राजस्थान विधानसभा उपचुनाव: कम वोटिंग प्रतिशत ने बढ़ाई कांग्रेस और बीजेपी की मुश्किलें, जानिये वजह

दमोह उपचुनाव के परिणाम पर हाईकोर्ट का अहम आदेश. प्रतीकात्मक तस्वीर 

दमोह उपचुनाव के परिणाम पर हाईकोर्ट का अहम आदेश. प्रतीकात्मक तस्वीर 

Rajasthan assembly by-election: प्रदेश के तीन विधानसभा सीटों के लिये हुये उपचुनाव में कम मतदान से बीजेपी और कांग्रेस (BJP-Congress) दोनों का गणित गड़बड़ा गया है. इस कम मतदान प्रतिशत के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं.

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जयपुर. प्रदेश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के बावजूद भी तीनों विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव (Rajasthan assembly by-election) में हुई वोटिंग ने एक बार फिर चौंका दिया है. तीनों विधानसभा सीटों पर 60.37 फीसदी मतदान (Voting) हुआ है. तीनों विधानसभा क्षेत्रों के मतदान प्रतिशत का 2018 के विधानसभा चुनाव से 12.9 फ़ीसदी कम रहा है. कम मतदान होने की पीछे चुनाव अधिकारी कोरोना (COVID-19) बड़ी वजह कोरोना को बता रहे हैं.

उपचुनाव की वोटिंग का यह प्रतिशत इशारा कर रहा है कि राजसमंद में बीजेपी का किला ढह सकता है. राजसमंद में बीजेपी गत 30 साल से काबिज है. इस चुनाव से राजसमंद सांसद दीया कुमारी की प्रतिष्ठा भी दांव पर है. तीनों सीटों में से सबसे ज्यादा रोचक मुकाबला भी राजसमंद में ही हुआ है. पिछले तीन विधानसभा चुनावों के मतदान प्रतिशत के रिकॉर्ड की बात करें तो 2008 से लेकर अब तक के हुये विधानसभा उपचुनाव में सबसे कम मतदान इस बार हुआ है. कम मतदान को लेकर दोनों ही पार्टी में हार-जीत का गणित गड़बड़ा गया है. सुजानगढ़ और सहाड़ा में कम और राजसमंद में सबसे ज्यादा हुआ है. 2018 के चुनाव में सुजानगढ़ और सहाड़ा में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी.

क्या हैं इस वोटिंग प्रतिशत का गणित

2018 के विधानसभा चुनाव में राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट के अनुसार पोस्टल बैलेट और EVM को मिलाकर 74.69 प्रतिशत मतदान हुआ था. इसमें कांग्रेस को 39.3 प्रतिशत वोट और बीजेपी को 38.8 प्रतिशत मत मिले. विधानसभा  चुनाव में अमूमन 65 फीसदी वोटिंग होती है. अक्सर आंकड़ा इस औसत के ढाई फीसदी अधिक या कम का होता है. लेकिन 2018 में यह रिकॉर्ड टूट गया था. उस समय आंकड़ा 74 फीसदी के पार हो गया था. जब भी औसत आंकड़ों में 7 या इससे अधिक प्रतिशत का हेरफेर होता है तो नतीजे चौंकाने वाले आते हैं.
कांग्रेस के लिए मायने

ट्रेंड के मुताबिक कम मतदान का फायदा सत्तारूढ़ पार्टी को मिलता रहा है. ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है इन तीनों विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस जीत दर्ज कर सकती है.

बीजेपी के लिए मायने



अगर सरकार के खिलाफ गुस्सा निकला तो वह कांग्रेस को असहज स्थिति में पहुंचा सकता है. अगर दबी छिपी एंटी इंकबेंसी वोट में बदल गईं तो कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ सकता है. बीजेपी को इसका फायदा मिल सकता है.

कहां सबसे ज्यादा और कहां सबसे कम मतदान

2018 के विधानसभा आम चुनाव में सहाड़ा में 73.56, सुजानगढ़ में 70.68 और राजसमंद में 76.59 फीसदी मतदान दर्ज हुआ था. कोरोना को देखते मतदान के समय में 2 घंटों की बढ़ोतरी की थी. प्रदेश के मतदाताओं ने पूरी समझदारी दिखाते हुए कोरोना संबंधी सभी गाइडलाइन की पालना के साथ मतदान किया. इस बार सर्वाधिक मतदान राजसमंद विधानसभा में हुआ. वहां 67.18 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. भीलवाड़ा की सहाड़ा विधानसभा में 56.56 मतदाताओं ने वोट डाले तो चूरू जिले की सुजानगढ़ विधानसभा में कुल 59.20 प्रतिशत मतदान किया.
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