1971 में इंदिरा गांधी से मुलाकात के बाद बदल गए थे अशोक गहलोत के सितारे
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1971 में इंदिरा गांधी से मुलाकात के बाद बदल गए थे अशोक गहलोत के सितारे
अशोक गहलोत। फेसबुक.

इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और नरसिम्हाराव सरकार में मंत्री रह चुके अशोक गहलोत के राजनीतिक करियर ने 1971 में इंदिरा गांधी से मुलाकात के बाद रफ्तार पकड़ी थी.

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इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और नरसिम्हाराव सरकार में मंत्री रह चुके अशोक गहलोत के राजनीतिक करियर ने 1971 में इंदिरा गांधी से मुलाकात के बाद रफ्तार पकड़ी थी. 70 के दशक में 4000 रुपए में अपनी बाइक बेचकर जोधपुर से राजनीति सफर शुरू करने वाले गहलोत ने पहली ही मुलाकात में इंदिरा गांधी को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने उनको 1974 में एनएसयूआई की जिम्मेदारी सौंप दी. उन्हें एनएसयूआई का अध्यक्ष बना दिया गया.

गहलोत ने प.बंगाल के बनगांव शिविर और भारत-पाक युद्ध के बाद शरणार्थी शिविर में अपने कार्यों से अमिट छाप छोड़ी. उसके बाद गहलोत 1980 में पहली बार जोधपुर से सांसद निर्वाचित हुए. एक बार संसद की चौखट पार करने के बाद गहलोत ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. राजनीति के तमाम दांवपेंचों को पार करते हुए गहलोत न केवल राज्य, बल्कि केन्द्र में भी अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहे. गहलोत के इसी राजनीतिक कौशल की बदौलत पार्टी में उनकी पहचान संकटमोचक के रूप में बनी.

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पांच बार सांसद चुने गए गहलोत
गहलोत 7वीं, 8वीं,10वीं,11वीं और 12वीं लोकसभा में पांच बार सांसद चुने गए. उसके बाद उन्होंने दो बार बतौर मुख्यमंत्री राजस्थान की कमान संभाली. गुजरात प्रभारी रहते हुए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और पीएम नरेन्द्र मोदी को उनके गढ़ विधानसभा चुनावों में कड़ी टक्कर दी. पिछले दिनों पंजाब और कर्नाटक में विधानसभा चुनावों में अपने राजनीतिक कौशल दिखाया. अब वे तीसरी बार राजस्थान की कमान संभालने जा रहे हैं.
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