Rajasthan Crisis: विधानसभा सत्र पर सस्पेंस और टकराव जारी, सरकार ने चौथी बार राज्‍यपाल को भेजा प्रस्ताव
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Rajasthan Crisis: विधानसभा सत्र पर सस्पेंस और टकराव जारी, सरकार ने चौथी बार राज्‍यपाल को भेजा प्रस्ताव
अशोक गहलोत सरकार ( Ashok Gehlot Government) ने एक बार फिर राज्‍यपाल कलराज मिश्र (Kalraj Mishra) को विधानसभा सत्र बुलाने का प्रस्ताव भेजा है.

अशोक गहलोत सरकार ( Ashok Gehlot Government) ने एक बार फिर राज्‍यपाल कलराज मिश्र (Kalraj Mishra) को विधानसभा सत्र बुलाने का प्रस्ताव भेजा है.

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जयपुर. राजस्‍थान के सियासी संकट के बीच अशोक गहलोत सरकार ( Ashok Gehlot Government) ने एक बार फिर राज्‍यपाल कलराज मिश्र (Kalraj Mishra) को विधानसभा सत्र बुलाने का प्रस्ताव भेजा है. जबकि इस प्रस्‍ताव को बुधवार शाम हुई कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दी गयी है. इसके साथ ही कांग्रेस ने कहा कि अगर राज्यपाल 25 जुलाई को भेजे गए दूसरे प्रस्ताव से 21 दिन का समय गिनें तो 14 अगस्त से विधानसभा सत्र बुलाया जा सकता है.

कांग्रेस ने कही ये बात
राजस्‍थान के मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास ने कहा कि राज्यपाल को विधानसभा सत्र बुलाने के लिए चौथा प्रस्ताव भेजा जा रहा है. उम्मीद है राज्यपाल इस प्रस्ताव को मान लेंगे. साथ ही उन्‍होंने कहा कि आज दिन में सीएम अशोक गहलोत ने राज्‍यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात की थी. इस मुलाकात में गतिरोध खत्म करने पर सहमति बनी है. इसी मुलाकात में राज्यपाल द्वारा 25 जुलाई के प्रस्ताव से 21 दिन के नोटिस की गिनती करने पर सहमति बनी है. इसके बाद कैबिनेट ने नया प्रस्ताव पारित किया है.

आपको बता दें कि राजस्थान में राज्य सरकार और राजभवन के बीच चल रहा टकराव थम नहीं पा रहा है. राजभवन ने अशोक गहलोत सरकार की विधानसभा-सत्र बुलाने की मांग वाली फाइल तीसरी फिर वापस लौटा दी है. राजभवन ने सरकार से कहा है कि कोरोना काल के मद्देनजर हम एट होम का कार्यक्रम भी नहीं कर रहे हैं. ऐसे में विधानसभा सत्र  का क्या है औचित्य ? 1000 कर्मचारी और 200 विधायकों की कोरोना काल से कैसे सुरक्षा होगी.
राज्यपाल ने सरकार से पूछे ये सवाल


बहरहाल, सोमवार को राज्यपाल कलराज मिश्र ने गहलोत सरकार को भेजे अपने पत्र में यह भी कहा था कि राजभवन की ऐसी कोई मंशा नहीं है कि विधानसभा सत्र न बुलाया जाए. राज्यपाल ने कहा है कि संवैधानिक नियमावली और तय प्रावधानों के तहत प्रदेश में सरकार चले, वे इसके लिए प्रतिबद्ध हैं. इसलिए संविधान के अनुच्छेद 174 के तहत सरकार को विधानसभा का सत्र बुलाने का परामर्श दिया गया है.
1- विधानसभा सत्र 21 दिनों का नोटिस देकर बुलाया जाए, ताकि संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत मौलिक अधिकारों और सबको समान अवसर प्राप्त हो सके.
2- विश्वासमत प्राप्त करने की सभी प्रक्रिया संसदीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव की मौजूदगी में ही पूरी की जाए.
3- विश्वासमत प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई जाए.
4- विधानसभा में विश्वासमत प्राप्त करने की प्रक्रिया हां या ना के बटन दबाने के माध्यम से पूरी हो.
5- सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में विभिन्न मुकदमों में अपने फैसले दिए हैं, विधानसभा में विश्वासमत प्रस्ताव के दौरान इन फैसलों का भी ध्यान रखा जाए.
6- कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा देखते हुए विधानसभा में सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन हो, यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए.
7- विधानसभा सत्र के दौरान 1000 से अधिक कर्मचारी और 200 से ज्यादा सदस्यों की उपस्थिति से कोरोना संक्रमण का खतरा न फैले, इसका भी ध्यान रखा जाए.
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