राजस्थान BJP प्रभारी अरूण सिंह आज शाम को सतीश पूनिया के साथ टिकट को लेकर करेंगे मंथन

 इसलिए दावेदार फील्ड में माहौल बनाकर टिकट पक्का करने में जुटे हैं. (फाइल फोटो)

इसलिए दावेदार फील्ड में माहौल बनाकर टिकट पक्का करने में जुटे हैं. (फाइल फोटो)

कांग्रेस (Congress) का ग्रासरूट तक कैडर नहीं दिखाई देता. आरएसएस के मुकाबले बूथ मैनेजमेंट की काट निकालने में कांग्रेस को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.

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जयपुर. राजस्थान बीजेपी प्रभारी अरूण सिंह (Arun Singh) राजसमंद और सहाड़ा की नब्ज टटोल कर आज शाम जयपुर पहुंच सकते हैं.  शाम को प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया (Satish punia) से उनकी टिकट बंटवारे पर चर्चा हो सकती है. पूनिया का दावा है कि तजुर्बे के साथ युवा जोश को टिकट में तरजीह मिलेगी. संकेत साफ है कि बुजुर्ग दावेदारों के बजाय युवा पार्टी की प्राथमिकता में होंगे. मगर जहां भी सामाजिक संतुलन गड़बड़ायेगा, पार्टी बुजुर्गों पर भी दांव खेलने से नहीं हिचकेगी. भाजपा में राजसमंद और सहाड़ा में टिकट के दावेदारों में परिवारवाद हावी दिख रहा है. भाजपा में इस बार कांग्रेस (Congress) की तरह गुटबाजी ज्यादा दिख रही है, जिससे कार्यकर्ता परेशान हैं. भाजपा का कमजोर पक्ष आपसी फूट है पर उसका मजबूत कैडर उसकी ताकत है.

वहीं, कांग्रेस का ग्रासरूट तक कैडर नहीं दिखाई देता. आरएसएस के मुकाबले बूथ मैनेजमेंट की काट निकालने में कांग्रेस को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. भाजपा में किरण माहेश्वरी और पूर्व सांसद हरिओम सिंह राठौड़ के परिवारों से तगड़ी दावेदारी सामने आई है. किरण माहेश्वरी की बेटी दीप्ति माहेश्वरी मैदान में ताल ठोक रही है. रोजाना आम जनता के बीच जाकर अपनी मां के किये कामों को दीप्ति गिना रही है. भाजपा कार्यकर्ताओं से सहयोग मांग रही है. अपनी मां की राजनीतिक विरासत को आगे बढाने के लिए भाजपा से टिकट मांग रही है. पूर्व सासंद हरिओम सिंह राठौड़ के पुत्र कर्णवीर सिंह राठौड़ की भी मजबूत दावेदारी  है. महेंद्र कोठारी और जगदीश पालीवाल भी बड़े दावेदारों में शुमार हैं.  दिनेश बड़ोला भी दावेदार हैं.  भाजपा का एक खेमा सहानुभूति फैक्टर को ध्यान में रखते हुए दीप्ति की पैरवी कर रहा है. माहेश्वरी के नाम पर नेता प्रतिपक्ष गुलाबंचद कटारिया का खेमा सहमत नहीं है.

भाजपा में तीन बड़े दावेदार उभर कर सामने आए हैं

कटारिया के अलावा सांसद दीया कुमारी का खेमा अपना उम्मीदवार उतारना चाहता है. सभी को स्वीकार्य चेहरे की तलाश में नेता मशक्कत कर रहे हैं.  सहाड़ा भाजपा में तो टिकट की लड़ाई घर के भीतर है. दो सगे भाई और कांग्रेस विधायक के समधी दावेदार हैं. पूर्व विधायक डॉ. रतनलाल जाट, डॉ. बालूराम जाट, रूपलाल जाट, मनफूल चौधरी, कालूलाल गुर्जर और लादूलाल पीतलिया दावेदार हैं. डॉ. रतनलाल और डॉ. बालूराम सगे भाई हैं. भाजपा अपने ओल्ड गार्ड डॉक्टर रतनलाल पर भरोसा जता सकती है. दोनों पहले विधायक रह चुके हैं. रूपलाल जाट को पिछली बार टिकट मिला था. वे हार गए थे. रूपलाल जाट कांग्रेस विधायक रामलाल जाट के समधी हैं. मनफूल चौधरी कमर्शियल टेक्सेशन के अधिकारी हैं. टिकट के लिए नॉकरी छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं. पूर्व मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर और भाजपा नेता लादूलाल पीतलिया भी दावेदार हैं. सहाड़ा से सियासी समीकरणों के हिसाब से भाजपा जाट को टिकट दे सकती है. सुजानगढ़ में भाजपा में तीन बड़े दावेदार उभर कर सामने आए हैं.
माहौल बनाकर टिकट पक्का करने में जुटे हैं

पूर्व मंत्री खेमाराम मेघवाल, बीएल भाटी और संतोष मेघवाल दावेदार हैं. संतोष मेघवाल वर्तमान में प्रधान हैं. पिछले चुनाव में निर्दलीय लड़कर 36 हजार वोट लिए थे. कुछ माह पहले ही भाजपा में आई हैं. बीएल भाटी पहले पूर्व मंत्री युनूस खान के ओएसडी रहे हैं. पिछली बार भी टिकट की दावेदारी की थी. खेमाराम मेघवाल 2 बार विधायक रह चुके हैं. वसुंधरा राजे के पहले कार्यकाल में खान मंत्री बने. मगर पिछला चुनाव हार गए. टिकट के लिए अगला सप्ताह निर्णायक है. भाजपा एक के बाद एक कई सर्वे करा चुकी है. जिताऊ चेहरे के लिए सर्वे की रिपोर्ट अहम होगी. इसलिए दावेदार फील्ड में माहौल बनाकर टिकट पक्का करने में जुटे हैं.
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