Rajasthan Crisis: बसपा के विधायकों के कांग्रेस में विलय को BJP MLA ने नए सिरे से दी चुनौती, हाईकोर्ट में 2 याचिका दायर
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Rajasthan Crisis: बसपा के विधायकों के कांग्रेस में विलय को BJP MLA ने नए सिरे से दी चुनौती, हाईकोर्ट में 2 याचिका दायर
भाजपा विधायक की याचिका पर इसी सप्‍ताह सुनाई हो सकती है.

भाजपा विधायक मदन दिलावर (BJP MLAs Madan Dilawar) ने बसपा के छह विधायकों के कांग्रेस में विलय को लेकर दो याचिकाओं के जरिए कोर्ट में नए सिरे चुनौती दी है. जबकि बहुजन समाज पार्टी के राष्‍ट्रीय महासचिव सतीश मिश्रा (Satish Mishra) की ओर से भी इस मामले में एक याचिका बुधवार को दायर की जा सकती है.

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जयपुर. राजस्थान में चल रहे सियासी घटनाक्रम का एक केंद्र लगातार राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) बना हुआ है. पहले सचिन पायलट (Sachin Pilot) गुट की ओर से दायर याचिका के चलते सबकी नजरें हाईकोर्ट पर लगी हुई थीं. वहीं, अब बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय को लेकर दायर याचिकाओं के चलते कोर्ट इस राजनीतिक घटनाक्रम का एक मुख्य केंद्र बन गया है.आज एक बार फिर भाजपा विधायक मदन दिलावर (BJP MLAs Madan Dilawar) ने दो याचिकाओं के जरिए विलय को असंवैधानिक बताते हुए स्पीकर के आदेश को रद्द करने की मांग की है, जिस पर इसी सप्ताह सुनवाई होने की उम्मीद है.

नए सिरे से दी विलय को चुनौती
बसपा के छह विधायकों के कांग्रेस में विलय को अब भाजपा विधायक मदन दिलावर ने नए सिरे से राजस्थान हाई कोर्ट में चुनौती दी है. उनकी पहली याचिका को सोमवार को जस्टिस महेंद्र गोयल की अदालत ने सारहीन मानते हुए निस्तारित कर दिया था, जिसके बाद आज उन्होंने अधिवक्ता आशीष शर्मा के जरिए सुबह दूसरी और दोपहर तक तीसरी याचिका दायर करते हुए नए सिरे से विलय और 22 जुलाई के स्पीकर सीपी जोशी के आदेश को चुनौती दी है.
दुर्भावना से ग्रसित होकर स्पीकर ने खारिज की याचिका
दोनों याचिकाओं में कहा गया है कि राजस्थान विधानसभा के स्पीकर ने दुर्भावना से ग्रसित होकर उनके समक्ष दायर याचिका को उन्हें बिना सुनवाई के अवसर दिए खारिज कर दिया वो भी तब, जब याचिकाकर्ता ने स्पीकर के सुनवाई नहीं करने पर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी. ऐसे में याचिकाकर्ता की याचिका को सारहीन करवाने के उद्देश्य से अपने समक्ष याचिका को स्पीकर ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि याचिका में लगाई गए विधानसभा के आदेश को सत्यापित नहीं करवाया गया.



क्यों पड़ी दो याचिकाएं दायर करने की आवश्यकता!
दरअसल सोमवार को पहली याचिका निस्तारित होने के बाद मदन दिलावर की ओर से जल्दबाजी में विधानसभा सचिवालय की ओर से दी गई एक पेज की जानकारी को ही चुनौती दे दी गई, लेकिन इसके बाद उन्हें विधानसभा अध्य्क्ष की ओर से 22 जुलाई को दिए गए आदेश की प्रति भी मिल गई. ऐसे में दिलावर की ओर से दूसरी याचिका में इस पूरे आदेश को चुनौती दी गई है.

बसपा की ओर से बुधवार को दायर हो सकती है याचिका
इस पूरे मामले में बहुजन समाज पार्टी की ओर से भी एक याचिका बुधवार को हाई कोर्ट में दायर हो सकती है. पार्टी महासचिव सतीश मिश्रा की ओर से यह याचिका दायर की जा सकती है. पार्टी की ओर से कहा गया है कि बसपा एक राष्ट्रीय पार्टी है, ऐसे में उसका विलय तभी मान्य किया जा सकता है, जब वह राष्ट्रीय स्तर पर हो. ऐसे में पार्टी विधानसभा अध्यक्ष के 18 सितम्बर 2019 के विलय के आदेश को चुनौती दे सकती है.

उल्लेखनीय है कि 2018 के चुनाव में संदीप यादव, वाजिब अली, दीपचंद खेरिया, लखन मीणा, जोगेंद्र अवाना और राजेंद्र गुधा बसपा के टिकट पर जीत कर विधानसभा पहुंचे थे. उन्होंने पिछले साल 16 सितंबर को कांग्रेस में एक समूह के रूप में विलय के लिए अर्जी दी थी. विधानसभा अध्यक्ष ने अर्जी के दो दिन बाद आदेश जारी कर घोषित किया कि इन छह विधायकों से कांग्रेस के अभिन्न सदस्य की तरह व्यवहार किया जाए. इस विलय से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार को मजबूती मिली और 200 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस सदस्यों की संख्या बढ़कर 107 हो गई.
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