राजस्थान उपचुनाव: गुर्जर वोट बैंक साधने में जुटीं भाजपा-कांग्रेस, सतीश पूनिया से मिले कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां और गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला के बीच मुलाकात से गुर्जर सियासत गर्मा गई है.

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां और गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला के बीच मुलाकात से गुर्जर सियासत गर्मा गई है.

राजस्थान में उपचुनाव से पहले गुर्जर सियासत गर्मा गई है. भाजपा और कांग्रेस दोनों दल गुर्जर वोटरों को साधने के लिए जुट गए हैं. तीन दिन पहले गुर्जर आंदोलन के अगुवा किरोड़ी सिंह बैंसला ने भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया से मुलाकात की थी, जिसके बाद कांग्रेस खेमे में खलबली मच गई है.

  • Last Updated: March 28, 2021, 4:14 PM IST
  • Share this:
जयपुर. राजस्थान में आगामी उपचुनावों (Rajasthan by-election) से पहले गुर्जर वोटबैंक को साधने के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ने कवायद शुरू कर दी है. उपचुनाव वाली सीटों पर गुर्जर वोट बैंक को अपने पक्ष में करने के लिए सरगर्मी भी तेज हो गई है. 3 दिन पहले गुर्जर आरक्षण आंदोलन के अगुआ रहे कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला से मिलने BJP प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया पहुंचे थे. इससे पहले विजय बैंसला भी भाजपा कार्यालय पहुंचे थे. और उन्होंने उपचुनाव में भाजपा के पक्ष में होने का ऐलान किया था, जिसके बाद अब प्रदेश में गुर्जरों को लेकर सियासत शुरू होने के साथ ही कांग्रेस खेमे में बेचैनी बढ़ गई है.

कांग्रेस से जुड़े गुर्जर नेताओं ने कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला और विजय बैंसला के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रदेश कांग्रेस सचिव जसवंत गुर्जर का कहना है कि बैंसला अपने व्यक्तिगत हितों को साधने के लिए समाज का सहारा ले रहे हैं. उन्होंने कहा कि गुर्जर समाज समझदार है और अपना भला-बुरा बखूबी समझता है. जसवंत गुर्जर ने यह भी कहा कि विजय बैंसला गुर्जर समाज के नहीं बल्कि भाजपा के नेता हैं, लेकिन गुर्जर समाज अभी तक भाजपा शासन में मारे गए 72 लोगों के वाकये को भूला नहीं हैं.

दो सीटों पर हैं गुर्जर मतदाता

उधर, बैंसला से अलगाव और कांग्रेस से नजदीकी रखने वाले हिम्मत सिंह के नेतृत्व में कल गुर्जर समाज के प्रतिनिधिमंडल से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुलाकात की. प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री का आभार जताकर संदेश दिया कि गुर्जर समाज कांग्रेस के साथ है. दरअसल राजसमंद और सहाड़ा सीट पर गुर्जर मतदाता अच्छी खासी संख्या में हैं और भाजपा-कांग्रेस दोनों ही इस वोट बैंक को अपने पक्ष में करने की कवायद में जुटी हुई है जिसके चलते यह पूरा घटनाक्रम हो रहा है.
उपचुनाव का रण अब परवान चढ़ने लगा है और दोनों ही दल गुर्जर समाज को साधने की कोशिश में जुटे हैं. समाज के नेता इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. समाज में बिखराव का फायदा आखिर किस राजनीतिक दल को ज्यादा मिलेगा इसे लेकर भी तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज