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Rajasthan: विधानसभा उपचुनाव के मद्देनजर किसान सम्मेलनों की तैयारी में जुटी कांग्रेस

चित्तौड़गढ़ के मातृकुण्डियां और चूरू के बीदासर में होने वाले किसान सम्मेलन बेहद अहम हैं. ये उपचुनाव वाले क्षेत्रों को प्रभावित करेंगे.
चित्तौड़गढ़ के मातृकुण्डियां और चूरू के बीदासर में होने वाले किसान सम्मेलन बेहद अहम हैं. ये उपचुनाव वाले क्षेत्रों को प्रभावित करेंगे.

Rajasthan Assembly by-election: उपचुनाव को देखते हुये कांग्रेस (Congress) किसानों के आक्रोश को भुनाने में जुटी है. इसके लिये प्रदेश में बड़े किसान सम्मलेनों (Kisan Rally) की तैयारियां की जा रही है.

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जयपुर. देश में चल रहे किसान आंदोलन (kisan andolan) के बीच प्रदेश में चार सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव (Assembly by-election) के मद्देनजर कांग्रेस किसानों को रिझाने में जुट गई है. इसके तहत कांग्रेस (Congress) राजस्थान में किसान सम्मेलन की तैयारियां करने में जोरशोर से जुटी है. इसी सप्ताह कांग्रेस विशाल किसान सम्मेलनों (Kisan Rally) का आयोजन करने जा रही है. चित्तौड़गढ के मातृकुण्डियां में 27 फरवरी को किसान सम्मेलन प्रस्तावित है. इसकी तैयारियां भी जारी हैं. सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना इसकी पुष्टि कर चुके हैं.

वहीं वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष खानु खान बुधवाली ने भी कहा है कि चूरू और बीकानेर जिले के बॉर्डर पर बीदासर में 27 फरवरी को किसान सम्मेलन होगा. इस सम्मेलन को लेकर रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर हुई बैठक में भी चर्चा की गई है. इन किसान सम्मेलनों में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ ही प्रदेश प्रभारी अजय माकन, पीसीसी चीफ गोविन्द सिंह डोटासरा और अन्य नेता शामिल होंगे.

इन स्थानों पर इसलिये अहम हैं ये सम्मेलन
मातृकुण्डियां में आयोजित प्रस्तावित किसान सम्मेलन उपचुनाव की दृष्टि से अहम होगा. मेवाड़ क्षेत्र का यह स्थान वल्लभनगर, राजसमंद और सहाड़ा सीटों पर उपचुनाव के मद्देनजर तय किया गया है. वहीं बीदासर का सम्मेलन सुजानगढ़ सीट पर होने वाले उपचुनाव की दृष्टि से महत्वपूर्ण है.
सम्मेलनों में भीड़ जुटाने के निर्देश


उल्लेखनीय है कि एआईसीसी की ओर से तय किए गये कार्यक्रम के अनुसार ये किसान सम्मेलन किए जा रहे हैं. इससे पूर्व ब्लॉक स्तर और जिला स्तर पर कार्यक्रम हो चुके हैं. पहले जयपुर में प्रदेशस्तरीय किसान सम्मेलन का पार्टी का विचार था लेकिन अब उपचुनाव की दृष्टि से दूसरे स्थानों पर किसान सम्मेलन करवाए जा रहे हैं. यह भी संभव है कि ये दोनों सम्मेलन अलग-अलग दिन आयोजित किए जाएं. क्षेत्रीय नेताओं और जनप्रतिनिधियों को इन किसान सम्मेलनों में भीड़ जुटाने के लिए कहा गया है.
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