तय गाइडलाइन से होंगी राजस्थान बोर्ड की परीक्षाएं, हाईकोर्ट ने रोक लगाने से किया इनकार
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तय गाइडलाइन से होंगी राजस्थान बोर्ड की परीक्षाएं, हाईकोर्ट ने रोक लगाने से किया इनकार
हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला लिया है, (File Photo)

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हाई कोर्ट 29 मई को इसी तरह की एक अन्य याचिका को निस्तारित करते हुए केंद्र और राज्य सरकार की गाइडलाइन के तहत बोर्ड परीक्षाएं आयोजित करवाने की अनुमति दे चुका है. ऐसे में अब फ्रेश याचिका को सुनवाई योग्य नहीं माना जा सकता है.

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जयपुर. लॉकडाउन (Lockdown) के चलते रोक दी गई बोर्ड परीक्षाएं जारी रहेगी. राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) ने बोर्ड परीक्षाओं (Board Exam) को रद्द करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है. जस्टिस पंकज भंडारी की खंडपीठ ने राजस्थान प्राइवेट एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी की जनहित याचिका को मैन्टेनबल नहीं माना. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हाई कोर्ट 29 मई को इसी तरह की एक अन्य याचिका को निस्तारित करते हुए केंद्र और राज्य सरकार की गाइडलाइन (Guidline) के तहत बोर्ड परीक्षाएं आयोजित करवाने की अनुमति दे चुका है. ऐसे में अब बोर्ड के नोटिफिकेशन को रद्द करने की एक फ्रेश याचिका को सुनवाई योग्य नहीं माना जा सकता है. गौरतलब है कि आज से प्रदेश में 10 वीं और 12 वीं की शेष बची बोर्ड परीक्षाएं फिर से शुरू हुई है।

अवमानना याचिका को भी बताया प्री-मैच्योर

वहीं दूसरी ओर हाईकोर्ट ने पब्लिक अगेंस्ट करप्शन की अवमानना याचिका को भी प्री-मैच्योर बताते हुए खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि आज बोर्ड परीक्षाएं शुरू हुई हैं. ऐसे में अभी यह नहीं कहा जा सकता है कि बोर्ड और राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना की है. याचिका में कहा गया था कि आज से शुरू हुई बोर्ड परीक्षाओं में गृह मंत्रालय की गाइडलाइन की पालना नहीं हो रही है. जबकि 29 मई को हाईकोर्ट ने बोर्ड परीक्षाओं पर रोक लगाने वाली याचिका को निस्तारित करते हुए कहा था कि बोर्ड पूरी गाइडलाइन को फॉलो करते हुए परीक्षा आयोजित करवाए.



केंद्रीय गृह मंत्रालय की 20 मई की गाइडलाइन के अनुसार परीक्षा के लिए सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध करवाना था. वहीं प्रत्येक परीक्षा केंद्र को सेनेटाइज करना था. इसके साथ ही थर्मल स्केनिंग, मास्क और सेनेटाइजेशन की भी व्यवस्था भी करनी थी, लेकिन प्रदेश में पूरी तरह से गाइडलाइन की पालना नहीं हो रही है जो अदालत की अवमानना है.
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इंटरनल असेस्मेंट के आधार पर पास करने की थी मांग

राजस्थान प्राइवेट एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी ने अपनी याचिका में कहा था कि CBSE बोर्ड विदेशों में चल रहे अपने स्कूलो में बोर्ड परीक्षाएं निरस्त कर इंटरनल असेसमेंट के आधार पर स्टूडेंट्स का रिजल्ट जारी कर रही है तो अपने देश में अन्य शिक्षा बोर्ड ऐसा क्यों नहीं कर सकते हैं. वहीं, बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने भी CBSE से पूछा है कि क्या वह देश में शेष बोर्ड एग्ज़ाम को निरस्त करके इंटरनल असेसमेंट के आधार पर स्टूडेंट्स को मार्क्स दे सकती है. ऐसे में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के 30 मई के नोटिफिकेशन को रद्द करके स्टूडेंट्स को इंटरनल असेस्मेंट के आधार पर पास किया जाए, क्योंकि बोर्ड करीब 20 लाख स्टूडेंट्स को संक्रमण के खतरे के बीच परीक्षा देने के लिए मजबूर कर रहा है.

 
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