Rajasthan Crisis: विधायकों को आखिर रेगिस्तान में क्यों ले गए CM गहलोत? यहां पढ़ें इनसाइड स्टोरी
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Rajasthan Crisis: विधायकों को आखिर रेगिस्तान में क्यों ले गए CM गहलोत? यहां पढ़ें इनसाइड स्टोरी
जैसलमेर में निर्जन रेगिस्तान भी है, पर्यटन स्थल भी है और निगरानी का पूरा तंत्र भी.

विधायकों की निगरानी कर रही गहलोत की टीम को खुफिया एजेंसियों से इनपुट मिला कि जयपुर (Jaipur) में होटल में विधायकों से संपर्क की कोशिश की जा रही है. ये होटल जयपुर- गुड़गांव हाईवे पर है

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जयपुर. अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) अपने 45 साल के राजनीतिक जीवन में इस वक्त सबसे बड़ी सियासी परीक्षा से गुजर रहे हैं. सचिन पायलट की चुनौती गहलोत के लिए अभी भी पहेली बनी हुई है. सरकार बचने और गिरने में महज दो विधायकों के पाला बदलने का खेल है. 14 अगस्त को विधानसभा (Assembly) का सत्र शुरू होगा लेकिन ये 14 दिन गहलोत के लिए मानो एक युग है. खुफिया एजेंसियों (Intelligence Agencies) के इनपुट और पल- पल बदलते हालात ने गहलोत को रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है.

विधायकों की निगरानी कर रही गहलोत की टीम को खुफिया एजेंसियों से इनपुट मिला कि जयपुर में होटल में विधायकों से संपर्क की कोशिश की जा रही है. ये होटल जयपुर- गुड़गांव हाईवे पर है.और गुड़गांव से पहले मानेसर में पायलट गुट होटल में है. इन दोनों होटलों की बीच फासला कम और सीधा रुट और चिंता वजह बना हुआ था. होटल के जयपुर में ही होने से विधायकों को कुछ देर के लिए घर जाने और घरवालों से मिलने का दबाब बढ रहा था. अन्यथा घरवालों को होटल में आने की इजाजत की मांग बढ़ रही थी.

गहलोत कैंप के पास वर्तमान में 101 विधायक
गहलोत को डर निर्दलीय और कांग्रेस की बाड़ेबंदी में मौजूद सचिन पायलट के संपर्क वाले विधायकों से बना हुआ है. गहलोत कैंप के पास वर्तमान में 101 विधायक हैं, जिसमें स्पीकर भी शामिल हैं. एक भी विधायक के पाला बदलने का मतलब सरकार का गिरना तय है. विधायक फेयरमाउंट में 16 दिन की बाड़ेबंदी से बोर हो गए थे. गहलोत के कुछ नजदीकी विधायकों ने राय दी थी सैर सपाटे के लिए ले जाये. रिस्क से बचने के लिए दूर दूराज शिफ्ट कर दें.
इस बीच रक्षा बंधन और जन्माष्टमी जैसे पर्व हैं


ऐसे भी 14 अगस्त तक लंबा वक्त है और इस बीच रक्षा बंधन, ईद और जन्माष्टमी जैसे पर्व हैं. इन पर्व पर विधायकों को घर भेजने का परिवार वालों का दबाब बढ़ रहा था. विधायकों की मांग थी कि अगर उन्हें न भेजे तो बहनों को राखी बांधने होटल आने दें. घरवालों को पर्व मनाने आने दें. लेकिन विधायकों की निगरानी कर रही खुफिया एजेंसियों को इनपुट ने गहलोत को अलर्ट कर दिया. दरअसल, इन्हीं मौकों पर परिजनो के जरिये पायलट कैंप के विधायकों से संपर्क का इनपुट था.

जैसलमेर सबसे मुफीद लगा
ऐसे में गहलोत ने तय किया कि विधायकों को ऐसी जगह शिफ्ट किया जाए जहां तक आसानी से किसी की पहुंच न हो. जैसलमेर सबसे मुफीद लगा. उसकी दो वजह एक तो जयपुर से 500 किलोमीटर और मानेसर से 700 किलोमीटर दूर होना है. जैसलमेर में होटल भी शहर से दूर चुना गया जहां तक कोई भी अनजान न पहुंच पाए. गहलोत के नजीदकी अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री सालेह मोहम्मद जैसलमेर के पोकरण से ही विधायक हैं. जैसलमेर में सालेह के परिवार का दबदबा है. राजस्व मंत्री और गहलोत के नजदीकी हरीश चौधरी भी इसी इलाके से हैं. जैसलमेर में निर्जन रेगिस्तान भी है, पर्यटन स्थल भी है और निगरानी का पूरा तंत्र भी.
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