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Analysis: बजट में गहलोत ने लगाया सियासी 'तड़का', विपक्षियों-विरोधियों को दिया ये खास संदेश

बजट पेश करते समय सीएम अशोक गहलोत शायराना अंदाज में नजर आए..

बजट पेश करते समय सीएम अशोक गहलोत शायराना अंदाज में नजर आए..

Rajasthan Budget 2021: सत्तर वर्षीय मुख्यमंत्री गहलोत ने सबसे लंबा बजट भाषण (2 घंटे 46 मिनट) देकर राजनीतिक विरोधियों को सन्देश दिया कि वे पूरी तरह फिट हैं. यह उनकी आखिरी सियासी पारी नहीं है, जैसा की विरोधी प्रचारित करते हैं. उन्होंने राजस्थान में मध्याविधि चुनाव की बातें करने वालों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मध्याविधि छोड़ो, 2023 का चुनाव भी कांग्रेस जीतेगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 25, 2021, 11:18 PM IST
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हरीश मलिक.

कोरोना काल की चुनौतियों के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तीसरे कार्यकाल का तीसरा बजट पेश करते हुए पूरे रंग और शायराना अंदाज में नजर आए. केंद्र से लेकर विपक्ष तक ही नहीं, गहलोत ने इशारों-इशारों में अपनी पार्टी के विरोधियों पर भी खूब निशाना साधा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिए बगैर तंज कसा- हम 56 इंच का नहीं, 60 इंच का सीना रखते हैं. बजट में सियासत का तड़का लगाते हुए गहलोत ने चार विधानसभा क्षेत्रों में निकट उपचुनाव के चलते यहां घोषणाओं की बौछार की. वहीं चारों दिवंगत विधायकों के नाम से गर्ल्स कॉलेज खोलने का इमोशनल कार्ड भी खेला. कर्मचारियों, किसानों, युवा बेरोजगारों के लिए बजट में सौगातें देने के साथ ही हर राजस्थानी का हेल्थ बीमा कर स्वस्थ और समृद्ध राजस्थान बनाने का संकल्प दिखाया.

70 वर्षीय गहलोत ने सबसे लंबा बजट भाषण


70 वर्षीय मुख्यमंत्री गहलोत ने सबसे लंबा बजट भाषण (2 घंटे 46 मिनट) देकर राजनीतिक विरोधियों को सन्देश दिया कि वे पूरी तरह फिट हैं और यह उनकी आखिरी सियासी पारी नहीं है, जैसा की विरोधी प्रचारित करते हैं. उन्होंने राजस्थान में मध्याविधि चुनाव की बातें करने वालों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मध्याविधि छोड़ो, 2023 का चुनाव भी कांग्रेस जीतेगी. खांटी नेता की तरह एक ओर 295 घोषणाएं कर सत्तापक्ष की वाहवाही लूटी तो दूसरी और विपक्षी सदस्यों की चुटकियां लीं और केंद्र की खिंचाई में सियासी लय में नज़र आए. विपक्षी सदस्यों से 'जादूगर' बोले, "प्लीज़! आप दिल्ली को समझाओ. प्रेम, मोहब्बत और सद्भावना से देश चलता है. नफरत और गुस्से से देश नहीं चलता. लोकतंत्र में असहमति का भी स्थान होता है."

 जनता पर नहीं कोई नया टैक्स लगाया गया


दो लाख 50 हजार 747 करोड़ का यह राज्य का पहला पेपरलेस बजट था. कोरोना से जूझ रही जनता पर


कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया. युवाओं के लिए 50 हजार सरकारी नौकरियों का वादा. राज्य के हर परिवार को सिर्फ 850 रुपए में पांच लाख का हेल्थ कवर. सभी महिलाओं को मुफ्त सेनेटरी नेपकिन. घायल को अस्पताल लाने पर पांच हजार का इनाम. अगले साल से अलग कृषि बजट. परीक्षार्थियों को रोडवेज में फ्री यात्रा. स्टाम्प ड्यूटी में कमी. कोरोना में पांच लाख कर्मियों के कटे वेतन की वापसी. बजट में यह कुछ ऐसे ऐलान रहे, जिनसे गहलोत ने हर वर्ग को खुश करने की कोशिश की.

आंदोलनरत किसानों के साथ दिखने की कोशिश


आंदोलनरत किसानों के साथ दिखने की कोशिशें भी गहलोत ने बजट के जरिये और तेज कीं. किसान सेवा केंद्र खोलने, मंडी शुल्क और आढ़त में एक प्रतिशत की कमी, मंडियों को ऑनलाइन के लिए एक हजार करोड़ का प्रावधान बताता है कि कांग्रेस विवादित कृषि कानूनों के खिलाफ है. 16 हजार करोड़ रुपए का ब्याज मुक्त कर्ज, ब्याज माफी, अलग से कृषि बजट इसी का संकेत है कि कांग्रेस किसान भाइयों के साथ है.  राजस्थान में चार जगह उपचुनाव हैं. नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों में भाजपा ने टक्कर दी है. सचिन पायलट खेमा अलग से गहलोत के लिए मुश्किलें खड़ी करने में लगा है. ऐसे में यदि उपचुनाव में कांग्रेस सीटें गवां देती है तो गहलोत की जादूगिरी पर सवाल उठना लाजिमी है. गहलोत ये जानते हैं तभी चारों विधानसभा क्षेत्रों में सौगातों की बौछार कर राजनीतिक और कूटनीतिक बढ़त लेने की कोशिश की.

विपक्षियों और विरोधियों दोनों को गहलोत ने शायराना अंदाज में बार-बार ताकीद करते हुए कहा कि राजस्थान में कांग्रेस का भविष्य वही हैं. 'मेरे हौंसलों में अभी जान बाकी है, ये तो दौड़भर थी, अभी उड़ान बाकी है. मेरी सादगी से मेरे बारे में अंदाज़ा मत लगाना, ये तो शुरुआत भर थी अंजाम अभी बाकी है.'

दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने यह कहकर बजट को आड़े हाथों लिया कि इसमें सिर्फ वादे ही वादे हैं, इरादे नजर नहीं आते. बजट में कई पुरानी योजनाओं का नाम बदलकर नए रूप में पेश करने का प्रयास हुआ है. यह भी दीगर है बजट घोषणाएं तभी पूरी होंगी, जबकि प्रदेश की विकास दर 25% रहे, मौजूदा वित्त वर्ष में यह -6.6% है. बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर कई घोषणाएं हैं, लेकिन तय समय पर धरातल पर उतरें तो ही विकास को गति मिल सकेगी.

(डिस्क्लेमर: लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं. ये लेखक के निजी विचार हैं.)
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