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Rajasthan Politics: 'गुजरात मॉडल' पर विधानसभा चुनाव लड़ेगी बीजेपी! क्या है ये MODEL?

कुंभलगढ़ के आयोजित बीजेपी के चिंतन शिविर से निकला मंथन

कुंभलगढ़ के आयोजित बीजेपी के चिंतन शिविर से निकला मंथन

Politics in Rajasthan BJP : कुंभलगढ़ के चिंतन शिविर में मंथन से यह अमृत निकला है कि बीजेपी इस बार राजस्थान में सीएम फेस की बजाए पीएम फेस पर चुनावी समर में उतरेगी. मुख्यमंत्री के लिए कोई चेहरा पहले से घोषित नहीं किया जाएगा. पार्लियामेंट्री बोर्ड ही सीएम घोषित करेगा. बीजेपी में आपसी खींचतान और गुटबाजी को रोकने के लिए यह कवायद की गई है.

  • News18Hindi
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    जयपुर. राजस्थान में भले ही विधानसभा चुनाव दो साल बाद हों, लेकिन बीजेपी ने कुंभलगढ़ चिंतन शिविर से ही तैयारियों शुरू कर दी हैं. बीजेपी ने तय किया है कि इस बार के विधानसभा चुनाव में गुजरात मॉडल पर चुनाव मैदान में उतरेगी. गुजरात मॉडल के आधार पर हर बूथ स्तर तक चुनाव से पहले ही 20 वोटर पर एक कार्यकर्ता की ड्यूटी लगाई जाएगी. हर बूथ पर पन्ना प्रमुख और हाफ पन्ना प्रमुख अप्रैल तक नियुक्त करने का टारगेट दिया गया है.

    कुंभलगढ़ में दो दिन तक बीजेपी के चिंतन शिविर का आयोजन हुआ. इसमें सीएम फेस की कतार में खड़े नेताओं को खींचतान मिटाने का साफ मैसेज दे दिया गया. बीजेपी विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी के चेहरे के साथ सामूहिक नेतृत्व में ही चुनाव लड़ने का फार्मूला अपनाएगी.

    तीन बड़े नेताओं के न आने से गुटबाजी को हवा मिली

    ऐसा भी नहीं है कि चिंतन शिविर पहली बार हुआ हो. बीजेपी में चिंतन बैठकें पहले भी होती रही हैं, लेकिन इस बार की चिंतन बैठक ऐसे माहौल में हुई है, जब पार्टी के भीतर सीएम फेस और सीएम इन वेटिंग बनने के लिए नेताओं की लंबी कतार है. हालांकि इस शिविर में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और भूपेंद्र यादव का न आना चर्चा का विषय रहा. इससे गुटबाजी की चर्चाओं को और हवा मिली.

    पीएम मोदी के चेहरे और कामकाज के आधार पर वोट मांगेंगे

    दरअसल, कई केंद्रीय मंत्री, सांसद और बीजेपी नेता खुद और उनके समर्थक पिछले काफी समय से सोशल मीडिया पर सीएम फेस प्रोजेक्ट करने में लगे हैं. राजस्थान में पार्टी विपक्ष में है. इसलिए यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा और केंद्र के कामकाज के आधार पर पार्टी वोट मांगने उतरेगी. पीएम का चेहरा सामने करके स्थानीय सीएम फेस की लड़ाई को खत्म करने की कोशिश की जा रही है.

    सीएम फेस प्रोजेक्ट नहीं करने का मैसेज दिया

    राजस्थान बीजेपी में कांग्रेस की तरह ही लगातार चल रही खींचतान और खेमेबंदी को मिटाने के लिए सामूहिक नेतृत्व का फार्मूला ईजाद किया गया है. ऐसे सभी नेताओं की एक्सरसाइज से पार्टी के भीतर जबर्दस्त खींचतान का माहौल बन गया. पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का खेमा भी मुखर होकर मुद्दे उठाता रहता है. केंद्रीय नेतृत्व ने खींचतान मिटाने के लिए ही अब चिंतन शिविर के जरिए मैसेज दे दिया है कि सीएम फेस प्रोजेक्ट ही नहीं होगा.

    20 वोटर पर एक कार्यकर्ता की ड्यूटी

    गुजरात मॉडल के आधार पर हर बूथ स्तर तक चुनाव से पहले ही 20 वोटर पर एक कार्यकर्ता की ड्यूटी लगाई जाएगी. इस फार्मूले पर पूरे देश में काम चल रहा है. राजस्थान में इस पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है. गुजरात मॉडल की शुरुआत सूरत से की गई थी, जो बाद में कई जगह सफल रहा. पार्टी नेताओं का मानना है कि इस मॉडल से चुनाव में जीत की संभावना बढ़ जाती है. गुजरात मॉडल पर चुनाव लड़ने से सीएम फेस की लड़ाई खत्म हो जाएगी.

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