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राजस्थान विधानसभा उपचुनाव : बीजेपी-कांग्रेस के कई सियासी क्षत्रपों का कड़ा इम्तिहान है यह चुनावी रण

दोनों पार्टियों के नेता उपचुनाव के लिये पसीना बहा रहे हैं. 2 मई को इनकी तैयारी का नतीजा आयेगा.

दोनों पार्टियों के नेता उपचुनाव के लिये पसीना बहा रहे हैं. 2 मई को इनकी तैयारी का नतीजा आयेगा.

Rajasthan assembly by-election: इन उपचुनावों में बीजेपी और कांग्रेस के एक दर्जन से ज्यादा दिग्गज नेताओं (Veteran leaders of BJP & Congress) की साख भी दांव है. इनके कंधों पर दोनों पार्टियों ने जीत की जिम्मेदारी डाली है. इन चुनावों के परिणाम इन सियासी क्षत्रपों के राजनीतिक कद को भी तय करेंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 9, 2021, 11:42 AM IST
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हरीश मलिक

जयपुर. प्रदेश के तीन विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव (Rajasthan assembly by-election) में उम्मीदवारों का तो इम्तिहान है ही लेकिन इसके साथ ही इसमें बीजेपी और कांग्रेस के उन सियासी क्षत्रपों (Veteran leaders of BJP & Congress) की भी इसमें परीक्षा होनी है जिनको जीत की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इन सियासी रणबांकुरों में कौन बाजी जीतेगा और किसके हाथ हार आएगी इसका फैसला दो मई को होगा. इस परिणाम (Result) के साथ ही इन सियासी सेनापतियों की सत्ता और संगठन में जिम्मेवारी घट-बढ़ सकती है.

उपचुनाव की तीनों सीटों के फिलवक्त के समीकरणों की बात करें तो सुजानगढ़ में बीजेपी को भीतरघात का खतरा बना हुआ है. हालांकि अभी खुलकर कोई विरोध नहीं हो रहा है. यहां संतोष मेघवाल, राजेन्द्र नायक और बीएल भाटी भी खुद को दावेदार के रूप में पेश कर रहे थे, लेकिन बीजेपी ने खेमाराम मेघवाल पर दांव खेला. बेरोजगार संघ के प्रत्याशी पेमाराम द्वारा पर्चा वापस लेने से कांग्रेस प्रत्याशी को राहत मिली है.



सबसे ज्यादा चर्चित है सहाड़ा सीट
सहाड़ा विधानसभा सीट पर पितलिया एपिसोड के अलावा ओर भी पेंच हैं. बीजेपी नेता रूपलाल जाट के भाई बद्रीलाल जाट को आरएलपी ने टिकट दिया है. उधर कांग्रेस में गायत्री देवी के देवर टिकट न मिलने से नाराज बताए जाते हैं. हालांकि सीएम के हस्तक्षेप के बाद कोई खुलकर सामने नहीं आया है. राजसमंद सीट पर बीजेपी में जगदीश पालीवाल और गणेश पालीवाल को छोड़कर बाकी दावेदार भूमिगत हैं. पार्टी के बड़े नेताओं के दौरों में उपस्थित हो जाते हैं. कांग्रेस में भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति है.

बीजेपी के स्टार प्रचारक अभी विधानसभा क्षेत्रों से दूर हैं
भारतीय जनता पार्टी के स्टार प्रचारकों ने फिलहाल तो उपचुनाव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाकर रखी है. पार्टी के स्टार प्रचारक वसुंधरा राजे, भूपेंद्र यादव, ओम प्रकाश माथुर, कैलाश चौधरी, अशोक परनामी, किरोड़ी लाल मीणा और अरुण चतुर्वेदी आदि अभी तक क्षेत्रों में नहीं पहुंचे हैं.

