राजनीतिक-प्रशासनिक दक्षता का बेजोड़ संगम हैं गहलोत, अकाल प्रबंधन को दिए नए आयाम
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राजस्थान के 22वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे अशोक गहलोत की प्रशासनिक दक्षता भी किसी से छुपी हुई नहीं है. वे प्रशासनिक कार्यों पर भी उतनी ही पकड़ रखते हैं, जितनी राजनीतिक प्रबंधन में रखते हैं.

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राजस्थान के 22वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे अशोक गहलोत की प्रशासनिक दक्षता भी किसी से छुपी हुई नहीं है. वे प्रशासनिक कार्यों पर भी उतनी ही पकड़ रखते हैं, जितनी राजनीतिक प्रबंधन में रखते हैं. गहलोत के अकाल प्रबंधन के सभी कायल हैं. यही वजह है कि गहलोत हमेशा राजस्थान के लिए कांग्रेस आलाकमान की पहली पसंद रहे हैं.

दो बार सीएम रहते हुए गहलोत ने प्रदेश में आमजन के लिए कई लोकप्रिय योजनाएं शुरू की थी. गहलोत की इन योजनाओं की गूंज केवल प्रदेश तक ही सीमित नहीं रही थी, बल्कि प्रदेश के बाहर भी उन्हें सहारा गया. इनमें प्रमुख है गहलोत का अकाल प्रबंधन. गहलोत के दूसरे कार्यकाल के दौरान प्रदेश में पड़े अकाल का गहलोत ने शानदार प्रबंधन किया था. गहलोत के इस अकाल प्रबंधन की चौतरफा प्रशंसा हुई थी. इस अकाल प्रबंधन ने गहलोत की प्रशासनिक छवि को और निखार दिया.

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नि:शुल्क दवा योजना हुई काफी लोकप्रिय
केवल अकाल प्रबंधन ही नहीं, गहलोत की कई अन्य योजनाएं भी इतनी लोकप्रिय हुई कि उन्हें रोल मॉडल माना गया. अकाल प्रबंधन के अलावा गहलोत ने वृद्धावस्था और विधवा पेंशन योजना को भी लागू किया था. उसके बाद गहलोत ने नि:शुल्क दवा योजना लागू की थी. बाद में निशुल्क स्वास्थ्य जांच योजना भी लाए. इन योजनाओं की बदौलत प्रदेश में गहलोत की लोकप्रिय मुख्यमंत्री के रूप में पहचान बनी.
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