान हुआ था.

इस बार सहाड़ा में सबसे कम 56.56 प्रतिशत वोट पड़े हैं. वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में यहां 73.56 प्रतिशत मतदान हुआ था.

Rajasthan Assembly by-election : राजस्थान में हुये विधानसभा उपचुनाव में इस बार भीलवाड़ा की सहाड़ा विधानसभा सीट (Sahada Assembly Constituency) काफी चर्चा में रही है. यह कांग्रेस की परंपरागत सीट रही है. यहां बीजेपी कास्ट कार्ड चलाकर कांग्रेस के गढ़ को भेदने का प्रयास कर रही है.

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जयपुर. भीलवाड़ा जिले का सहाड़ा विधानसभा क्षेत्र (Sahada Assembly Constituency) परंपरागत रूप से कांग्रेस का गढ़ रहा है. कांग्रेस से तीन बार विधायक रहे कैलाश चंद्र त्रिवेदी (Kailash chandra Trivedi) के निधन से यह सीट खाली हुई है. मुख्य मुकाबला कांग्रेस की गायत्री देवी और बीजेपी के रतनलाल जाट के बीच है. मतगणना के बाद आज तय होगा कि शह-मात की बाजी में 'कास्ट का कार्ड' चला या फिर सहानुभूति की लहर ने कांग्रेस के गढ़ को और मजबूत किया है.

उपचुनाव की तीनों सीटों में से सहाड़ा में सबसे कम मतदान हुआ है. यहां पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार 17 फीसदी वोट कम पड़े हैं. यह देखना दिलचस्प होगा कि इसका नुकसान किसे उठाना पड़ता है ? इस बार सहाड़ा में सबसे कम 56.56 प्रतिशत वोट डाले गए, जबकि 2018 के विधानसभा चुनाव में यहां 73.56 प्रतिशत मतदान हुआ था.

क्या गुल खिलाएगा लादूलाल ऑडियो प्रकरण

भीलवाड़ा जिले की सहाड़ा विधानसभा सीट के लिए सबसे कम आठ उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा है. मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच है. यहां आरएसएस की पहली पसंद रहे लादूलाल पितालिया की ओर से नामांकन भरने और बाद में उसे वापस लेने के बीच वायरल हुए आडियो से यह उपचुनाव चर्चा का विषय बन गया था. बीजेपी नेताओं ऐडी से चोटी का जोर लगाकर लादूलाल से नामांकन वापस करा ही लिया था. लेकिन आज आने वाले चुनाव परिणाम बताएंगे कि इस पूरे प्रकरण का बीजेपी को फायदा होता है या फिर नुकसान उठाना पड़ता है.
सहाड़ा का राजनीतिक इतिहास

परंपरागत रूप से सहाड़ा कांग्रेस की सीट रही है. 2013 में बीजेपी के बालूराम चौधरी को छोड़ दें तो 2003 से तो यहां कांग्रेस के कैलाश त्रिवेदी ही जीतते चले आ रहे हैं. कांग्रेस के गढ़ सहाड़ा को भेदने के लिए बीजेपी ने जाट बहुल इस सीट से रतन लाल जाट को मैदान में उतार रखा है. पूर्व मंत्री जाट जनता दल के टिकट पर 1990 में पहली बार विधायक बने और उसके बाद बीजेपी में आए थे. 1993 में कांग्रेस के रामपाल उपाध्याय चुनाव जीते और 1998 में सहाड़ा से ही दोबारा रतनलाल जाट विधायक बने.

कौन कब बना विधायक



वर्ष विजेता पार्टी हार-जीत का अंतर

2003 कैलाश चंद्र त्रिवेदी कांग्रेस 8446

2008 कैलाश चंद्र त्रिवेदी कांग्रेस 13506

2013 बालूराम चौधरी बीजेपी 20756

2018 कैलाशचंद्र त्रिवेदी कांग्रेस 7006
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