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OPINION: राजस्थान में BJP के लिए गले की फांस बने मौजूदा विधायक!

राजस्थान में 160 मौजूदा विधायक फांस बन गए.
राजस्थान में 160 मौजूदा विधायक फांस बन गए.

राजस्थान में 160 मौजूदा विधायक फांस बन गए. सभी फिर टिकट चाहते हैं. बीजेपी कितने विधायकों को टिकट दें और किन विधायकों को ड्रॉप करे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 1, 2018, 11:13 PM IST
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राजस्थान में बीजेपी ने 2013 में 200 में से 163 विधायकों के भारी भरकम बहुमत से जीत का जश्न मनाया था. अब 160 मौजूदा विधायक फांस बन गए. सभी विधानसभा चुनाव-2018 फिर टिकट चाहते हैं. लेकिन कितने विधायकों को टिकट दें और किन विधायकों को ड्रॉप करें.

मौजूदा विधायकों के टिकटों पर बडे़ पैमाने पर कैंची चलाने की पार्टी नेतृत्व की सलाह पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की जुदा राय के चलते दावेदारों के पैनल की लिस्ट फिलहाल पुर्नविचार के लिए राजस्थान की कोर कमेटी के पाले में डाल दी गई है. गुरुवार को दिल्ली में बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक में मध्यप्रदेश के साथ राजस्थान के पैनल पर भी चर्चा होनी थी. लेकिन इसी पेंच के चलते राजस्थान की लिस्ट को फिलहाल अलग रखा गया.

सूत्रों का दावा है कि बीजेपी आलाकमान की सर्वे रिपोर्ट, राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ की फीडबैक रिपोर्ट और पार्टी के विस्तारकों की रिपोर्ट अधिकतर मौजूदा विधायकों के पक्ष में नहीं हैं. सत्ता विरोधी लहर से निपटने के लिए पार्टी नेतृत्व इन्हीं रिपोर्ट का हवाला देकर से 55 से 60 मौजूदा विधायकों को फिर से टिकट देने के पक्ष में नहीं हैं.



राजस्थान बीजेपी के टिकटों के पैनल तैयार करने वाली बीजेपी कोर कमेटी में भी इस मुद्दे पर एक राय नहीं है. लेकिन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खेमे ने भी अपने सर्वे और फीडबैक रिपोर्ट के आधार पर ज्यादातर मौजूदा विधायकों को फिर से टिकट देने की वकालत की है.

पहला तर्क यह है कि वसुंधराराजे सरकार के विकास के काम का दावा इन्हीं मौजूदा विधायकों के क्षेत्रों में काम से गिनाया जा रहा है. इनमें से अधिकतर का टिकट काटने का संदेश सरकार के विकास के दावे पर भी सवाल खड़ा करेगा.

दूसरा तर्क यह है कि मौजूदा विधायकों की फील्ड में और संगठन में भी अपनी ताकत है. कई सीनियर विधायक भी हैं. अगर टिकटों पर ज्यादा कैंची चली तो बगावत की खतरा भी ज्यादा है.

राजस्थान बीजेपी की चुनाव प्रबंध समिति के संयोजक गजेंद्र सिंह शेखावत ने सफाई दी है कि टिकट के पैनल 12 हजार कार्यकर्ताओं की राय के बाद तैयार किए हैं. पार्टी संसदीय बोर्ड की आगे की बैठक में मंजूरी मिल जाएगी. लेकिन मौजूदा विधायकों के टिकट को लेकर विवाद पर शेखावत ने चुप्पी साधी ली है.

वैसे सत्ता विरोधी लहर से निपटने के लिए मौजूदा विधायकों के टिकट काटने का फार्मूला बीजेपी गुजरात समेत कई राज्यों में आजमा चुकी है. ऐसे में पार्टी को उम्मीद है कि अगर राजस्थान में भी इसी फॉर्मूले से नए चेहेरों को मैदान में उतारें तो एंटी इनकमबेंसी पर कुछ हद तक काबू पाया जा सकता है.


दूसरा पहलू, यह है कि मौजूदा विधायकों में से अधिकतर खुद राजे की पसंद के हैं. 2013 में टिकट भी राजे की पसंद पर ही मिला था. राजस्थान बीजेपी अध्यक्ष पद को लेकर विवाद के दौरान भी विधायकों की फौज राजे के साथ थी.

राजे की इसी ताकत के चलते पार्टी नेतृत्व को गजेंद्र सिंह शेखावत को कमान सौंपने के अपने ही फैसले से पीछे हटना पड़ा था. जाहिर है राजे को भरोसा अपनी पसंद के विधायकों पर अधिक है, जिताऊ और टिकाऊ का.

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