राजस्थान विधानसभा उपचुनाव : एक दूसरे के राजनीतिक गढ़ ढहाने के लिए लगानी होगी सेंध

राजस्थान उपचुनाव में पूरा फोकस राजसमन्द, सहाड़ा और सुजानगढ़  विधानसभा सीटों पर है. (प्रतीकात्मक तस्वीर )

राजस्थान उपचुनाव में पूरा फोकस राजसमन्द, सहाड़ा और सुजानगढ़  विधानसभा सीटों पर है. (प्रतीकात्मक तस्वीर )

Rajasthan Assembly by-election: इन उपचुनावों में जीत के लिये दोनों प्रमुख दलों को एक दूसरे के खेमे में सेंध लगानी पड़ेगी. दोनों दलों में गुटबाजी के हालात कमोबेश एक जैसे हैं. वहीं जिन सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं उनमें एक जहां बीजेपी (BJP) का गढ़ है वहीं दो कांग्रेस (Congress) के गढ़ माने जाते हैं.

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हरीश मलिक

जयपुर. उपचुनाव (Assembly by-election) की रणभेरी बज चुकी है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) तीनों सीटों को जीतने की रणनीति बना रहे हैं. वहीं बीजेपी (BJP) इस कोशिश में है कि कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाकर अपनी सीटें बढ़ा सके. बहरहाल, अभी दोनों तक दोनों दलों में जिताऊ उम्मीदवार उतारने पर मंथन चल रहा है. इन तीनों ही सीटों के विधायकों का पिछले दिनों बीमारी के चलते निधन हो गया था. इसलिए उनके परिजनों को टिकट देकर सहानुभूति के वोट हासिल करने की रणनीति भी दिखाई दे रही है.

प्रदेश की तीनों सीटों पर उपचुनाव अगले माह होगा. इसके लिए सरगर्मियां तेज हो रही हैं. खासकर कांग्रेस में इसकी तैयारी बजट घोषणाओं में भी नजर आई थी. कांग्रेस ने तो चूरू और चित्तौड़गढ़ जिले में सभाओं के ज़रिए एक तरह से चुनावी तैयारियों का आगाज भी कर दिया है. मुख्यमंत्री उप चुनाव वाले क्षेत्रों के स्थानीय पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अपने निवास पर बुलाकर चुनावी रणनीति पर चर्चा कर चुके हैं. सीएम ने उनको अपने उम्मीदवार जिताकर सरकार को मजबूत करने के लिए कहा है. दूसरी ओर बीजेपी अध्यक्ष सतीश पूनिया, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ इस कोशिश में हैं कि राजनीतिक और जातिगत समीकरण बैठाकर ऐसे नेता को प्रत्याशी बनाया जाए जिससे कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाई जा सके.

विधानसभा क्षेत्र सहाड़ा (भीलवाड़ा)
भीलवाड़ा जिले का सहाड़ा विधानसभा क्षेत्र निर्विवाद रूप से कांग्रेस का गढ़ रहा है. यहां जाट, ब्राह्मण और गाडरी मतदाता लगभग बराबर हैं. पिछले तीन विधानसभा चुनावों की बात करें तो कांग्रेस के कैलाशचंद्र त्रिवेदी दो बार यहां से विजयी रहे हैं. जबकि 2013 में बीजेपी के डा. बालूराम चौधरी जीते थे. दरअसल तब बीजेपी मोदी लहर पर सवार थी. लेकिन अब कांग्रेस के इस गढ़ को भेदने के लिए बीजेपी को तगड़ी रणनीति बनानी होगी. उपचुनाव में वैसे मतदाताओं की भावनाएं आमतौर पर सत्तारूढ़ दल के पक्ष में होती हैं.

अब तक किस दल के कितनी बार बने विधायक

कांग्रेस : 9



बीजेपी : 2

अन्य दल : 3

विधानसभा क्षेत्र सुजानगढ़ (चूरू)

चूरू जिले की सुजानगढ़ विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक मुकाबला कांटे का रहता है. यहां के मतदाता तीन बार निर्दलीय के सिर भी जीत का सेहरा बांध चुके हैं. यहां जाट मतदाता सर्वाधिक और मेघवाल दूसरे व राजपूत तीसरे नंबर पर हैं. दिवंगत मास्टर भंवरलाल की मतदाताओं पर अच्छी पकड़ थी. कांग्रेस अब उनके पुत्र मनोज मेघवाल को टिकट देने के मूड में है. पिछले तीन चुनावों की बात करें तो जनप्रतिनिधि मेघवाल समाज से बने हैं. दो बार मास्टर भंवरलाल और 2013 में खेमाराम मेघवाल को जीत हासिल हुई थी.

अब तक किस दल के कितनी बार बने विधायक

कांग्रेस : 6

बीजेपी : 4

जनसंघ : 1

जनता पार्टी : 1

निर्दलीय : 3

विधानसभा क्षेत्र राजसमंद (राजसमंद)

भारतीय जनता पार्टी और उसकी नेत्री दिवंगत विधायक किरण माहेश्वरी के गढ़ राजसमंद विधानसभा सीट जीतने के लिए सत्तारूढ़ कांग्रेस को एड़ी से चोटी का जोर लगाना होगा. पिछले तीनों विधानसभा चुनावों में राजसमंद की जनता ने किरण माहेश्वरी को भारी बहुमत से जिताया था. कांग्रेस ने उम्मीदवार बदले, लेकिन उसे फायदा नहीं हुआ. जातिगत आंकड़ों की बात करें तो क्षेत्र में अनुसूचित जाति के मतदाता सर्वाधिक हैं. कुमावत और जाट क्रमश: दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं, लेकिन माहेश्वरी ने सभी समाजों में पकड़ बनाई थी. बीजेपी किरण माहेश्वरी की पुत्री दीप्ति पर दांव खेल सकती है. क्योंकि इससे सहानुभूति का वोट भी बीजेपी को मिल सकता है.

अब तक किस दल के कितनी बार बने विधायक

बीजेपी : 6

कांग्रेस : 7

जनता पार्टी : 1
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