राजस्थान बीजेपी में गुटबाजी चरम पर, वसुंधरा राजे समर्थक विधायकों ने लिखा शिकायती पत्र

शिकायती पत्र पर लगभग डेढ़ दर्जन बीजेपी विधायकों ने हस्ताक्षर हैं.

शिकायती पत्र पर लगभग डेढ़ दर्जन बीजेपी विधायकों ने हस्ताक्षर हैं.

Rajasthan BJP: राजस्थान बीजेपी में गुटबाजी पूरे उफान पर है. सड़क से लेकर सदन तक गुटबाजी सामने आ रही है. वसुंधरा समर्थक विधायकों ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत चार नेताओं को शिकायती पत्र लिखा है. विधयाकों ने सदन में बोलने के मामले में हो रहे पक्षपात के संदर्भ में पत्र लिखा है. सदन में जनता के मामले नहीं उठाने से रोकने के आरोप लगाए हैं.

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जयपुर. राजस्थान बीजेपी में गुटबाजी इतनी चरम पर पहुंच चुकी है कि सड़क से लेकर सदन तक खुलकर अब आरोप-प्रत्यारोप लगने लगे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) के समर्थित विधायकों ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत चार नेताओं को शिकायती पत्र लिखा है. यह पत्र भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को लिखा है. पत्र में सदन में वसुंधरा राजे समर्थित लगभग डेढ़ दर्जन विधायकों को बोलने नहीं दिए जाने के आरोप लगाए गए हैं. पत्र में इन विधायकों ने लिखा है कि पक्षपात कर उन्हें स्थगन प्रस्ताव समेत अन्य मुद्दों पर बोलने से रोका जा रहा है. .

पत्र में इन भाजपा विधायकों के हस्ताक्षर

मिली जानकारी के मुताबिक छबड़ा विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने इन पत्रों पर हस्ताक्षर करवाए हैं. यह पत्र राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया को भेजा है. पत्र पर लगभग डेढ़ दर्जन विधायकों ने हस्ताक्षर हैं. जानकारी के मुताबिक पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और विधायक कैलाश मेघवाल पुष्पेंद्र सिंह राणावत, नरपत सिंह राजवी, नरेंद्र नागर, कालूराम मेघवाल ,गोविंद रानीपुरिया ,रामप्रताप कासनिया ,अशोक डोगरा ,गौतम लाल मीणा, रामस्वरूप लांबा ,धर्मेंद्र मोची ,जोगाराम कुमावत, हरेंद्र निनामा ,गोपीराम मीणा ,शंकर सिंह रावत छगन सिंह,समेत अन्य विधायक शामिल हैं.

इधर इस मामले में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा प्रदेश से विधायक कैलाश मेघवाल ने कहा कि विधायकों को सदन में बोलने के समान अवसर दिए जाने चाहिए और सदन में बोलने की अनुमति नेता प्रतिपक्ष और सचेतक की होती है. मेघवाल ने कहा कि छबड़ा विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने उस पत्र पर हस्ताक्षर करवाए थे.
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