डिप्टी CM बने सचिन पायलट ने राजस्थान में ऐसे भरी सियासी उड़ान

सचिन पायलट (twitter)
सचिन पायलट (twitter)

सचिन पायलट को उस दौर में राजस्थान के कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जब पार्टी 2013 के विधानसभा चुनाव में महज 21 सीटों पर सिमट गई थी. उन्होंने पार्टी कैडर को एकजुट करने का काम किया, जिसका नतीजा सबके सामने है.

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  • Last Updated: December 14, 2018, 10:14 PM IST
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मध्य प्रदेश के बाद राजस्थान में भी सीएम के नाम पर अंतिम मुहर लग चुकी है. अशोक गहलोत राजस्थान के नए सीएम होंगे और सचिन पायलट को डिप्टी सीएम का पद दिया गया है. कई दिनों के विचार-विमर्श के बाद कांग्रेस आलाकमान ने यह फैसला लिया. सबसे कम उम्र के सासंद बनने से लेकर 36 साल की उम्र में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष का पद संभालने वाले सचिन पायलट विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के स्टार चेहरा रहे. प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर सचिन पायलट के लिए यह चुनाव चुनौती और अवसर दोनों के रूप में था.

सचिन पायलट को उस दौर में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जब कांग्रेस विधानसभा चुनवा में महज 21 सीटों पर राजस्थान में सिमट गई थी, इसके बाद विपक्ष में रहते हुए सचिन पायलट ने पार्टी प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर अपनी टीम बनाने के साथ सरकार को लगातार घेरा.

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7 सितंबर 1977 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में जन्मे सचिन पायलट ने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली के एयरफोर्स बाल भारती स्कूल से की. दिल्ली के ही सेंट स्टीफेंस कॉलेज से उन्होंने अंग्रेजी ऑनर्स में बीए किया. पायलट ने ग्रेजुएशन के बाद बीबीसी के दिल्ली ब्यूरो में कुछ समय के लिए काम किया. इसके बाद पायलट एमबीए करने के लिए अमेरिका चले गए. उन्होंने अमेरिका के पेनिसिलवेनिया यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री हासिल की.
सचिन के पिता राजेश पायलट कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में एक थे. दौसा के पास सड़क हादसे में पिता राजेश पायलट के निधन के बाद सचिन ने उनकी राजनीतिक विरासत संभाली. बीते 16 साल से पायलट राजनीतिक जीवन में हैं. दरअसल, अपने पिता राजेश पायलट की मौत के बाद सचिन पायलट साल 2002 में 10 फरवरी को कांग्रेस में शामिल हुए. 2004 में पायलट ने राजस्थान की दौसा लोकसभा सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ा और करीब 1 लाख 20 हजार मतों से अपने प्रतिद्वन्दी को हराया.

26 साल की उम्र में सचिन पायलट सांसद निर्वाचित हो गए थे. साल 2009 में पायलट ने राजस्थान की अजमेर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत भी दर्ज की, इस बार सचिन पायलट यूपीए-2 सरकार में मंत्री भी बने.

यही नहीं अपनी पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए मंत्री रहने के दौरान प्रादेशिक सेना में पायलट लेफ्टिनेंट भी बन गए. सिख रेजीमेंट की 124 टेरिटोरियल आर्मी बटालियन में अधिकारी के तौर पर उन्हें कमीशन दिया गया. पायलट का सेना में शामिल होना इसलिए भी खास रहा क्योकिं उन्हें लेफ्टिनेंट की मानद रैंक नहीं दी गई बल्कि उन्होंने बाकायदा परीक्षा पास कर इस रैंक को हासिल किया था.

सचिन के पिता राजेश पायलट वायुसेना में स्क्वाड्रन लीडर थे और उनके दादा भारतीय सेना में गैर कमीशन अधिकारी रह चुके थे. राजस्थान में साल 2013 के दिसम्बर में जब विधानसभा चुनाव हुए और सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस महज 21 सीटें ही जीत पाई तो मझदार में हिचकोले खाती कांग्रेस की नैया पार लगाने की जिम्मेदारी सचिन पायलट को दी गई.

पायलट ने 21 जनवरी 2014 को राजस्थान कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर पद संभाला. हालांकि, उनके पद संभालने के तुरंत बाद हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस, राजस्थान की सभी 25 सीटें हार गई लेकिन, महज 4 माह बाद 4 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में सचिन पायलट के नेतृत्व में कांग्रेस ने चुनाव लड़ा और 4 में से 3 सीटों पर जीत दर्ज की.

2018 में एक बार फिर दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ और सभी सीटें भाजपा के हाथ से निकलकर कांग्रेस की झोली में चली गई. सचिन पायलट के नेतृत्व में कांग्रेस ने निकाय और पंचायत उपचुनावों में भी बड़ी जीत हासिल की.

पहली बार दाैसा से सांसद बने थे सचिन पायलट

► 7 सितंबर 1977 को यूपी के सहारनपुर में जन्म
► सचिन के पिता राजेश पायलट कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में रहे
► सचिन पायलट 2004 में दौसा सीट से कांग्रेस के टिकट पर जीतकर पहली बार सासंद बने
► 26 साल की उम्र में पहली बार सांसद बने सचिन पायलट
► 31 साल की उम्र में दूसरी बार अजमेर से सांसद बने, केंद्र में मंत्री बने
► केंद्र में कॉर्पोरेट अफेयर्स, संचार मंत्री रहे हैं सचिन
► 36 साल की उम्र में राजस्थान कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष की कमान संभाली
► राजस्थान की राजनीति में सचिन पायलट युवा नेताओं में अग्रणी
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