आनंद कुमार की सुपर-30 जैसी ही है देशराज वर्मा की कोचिंग, गरीब बच्चे यहां हासिल कर रहे 90% से ज्यादा अंक
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आनंद कुमार की सुपर-30 जैसी ही है देशराज वर्मा की कोचिंग, गरीब बच्चे यहां हासिल कर रहे 90% से ज्यादा अंक
देशराज वर्मा ने कच्ची बस्ती के विद्यार्थियों में शिक्षा की अलख जगाने की और उनकी प्रतिभाओं को सही मुकाम तक पहुंचाने की एक सामाजिक पहल की.

राजस्थान (Rajasthan) के जयपुर (Jaipur) के झालना में इंजीनियर देशराज वर्मा बिहार के आनंद कुमार (Anand Kumar) की सुपर-30 (Super-30) की तर्ज पर गरीब बच्चों को कोचिंग दे रहे हैं.

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जयपुर. कोशिशें कामयाब होती हैं, मेहनत रंग लाती है. बशर्ते तमन्ना मजबूत हो और इरादे नेक. ऐसे ही नेक इरादे रखने वाले जयपुर एक वरिष्ठ इंजिनियर भी राजस्थान बोर्ड (Rajasthan Board) की दसवीं कक्षा के परीक्षा परिणाम (Exam Result) जारी होने के बाद से बेहद उत्साहित नजर आ रहे हैं. क्योंकि उनकी कोशिशों को भी अब कामयाबी का रास्ता मिल गया है और उनके विद्यार्थियों के हौंसलों को उड़ान. राजधानी जयपुर के पीडब्लूडी विभाग में कार्यरत एक्सईएन देशराज वर्मा ने कच्ची बस्ती के विद्यार्थियों में शिक्षा की अलख जगाने की और उनकी प्रतिभाओं को सही मुकाम तक पहुंचाने की एक सामाजिक पहल की.

देशराज वर्मा ने इन विद्यार्थियों के साथ दिनरात मेहनत की. दसवीं बोर्ड की परीक्षा के लक्ष्य को भेदने के लिए वे उन्हें अचूक बनाने में जुटे रहे. जब नतीजे आए तो उनके द्वारा शुरू की गई निशुल्क कोचिंग में सौ फीसदी परिणाम तो मिला ही. यहां पढ़ने वाले 35 बच्चों में से 23 बच्चे प्रथम श्रेणी से सफल हुए. इनमें से 4 को 90 फीसदी से ज्यादा अंक मिले. देशराज वर्मा इन बच्चों को बिहार के चर्चित आनंद कुमार की सुपर-30 की तरह ही कोचिंग क्लास में नि:शुल्क पढ़ाते हैं.

बच्चों को मिले अच्छे अंक  
देशराज वर्मा की निशुल्क कोचिंग में पढने वाले शुभम को 91.5%, दीपाली 90.83%, सचिन 90.83% नितिन  90.83%, अरुण- 86.50%, करिश्मा 86% दिव्या- 85%अंक हासिल किए हैं. जबकि प्रथम आने वाले कई विद्यार्थी सत्तर प्रतिशत से ज्यादा अंक प्राप्त करने वाले रहे. बीते मंगलवार को जैसे ही दसवीं कक्षा के परीक्षा परिणाम जारी हुए विद्यार्थियों के साथ ही इंजिनियर वर्मा की भी खुशी का ठिकाना नहीं था.  देशराज वर्मा बताते है कि 'कक्षा 8 के चार बच्चों से चार साल पहले प्रयास शुरू किया था कि कच्ची बस्ती के विद्यार्थियों को किसी भी तरह क्वालिटी एजुकेशन मुहैया कराई जाए और वे इस के लिए तन मन से जुट गए. डगर मुश्किल थी लेकिन असंभव नहीं'.
इस तरह दी कोचिंग


देशराज बताते हैं- 'झालाना डूंगरी बस्ती के एक छोटे से प्राइवेट स्कूल में बतौर शिक्षक सुबह 8:30 से 10 बजे तक  कक्षा 10 के स्टूडेंट्स को गणित, विज्ञान और अंग्रेजी पढ़ाई कराई. इसके एवज में उन्हें वहीं पर शाम के समय कच्ची बस्ती के विद्यार्थियों के लिए कोचिंग चलाने के लिए स्कूल में जगह मिल गई. यहां उन्होंने शाम के समय में पांच-छह स्कूलों के कक्षा 8वीं, 9वीं व 10वीं के बच्चों को पढ़ाना शुरू किया. यह वे बच्चे थे जिनके माता पिता मेहनत मजदूरी करने गांवों से पलायन कर शहर आये. छत के नाम पर टिनशेड डले मात्र एक एक कमरों के कच्चे घरों में रहकर पढ़ाई करने वाले.
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