मतदान का बहिष्कार: प्रदेश में कई जगह ग्रामीणों ने दिखाई नाराजगी, नहीं डाले वोट

बीजेपी और कांग्रेस भले ही विकास और संघर्ष के दावों के साथ चुनाव मैदान में उतरे हों, लेकिन प्रदेश में दोनों ही राजनैतिक दलों से खफा लोगों ने कई जगह मतदान का बहिष्कार कर अपनी नाराजगी प्रकट की है.

News18 Rajasthan
Updated: December 7, 2018, 7:55 PM IST
मतदान का बहिष्कार: प्रदेश में कई जगह ग्रामीणों ने दिखाई नाराजगी, नहीं डाले वोट
हनुमानगढ़ के जसाना गांव में ग्रामीणों ने मतदान नहीं किया. वे गांव में दिनभर बैठे बतियाते रहे। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।
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Updated: December 7, 2018, 7:55 PM IST
बीजेपी और कांग्रेस भले ही विकास और संघर्ष के दावों के साथ चुनाव मैदान में उतरे हों, लेकिन प्रदेश में दोनों ही राजनैतिक दलों से खफा लोगों ने कई जगह मतदान का बहिष्कार कर अपनी नाराजगी प्रकट की है. मतदान का बहिष्कार करने वाले स्थानों पर प्रशासन ने मतदाताओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने.

झुंझुनूं में पिलानी विधानसभा क्षेत्र के दो मतदान केन्द्रों कुतुबपुरा और धत्तरवाला पर एक भी मतदाता वोट डालने नहीं आया. दोनों बूथ के ग्रामीणों ने गांवों से मुर्गी फार्मों को हटाने मांग की मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार किया. जोधपुर में भोपालगढ़ विधानसभा क्षेत्र के मैलावास गांव में पेयजल की समस्या को लेकर ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार किया. वहां बूथ संख्या 132 में एक भी मतदाता ने मतदान नहीं किया. किसी भी प्रत्याशी का एजेंट भी नहीं पहुंचा बूथ पर.

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कहीं सड़क तो कहीं अन्य सुविधा नहीं मिलने से नाराज हैं ग्रामीण

धौलपुर के राजाखेड़ा के सेमरपुरा गांव में ग्रामीणों ने सड़क मार्ग के समस्या का समाधान नहीं होने के कारण मतदान का बहिष्कार किया. भरतपुर की वैर विधानसभा के बांसी गांव में ग्रामीणों ने समस्याओं का समाधान नहीं होने के कारण चुनावों का बहिष्कार किया. बाड़मेर के शिव विधानसभा के बदसिंगा गांव में मूलभूत सुविधाएं मुहैया नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार किया.

जसाना में हत्यारों का सुराग नहीं लग पाने से नाराज हैं ग्रामीण
हनुमानगढ़ की नोहर विधानसभा क्षेत्र के जसाना गांव में भी ग्रामीणों ने एक भी वोट नहीं डाला. 14 माह पूर्व गांव में हुए पवन व्यास के हत्यारों का पुलिस द्वारा सुराग नहीं लगा पाने से नाराज ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार किया. यहां किसी भी पार्टी ने अपना पोलिंग एजेंट भी नहीं भेजा. मतदानकर्मी दिनभर ग्रामीणों का इंतजार करने के बाद शाम पांच बजे खाली हाथ वापिस लौट गए.
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