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राजस्थान का सियासी संकट: गहलोत ने फिर बचा ली सरकार, BJP हुई निराश, बोली- हम तो केवल दर्शक

Jaipur news: दो साल पहले बीजेपी नेताओं पर गहलोत खुलकर लगाते थे आरोप

Jaipur news: दो साल पहले बीजेपी नेताओं पर गहलोत खुलकर लगाते थे आरोप

Jaipur News: राजस्थान की गहलोत सरकार पर आये संकट के सियासी बादल छंट रहे हैं. बीजेपी की सरकार गिरने की उम्मीदें एक बार फ ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

दो साल पहले गहलोत बीजेपी नेताओं के खिलाफ जितने मुखर थे उतने इस बार नहीं हैं
गहलोत ने आलाकमान के दूतों को खाली हाथ लौटाया और दिल्ली में माफी भी मांग ली

जयपुर. दिल्ली से जयपुर तक सियासी संकट (Political Crisis) के बीच गहलोत सरकार (Gehlot Government) गिरने की बीजेपी की उम्मीदों पर फिर पानी फिरता दिख रहा है. अब बीजेपी के नेता (BJP Leaders) कह रहे हैं कि कांग्रेस के इस राजनीतिक घमासान में वो एक अच्छे दर्शक और बेहतर श्रोता भर हैं. उनकी निगाह तो 2023 के चुनाव (Assembly election-2023) पर है. वो अगले साल कांग्रेस से चुनावी मैदान में दो-दो हाथ करेंगे. दस दिन पहले जब राजधानी जयपुर में ये खबर आई कि कांग्रेस आलाकमान के दूत जयपुर आ रहे हैं. तभी से भाजपा की बांछे खिलीं थीं. बीजेपी को सियासी उलटफेर की पूरी संभावना थी.

दिल्ली के कांग्रेस के दूत आने के बाद बीजेपी नेता मन ही मन गहलोत के जाने और पायलट के आने की आस में खुशी मना रहे थे. उन्हें लग रहा था कि पायलट आये तो गहलोत खेमा सरकार गिरा देगा. मगर गहलोत की जादूगरी से सरकार फिलहाल बच गई. हालांकि राजनीति को संभावनाओं का खेल मानने वाले नेता अब भी कह रहे हैं कि कुर्सी जायेगी.

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गाड़ी-बंगले का मोह क्यों नहीं छोड़ पा रहे मंत्री
राजस्थान में अब सियासी हालात बदल रहे हैं. बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया का दावा है कि पार्टी का लोकतंत्र पर भरोसा है. इसलिए हमने सब्र किया हुआ है. इस बार बीजेपी खुद को सियासी संकट की एक अच्छी दर्शक और एक अच्छी श्रोता से ज्यादा कुछ नहीं मान रही है. इस बीच कांग्रेस विधायकों के इस्तीफों पर बीजेपी सियासी तंज कस रही है. प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया का आरोप है कि जब इस्तीफे दे ही दिये तो गाड़ी-बंगले का मोह मंत्री क्यों नहीं छोड़ पा रहे हैं.

मंत्री तबादला उद्योग में जमकर कूट रहे चांदी
दूसरी ओर उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ इसे तूफान से पहले की शांति करार देकर भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिशों में जुटे दिखाई देते हैं. राठौड़ मंत्रियों को जमकर आड़े हाथों ले रहे हैं. उनका आरोप है कि मंत्री तबादला उद्योग में जमकर चांदी कूट रहे हैं. बीजेपी नेता कह रहे हैं कि स्पीकर इस्तीफे स्वीकार करते हैं तो सरकार गिर जायेगी और सूबे को मध्यावधि चुनाव में जाना पड़ेगा, लेकिन ये सब अटकलें ही हैं.

कांग्रेस पर युवाओं को मौके नहीं देने के आरोप
गहलोत की रणनीति के आगे बीजेपी फिलहाल बेचैन है. उसे पता ही नहीं था कि गहलोत एक तरफ आलाकमान के दूतों को खाली हाथ लौटा देंगे और दूसरी ओर दिल्ली जाकर सार्वजनिक माफी मांगेंगे. बीजेपी इस घटनाक्रम को अशोक गहलोत के सत्ता के मोह से जोड़ कर देख रही है. बीजेपी कांग्रेस में युवाओं को मौके नहीं मिलने की बात कह रही है. बहरहाल, बीजेपी की गहलोत, पायलट और कांग्रेस आलाकमान के बीच जारी सत्ता संघर्ष में भूमिका मूकदर्शक से ज्यादा कुछ भी नहीं है.

दो साल पहले गहलोत खुलकर लगाते थे आरोप
दो साल पहले राठौड़ और पूनिया पर गहलोत खुलकर उनकी सरकार को गिराने के आरोप लगाते थे. मगर इस बार पार्टी के प्रदेश नेतृत्व के साथ राष्ट्रीय नेतृत्व की भी इस पूरे घटनाक्रम पर सिर्फ पैनी निगाहभर है. शायद बीजेपी को यकीन है कि गहलोत सरकार गिरने नहीं देंगे. फिर भी सियासत में कब, किसे, कैसे खेल खेलने का मौका मिल जाए कुछ कहा नहीं जा सकता.

Tags: Ashok Gehlot Government, Congress politics, Jaipur news, Rajendra Rathod, Satish Poonia

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