लिंगानुपात सुधार में राजस्थान नंबर वन, दिल्‍ली में किया जाएगा सम्‍मानित

शिशु लिंगानुपात में राजस्‍थान में देश भर में सबसे ज्‍यादा सुधार हुआ है. इस उल्‍लेखनीय सफलता के लिए प्रदेश को दिल्‍ली में सम्‍मनित किया जाएगा.

Arbaaz Ahmed | News18 Rajasthan
Updated: August 6, 2019, 2:03 PM IST
लिंगानुपात सुधार में राजस्थान नंबर वन, दिल्‍ली में किया जाएगा सम्‍मानित
लिंगानुपात के सुधार में देश में नंबर बन बना राजस्थान (सांकेतिक तस्वीर)
Arbaaz Ahmed | News18 Rajasthan
Updated: August 6, 2019, 2:03 PM IST
शिशु लिंगानुपात में राजस्‍थान में देश भर में सबसे ज्‍यादा सुधार हुआ है. एक समय कन्या भ्रूण हत्या की घटनाएं इस हद तक बढ़ गई थीं कि लिंगानुपात 888 के चिंताजनक स्‍तर तक पहुंच गया था. लेकिन, वर्ष 2011 के बाद से लगातार किए गए प्रयासों के चलते प्रदेश ने यह सफलता हासिल की है. अब शिशु लिंगानुपात 948 तक पहुंच गया है. राजस्‍थान को बुधवार को दिल्ली में आयोजित एक समारोह में सम्‍मानित किया जाएगा.

शिशु लिंगानुपात में हुआ सुधार

राजस्थान में जन्म के समय का शिशु लिंगानुपात वित्त वर्ष 2018-19 में बढ़कर 948 हो गया है. चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग के प्रेग्नेंसी एंड चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम यानी पीसीटीएस के आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है. पीसीटीएस के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में जन्म के समय बाल लिंगानुपात में हर साल सुधार हुआ है. राजस्थान ने कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ जो अभियान चलाया था, उसका नतीजा अब सामने आया है.

राजस्थान में शिशु लिंगानुपात में हुआ सुधार (सांकेतिक तस्वीर)
राजस्थान में शिशु लिंगानुपात में हुआ सुधार (सांकेतिक तस्वीर)


दिल्ली के विज्ञान भवन में राजस्थान को सम्‍मानित किया जाएगा.

आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में हर साल करीब 17 लाख प्रसव होते हैं और इनमें से 14 लाख 50 हजार संस्थागत (अस्‍पताल या आंगनबाड़ी केंद्र) तरीके से होते हैं. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने बताया कि जन्म के समय के बाल लिंगानुपात की दृष्टि से प्रदेश का बांसवाड़ा जिला पहले स्थान पर रहा है. बांसवाड़ा जिले में वर्ष 2018-19 के दौरान हुए शिशु जन्म में 1000 बालकों की तुलना में 1003 बालिकाओं ने जन्म लिया.

सख्ती आई काम
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कन्याभ्रूण हत्या और भ्रूण के लिंग जांच के खिलाफ सख्ती आखिरकार अब जाकर काम आई है. (सांकेतिक तस्वीर)
कन्याभ्रूण हत्या और भ्रूण के लिंग जांच के खिलाफ सख्ती आखिरकार अब जाकर काम आई है. (सांकेतिक तस्वीर)


जिले में वर्ष 2015-16 में लिंगानुपात 941, वर्ष 2016-17 में 964, वर्ष 2017-18 में 954 था. डॉ. शर्मा ने बताया कि वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान बाल लिंगानुपात चूरू में 986, बाड़मेर में 982, हनुमानगढ़ में 977 और जालौर में 974 रहा. उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान गत वर्ष की तुलना में सर्वाधिक वृद्धि बाड़मेर जिले में हुई है. बाड़मेर में लिंगानुपात 954 से बढ़कर 982 हो गया. इसी प्रकार जालौर में यह 950 से 974, भीलवाड़ा में 933 से बढ़कर 951, प्रतापगढ़ में 921 से 938 व जोधपुर में 947 से बढ़कर 963 हो गया.

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First published: August 6, 2019, 1:41 PM IST
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