जानिये किस सीट पर किसे दी गई है जिम्मेदारी

सहाड़ा विधानसभा क्षेत्र
कांग्रेस : पार्टी ने डॉ. रघु शर्मा को सहाड़ा उपचुनाव जिताने की जिम्मेवारी सौंपी है. स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा भीलवाड़ा जिले के प्रभारी मंत्री हैं और क्षेत्र का ब्राह्मण चेहरा भी हैं. यह सीट पहले ही कांग्रेस के पास थी, लेकिन लादूलाल पितलिया एपीसोड के चलते यह सीट लाइम-लाइट में आ गई और बीजेपी तथा कांग्रेस दोनों के लिए सीट जीतना नाक का सवाल है. कांग्रेस में इस सीट के लिए चुनावी रणनीति डॉ. रघु के स्तर पर ही तय हो रही है और वे क्षेत्र के लगातार दौरे और कैंप कर रहे हैं. कांग्रेस प्रत्याशी गायत्री देवी को सहानुभूति वोटों की भी उम्मीद है.

बीजेपी : सहाड़ा सीट के लिए बीजेपी ने मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग को जिताने की जिम्मेवारी सौंपी है. वहीं गर्ग जिनका आडियो वायरल हुआ. इसमें उन्होंने हर सूरत में पितलिया के फार्म वापसी की पैरवी की अन्यथा कथित तौर पर रगड़ देने की भी धमकी दी. बीजेपी ने गर्ग के अलावा भीलवाड़ा सांसद सुभाष बहेड़िया, चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी और विधायक विठ्ठल शंकर को भी मैदान में उतारा है. यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपाई कैसे कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाकर सहाड़ा सीट को जीतने की रणनीति बनाते हैं. बीजेपी ने पितलिया को बैठाने में भले ही सफलता हासिल कर ली हो, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आरएलपी प्रत्याशी उसकी जड़ों में पानी दे सकता है.

राजसमंद विधानसभा क्षेत्र
बीजेपी : विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया को पार्टी ने राजसमंद सीट को जिताने की जिम्मेवारी सौंपी है. सहानुभूति के रथ पर सवार दीप्ति माहेश्वरी का साथ देने के लिए सांसद दीया कुमारी, विधायक सुरेंद्र राठौड़, मदन दिलावर आदि को भी लगाया है. राजसमंद में राजपूत समाज प्रभावशाली हैं. इसलिए दीया कुमारी यहां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं. वैसे भी यह सीट पहले बीजेपी के ही खाते में थी.

कांग्रेस : पार्टी ने प्रभारी मंत्री उदयलाल आंजना को चुनाव जिताने की जिम्मेदारी सौंपी है. कांग्रेस इस सीट को बीजेपी से छीनने के लिए एड़ी से चोटी का जोर लगा रही है. कांग्रेस ने मार्बल खानों वाले इस इलाके में व्यापारियों को लुभाने के लिए खान मंत्री प्रमोद जैन भाया को भी मैदान में उतारा है. कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अजय माकन खुद राजसमंद में लगातार बैठकें और दौरा कर रहे हैं.

सुजानगढ़ विधानसभा क्षेत्र
कांग्रेस : पार्टी ने प्रभारी मंत्री भंवर सिंह भाटी को इस सीट को जिताने की कमान सौंपी है. भाटी उच्च शिक्षा मंत्री भी हैं. उपचुनाव से पहले यह सीट कांग्रेस के ही कब्जे में थी और पार्टी उम्मीदवार और भाटी की जुगलबंदी के चलते फिलहाल दोनों ने चुनावी किलेबंदी कर ली है. जहां तक प्रचार की बात है तो बैनर में प्रत्याशी मनोज मेघवाल से बड़ी फोटो उनके दिवंगत पिता मास्टर भंवर लाल की है. कांग्रेस को सहानुभूति और सत्ता दोनों से वोट मिलने की उम्मीद है.

बीजेपी: उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ का यह गृह जिला है. अपने स्थानीय दबदबे का इस्तेमाल कर ​सीट को जिताना उनकी जिम्मेदारी है. इसके अलावा आरक्षित सीट होने के कारण केन्द्रीय मंत्री अर्जुन लाल मेघवाल को भी लगाया गया है. स्थानीय सांसद राहुल कस्वां को भी जिम्मेदारी सौंपी है. राठौड़-अुर्जन और राहुल की तिकड़ी से बीजेपी को कितना फायदा होगा यह देखना दिलचस्प होगा. प्रचार की समरभूमि में प्रत्याशी खेमाराम मेघवाल से पोस्टर में बड़ा फोटो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का है.
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