राजस्थान विधानसभा उपचुनाव: कांग्रेस को खाये जा रही है अल्पसंख्यक वोट बैंक छिटकने की चिंता, जानिये क्या है वजह

मुस्लिम वर्ग की कांग्रेस से नाराजगी पिछले दिनों तब खुलकर सामने आ गई थी जब 6 नगर निगम के चुनाव के बाद एक भी निगम में अल्पसंख्यक को महापौर नहीं बनाया गया था.

मुस्लिम वर्ग की कांग्रेस से नाराजगी पिछले दिनों तब खुलकर सामने आ गई थी जब 6 नगर निगम के चुनाव के बाद एक भी निगम में अल्पसंख्यक को महापौर नहीं बनाया गया था.

Rajasthan assembly by-election: प्रदेश की तीन विधानसभा सीटों के लिये हो रहे उपचुनाव में मुस्लिमों वोटों (Muslims votes) की संख्या को देखते हुये कांग्रेस (Congress) इनको साधने के लिये बड़ी कार्ययोजना तैयार की है. यह वर्ग कुछ मुद्दों को लेकर कांग्रेस से नाराज बताया जा रहा है.

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जयपुर. प्रदेश में तीन विधानसभा सीटों पर होने जा रहे उपचुनाव (Rajasthan assembly by-election) में मुस्लिम मतदाताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी. कांग्रेस के परम्परागत वोट बैंक माने जाने वाले इस अल्पसंख्यक वर्ग (Minority)  को साधने के लिए इस बार कांग्रेस (Congress)  को ही खासी मशक्कत करनी पड़ रही है. पार्टी के मुस्लिम नेताओं (Muslim leaders) की बड़ी फौज इस वर्ग को साधने में जी जान से जुटी हुई है. सुजानगढ़, सहाड़ा और राजसमंद तीनों ही सीटों पर मुस्लिम मतदाता अच्छी खासी संख्या में हैं. लेकिन इस बार कांग्रेस का यह परम्परागत वोट बैंक कई मसलों को लेकर पार्टी से खफा नजर आ रहा है. यही बात पार्टी के लिए चिन्ता का विषय बनी हुई है.

प्रदेश में मंत्रीमंडल में केवल एक मुस्लिम मंत्री है. इसके अलावा अल्पसंख्यकों से जुड़ी 10 से ज्यादा संस्थाओं में राजनीतिक नियुक्तियां नहीं होने से भी उनमें नाराजगी है. वहीं मदरसा पैराटीचर्स और उर्दू शिक्षकों के पद समाप्त किए जाने से भी मुस्लिम मतदाता नाराज हैं. यही वजह है कि पार्टी नेता इस वर्ग की नाराजगी को दूर करने की मशक्कत में जुटे हुए हैं. तीनों ही सीटों पर पार्टी के मुस्लिम नेताओं को मुस्लिम वर्ग को साधने का टास्क दिया गया है.

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इनको मिली जिम्मेदारी
सुजानगढ सीट पर करीब 30 हजार मुस्लिम वोटर्स हैं जबकि राजसमंद सीट पर करीब 15 हजार मुस्लिम मतदाता हैं. इसी तरह सहाड़ा सीट पर करीब 12 हजार अल्पसंख्यक वोटर्स हैं. अल्पसंख्यकों की नाराजगी चुनाव में पार्टी को भारी पड़ सकती है. इस नाराजगी को थामने के लिए अल्पसंख्यक वर्ग के नेताओं को आगे किया गया है. कैबिनेट मंत्री सालेह मोहम्मद, पूर्व मंत्री नसीम अख्तर इंसाफ के साथ ही वक्फ बोर्ड चैयरमेन खानू खान बुधवाली, पूर्व विधायक मकबूल मंडेलिया, पूर्व सांसद अश्क अली टांक और पूर्व मंत्री दुर्रु मियां जैसे नेताओं ने कमान संभाली है. पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग ने भी तीनों ही क्षेत्रों में चार-चार नेताओं की टीम ऑब्जर्वर के तौर पर लगाई है.

सेंध लगाने में जुटी रालोपा !

मुस्लिम वोट बैंक के हालांकि कांग्रेस से छिटकने की संभावना कम है क्योंकि उनके पास दूसरा कोई विकल्प नहीं है. लेकिन फिर भी पार्टी किसी तरह का कोई रिस्क लेना नहीं चाहती है. दरअसल विश्वस्त जानकारों का कहना है कि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी अल्पसंख्यक वर्ग को रिझाने की कोशिश में जुटी है. पार्टी संयोजक हनुमान बेनीवाल लगातार क्षेत्र में जाकर मुस्लिम मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कवायद कर रहे हैं.



निगम चुनावों में सामने आई थी नाराजगी

मुस्लिम वर्ग की कांग्रेस से नाराजगी पिछले दिनों तब खुलकर सामने आ गई थी जब 6 नगर निगम के चुनाव के बाद एक भी निगम में अल्पसंख्यक को महापौर नहीं बनाया गया था. हालांकि पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की बड़े स्तर पर नाराजगी सामने आने के बाद जयपुर हैरीटेज निगम में मुस्लिम उप महापौर बनाकर उन्हें खुश करने की कोशिश की गई थी. लेकिन बताया जा रहा है कि अब भी नाराजगी बड़े स्तर पर है और इसी की वजह से पार्टी चिन्तित है. दरअसल भले ही तीनों सीटों पर मुस्लिम वोटर्स का बाहुल्य भले ही नहीं हो लेकिन ये निर्णायक भूमिका जरुर निभा सकते हैं.
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