Rajasthan: एक नियम के चलते 115 दिनों से अटकी 'रेट' में सुनवाई, 7 लाख अधिकारी-कर्मचारी जुड़े हैं इससे
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Rajasthan: एक नियम के चलते 115 दिनों से अटकी 'रेट' में सुनवाई, 7 लाख अधिकारी-कर्मचारी जुड़े हैं इससे
रेट का क्षेत्राधिकार पूरा प्रदेश है. इस पर प्रदेश के करीब 7 लाख कर्मचारियों और अधिकारियों के सेवा संबंधी मामलों की सुनवाई का जिम्मा है.

राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण में अभी भी लॉकडाउन चल रहा है. दिलचस्प बात यह है कि यह लॉकडाउन कोरोना की वजह से नहीं, बल्कि एक नियम की वजह से है.

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जयपुर. देश में इस समय अनलॉक 2.0 (Unlock) चल रहा है. इसमें लगभग सब कुछ खुल चुका है. सरकारी दफ्तरों से लेकर निजी ऑफिसेज में कामकाज पहले जैसे शुरू हो चुका है. लेकिन राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण (Rajasthan Civil Services Appellate Tribunal) में अभी भी लॉकडाउन चल रहा है. दिलचस्प बात यह है कि यह लॉकडाउन कोरोना की वजह से नहीं, बल्कि एक नियम की वजह से है. इस नियम की वजह से अधिकारियों और कर्मचारियों के मामलों की सुनवाई अटकी हुई है. इस अधिकरण से प्रदेश के करीब 7 लाख अधिकारी-कर्मचारी जुड़े हैं

115 दिनों से बैंच का गठन नहीं हो सका है
इस नियम के कारण राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण (रेट) में पिछले 115 दिनों से बैंच का गठन नहीं हो सका है. रेट में अंतिम बार 17 मार्च को बैंच का गठन हुआ था. उसके बाद से आज तक मामलों की सुनवाई के लिए किसी भी तरह की बैंच नहीं बनी है. जबकि लॉकडाउन के बाद 20 मई से ही रेट में मामले दायर होना शुरू हो गए थे. इस समय रेट में करीब 450 से ज्यादा मामले पैंडिग चल रहे हैं. वहीं पिछले बरसों की पैंडेंसी को मिला दिया जाए तो संख्या कहीं अधिक हो जाती है.

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इस नियम जिसके चलते अटकी सुनवाई


रेट में पैरवी करने वाले अधिवक्ता संदीप कलवानिया ने बताया कि रेट में नियम है कि अगर यहां न्यायिक सदस्य का पद रिक्त रहता है तो रेट में बैंच का गठन नहीं हो सकता है. उन्होंने बताया कि 17 मार्च को यहां पदस्थापित न्यायिक अधिकारी प्रभुलाल आमेटा के रिटायर होने के बाद से ही रेट में एक भी मामले की सुनवाई नहीं हो पाई. यह पद राज्य सरकार की अनुशंषा पर हाई कोर्ट को भरना है. जब तक यहां किसी नए न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति नहीं हो जाती है तब तक रेट में सुनवाई शुरू नहीं हो पाएगी.

क्या है रेट
राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण को शॉर्ट फॉर्म में रेट कहते हैं. रेट का क्षेत्राधिकार पूरा प्रदेश है. इस पर प्रदेश के करीब 7 लाख कर्मचारी व अधिकारियों के सेवा संबंधी मामलों की सुनवाई का जिम्मा है. रेट में एक अध्यक्ष सहित चार सदस्यों के पद स्वीकृत हैं. इसमें एक न्यायिक और तीन गैर न्यायिक सदस्यों के पद स्वीकृत हैं. सुनवाई के लिए बैंच का गठन अध्यक्ष करता है. रेट में कर्मचारियों के ट्रांसफर, प्रमोशन, वरिष्टता, सलेक्शन स्केल सहित तमाम तरह के सेवा संबंधी मामलों की सुनवाई होती है. इसकी अपील हाई कोर्ट में की जा सकती है. लेकिन सबसे पहले मामला रेट में ही लिस्ट होता है. पक्षकार सीधा हाई कोर्ट नहीं जा सकता है. सुनवाई नहीं होने से कर्मचारियों को न्याय नहीं मिल पा रहा है.

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एक्ट में नहीं है ऐसा कोई प्रावधान
तीन दिन पहले ही रेट चेयरमैन का पदभार संभालने वाले अधिकारी रविशंकर श्रीवास्तव इससे इत्तेफाक नहीं रखते हैं. उनका कहना है कि ऐसा नहीं है. अगर इस नियम के चलते इतने समय से सुनवाई नहीं हुई है तो यह गलत है. रेट के नियमों में ऐसा कहीं नहीं है कि न्यायिक अधिकारी का पद रिक्त होने के चलते बैंच का गठन नहीं हो सकता है. हमने इसके लिए सरकार को लिखा है. वहीं इस संदर्भ में हाई कोर्ट का एक आदेश भी है. उसका अध्ययन किया जाएगा. उन्होंने आश्वस्त किया कि संभवतया सोमवार से रेट में रेगुलर सुनवाई शुरू कर दी जाएगी.
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