अपना शहर चुनें

States

Rajasthan News: गहलोत, डोटासरा और पूनिया के लिये चुनौती भरे होंगे 4 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव

इन सीटों पर अगर फिर से कांग्रेस काबिज नहीं हो पाई तो गहलोत सरकार के कामकाज और पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा की क्षमताओं पर सवाल उठेंगे.
इन सीटों पर अगर फिर से कांग्रेस काबिज नहीं हो पाई तो गहलोत सरकार के कामकाज और पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा की क्षमताओं पर सवाल उठेंगे.

राजस्‍थान के चार विधायकों (MLAs) के निधन के कारण रिक्त हुई विधानसभा की चार सीटों पर अब सबकी निगाहें टिकी हुई हैं. इन सीटों के लिये होने वाले उपचुनावों (By-elections) में सीएम अशोक गहलोत, पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां की साख दांव पर रहेगी.

  • Share this:
जयपुर. महज 4 महीने में 4 विधायकों के निधन से राजस्‍थान का राजनीतिक माहौल भले ही शोकाकुल है, लेकिन इस वजह से रिक्त हुई विधानसभा की चार सीटों पर उपचुनाव के लिए कांग्रेस और बीजेपी (Congress-BJP) में अंदर ही अंदर राजनीतिक सरगर्मियां भी शुरू हो गई हैं. आगामी कुछ महीनों में इन सीटों पर उपचुनाव (By-elections) होंगे. इनमें सीएम अशोक गहलोत और बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया की प्रतिष्ठा भी दांव पर रहेगी. पूनिया से भी ज्यादा सीएम गहलोत की साख दांव पर होगी, क्योंकि इनमें से तीन सीटें कांग्रेस के खाते में थीं. उन सीटों पर जीत हासिल करना मौजूदा राजनीतिक माहौल में गहलोत के लिये बेहद चुनौती भरा हो सकता है.

राजस्थान विधानसभा के इतिहास में संभवत: यह पहला मौका है जब महज 4 महीने में 4 विधायकों का बीमारी के कारण निधन हो गया है. इनमें तीन विधायक कांग्रेस के तो एक बीजेपी के हैं. विधायकों के निधन से खाली हुई भीलवाड़ा की सहाड़ा, चूरू की सुजानगढ़ और उदयपुर की वल्लभनगर सीट कांग्रेस के कब्जे में थी. राजसंमद सीट पर बीजेपी काबिज थी. इन चारों सीटों पर आगामी महीनों में उपचुनाव होंगे.

हार-जीत का संभावित असर
इन सीटों पर अगर फिर से कांग्रेस काबिज नहीं हो पाई तो गहलोत सरकार के कामकाज और पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा की क्षमताओं पर सवाल उठने शुरू हो सकते हैं. वहीं, पार्टी में फिलहाल थोड़ा शांत हुआ गुटबाजी का जिन्न फिर बोतल से बाहर आ सकता है. दूसरी तरफ, अगर बीजेपी अपनी मूल सीट राजसमंद के अलावा अन्य सीटों पर कब्जा नहीं जमा पाई तो उसकी भूमिका और पार्टी के प्रदर्शन पर सवाल खड़े होंगे. इसके साथ ही बीजेपी में प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे की कथित गुटबाजी को संगठन फिर नये चश्मे से देखेगा और कोई बड़ा निर्णय भी लिया जा सकता है.
कांग्रेस के पास अब 104 विधायक


प्रदेश की 200 सदस्यों वाली राजस्थान विधानसभा की स्थिति देखें तो अब कांग्रेस के पास कुल 107 में से 104 सदस्य रह गये हैं. बीजेपी के पास 71 सीटें हैं. इनके अलावा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय ट्राइबल पार्टी के 2-2 विधायक हैं. नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के 3 सदस्य विधानसभा में है. एक सदस्य राष्ट्रीय लोक दल का है. इनके अलावा निर्दलीय 13 विधायक हैं.

इन विधायकों का हुआ है निधन
उल्लेखनीय है कि सहाड़ा से कांग्रेस विधायक कैलाश त्रिवेदी, सुजानगढ़ से विधायक एवं मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल, उदयपुर के वल्लभनगर से गजेन्द्र सिंह शक्तावत और राजसमंद से बीजेपी विधायक किरण माहेश्वरी का गत चार माह में विभिन्न बीमारियों के चलते निधन हो गया है. इन चारों सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव परिणाम आगामी 2023 में विधानसभा चुनावों पर भी असर डालेंगे.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज