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Rajasthan Election Result 2019: गहलोत का नहीं चला जादू, पायलट भी फेल, पढ़ें- सियासत पर असर

Rajasthan Election Result 2019: गहलोत का नहीं चला जादू, पायलट भी फेल, पढ़ें- सियासत पर असर

सीएम अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट.

सीएम अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट.

लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस के लिए 'मिशन-25' के सारे दावे चारों खाने चित होने के बाद प्रदेश में सत्ता और संगठन को साथ रखना बड़ी चुनौती होगा.

    राजस्थान में लगातार दो आम चुनाव 0-25 के शर्मनाक आंकड़ों से हारने के बाद कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका लगा है. अलवर और अजमेर लोकसभा उपचुनाव की जीत के बाद विधानसभा में जोड़-तोड़ कर सरकार बनाने में कामयाब रही पार्टी 23 मई से पहले तक जनमत अपने पक्ष में मानकर चल रही थी. किसान कर्जमाफी के दम पर प्रदेश में सत्ता हासिल करने वाली सरकार के मुखिया मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसके लिए खासी मेहनत भी की. सरकार बनते ही कर्जमाफी का ऐलान कर दिया. लोकसभा चुनाव को ध्यान में रख धुंआधार प्रचार, ताबड़तोड़ रैलियां की गई, लेकिन नतीजा वहीं 5 साल पुराना, पच्चीस सीटों में से एक पर भी खाता नहीं खुला.

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    यहां न राजनीति के जादूगर गहलोत का जादू चला और न ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पायलट की रणनीति काम आई. कांग्रेस को सभी सीटों पर हार का सामना करना पड़ा. सबसे मजबूत सीट मानी जाने वाली जोधपुर सीट पर भी मायूसी हाथ लगी. सीएम गहलोत अपने विधानसभा क्षेत्र सरदारपुरा से भी बेटे वैभव को नहीं जीता पाए. अकेले सरदारपुरा से वैभव बीजेपी प्रत्याशी गजेंद्र सिंह शेखावत से 18827 वोटों से हार गए. लेकिन राज्य में अभी सरकार कांग्रेस की है और 'मिशन-25' के सारे दावे चारों खाने चित होने के बाद प्रदेश में सत्ता और संगठन को साथ रखना शीर्ष नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती होगा.

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    सीएम गहलोत पर हार का असर
    सीएम अशोक गहलोत पर प्रदेश में लोकसभा चुनाव की यह पराजय ज्यादा मायने नहीं रखती, क्यों कि पूरे देश में पार्टी का प्रदर्शन ऐसा ही रहा है. लेकिन उनकी साख पर असर जरूर पड़ेगा. बेटे को नहीं जीता पाए. उनकी जादूगरी उन्हीं के निर्वाचन क्षेत्र में नहीं चली और बेटे की लॉन्चिंग पूरी तरह से फेल हो गई. प्रदेश में सरकार 99 कांग्रेस और एक आरएलडी विधायक के दम पर चल रही है. ऐसे में प्रदेश में सत्ता बचाए रखने के लिए चौकन्ना रहना होगा.

    जोधपुर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की हार
    सीएम के बेटे वैभव गहलोत को कुल 5 लाख 14 हजार 448 वोट मिले. ये कुल मतदान का 38.21 प्रतिशत था.

     

    खुद गहलोत की विधानसभा क्षेत्र में वैभव 18827 वोटों से हार गए.
    बीजेपी प्रत्याशी गजेंद्र सिंह शेखावत को यहां 7 लाख 88 हजार 888 वोट मिले. बीजेपी को यहां 58.6 प्रतिशत वोट मिले.


    सचिन पायलट पर हार का असर
    प्रदेशाध्यक्षा सचिन पायलट की कमान में कांग्रेस की आम चुनाव में यह दूसरी बड़ी हार है. लोकसभा के दो चुनावों में एक भी सीट नहीं दिला सके. हालांकि, उपचुनाव की दो सीटों और विधानसभा चुनाव में सफलता उनके लिए सकारात्मक रही है. लेकिन जिन नेताओं को लोकसभा चुनाव में टिकट दिलाया था उनकी हार का अंतर कम (दौसा-78,444, करौली-धौलपुर-97,682 और टोंक-सवाई माधाेपुर-1,11,291) हैं. हालांकि, प्रदेश संगठन में बदलाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार अभी गर्म है.

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    उधर, राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के 71 साल के इतिहास में दूसरे सबसे लंबे समय तक प्रदेश अध्यक्ष बने रहने का रिकॉर्ड बनाने वाले सचिन पायलट के लिए भी लोकसभा चुनाव के नतीजे निराशाजनक हैं. प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अगुवाई करते हुए पायलट दूसरी बार आम चुनाव में पूरी तरह से फेल साबित हुए हैं. 2013 की मोदी लहर में जब विधानसभा में कांग्रेस महज 21 सीटों पर सिमट कर रह गई थी तब 21 जनवरी 2014 को पायलट के हाथों में पार्टी की कमान सौंपी गई थी. लेकिन तीन महीने बाद ही उनके नेतृत्व में पार्टी को एक और भयंकर हार का सामने करना पड़ा.

    टोंक-सवाई माधोपुर में सचिन पायलट की हार
    पायलट के क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी नमोनारायण मीणा को 43.21 प्रतिशत ही वोट मिले.
    मीणा ने यहां 5 लाख 33 हजार 28 वोट हासिल किए.
    बीजेपी प्रत्याशी सुखबीर सिंह जोनापुरिया ने यहां 52.24 प्रतिशत यानी 6 लाख 44 हजार 319 वोट प्राप्त किए.
    खास बात ये है कि पायलट के विधानसभा क्षेत्र में ही कांग्रेस 22,451 वोटों से हार गई.


    राजस्थान से लोकसभा की 25 सीटों पर (17 अप्रैल को 20 और 24 अप्रैल को 7 सीटों पर मतदान) पर हुए लोकसभा चुनाव-2014 में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली. इन सभी 25 सीटों पर बीजेपी का कब्जा हो गया. हालांकि फरवरी, 2018 में राजस्थान की अलवर और अजमेर लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनावों में कांग्रेस ने दोनों सीटें बीजेपी से छीन ली. इसके बाद पिछले साल विधानसभा चुनाव 2018 में भी पायलट की भाग-दौड़ काम आई और कांग्रेस सरकार 200 में से 100 सीटें (1 सीट घटक दल की) हासिल कर सरकार बनाने में कामयाब रही. लेकिन पायलट को सीएम नहीं बनाने का मलाल उनके समर्थकों को रहा. सचिन पायलट के समर्थकों और समर्थित वोट बैंक के कांग्रेस से छिटकने का एक कारण यह भी बताया जा रहा है.

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    विधानसभा चुनाव में जहां से सचिन पायलट भारी जनमत के साथ विधानसभा पहुंचे थे वहीं से यानी टोंक (टोंक-सवाई माधोपुर) से उनके हाथ से वोट फिसल गए. लोकसभा चुनाव में यहां से कांग्रेस प्रत्याशी नमोनारायण मीणा 22,451 वोटों से पिछड़ गए और बीजेपी प्रत्याशी सुखबीर सिंह जोनापुरिया ने 111291 वोटों के अंतर से शिकस्त दे डाली. यही नहीं, सभी 25 सीटों पर अपनी जीत का दावा करने वाले पायलट अपने ही क्षेत्र में लोगों को भरोसा नहीं दिला पाए. अकेले टोंक-सवाई मोधपुर क्षेत्र में 8974 मतदाताओं ने निराश होकर ईवीएम पर नोटा का विकल्प चुना है.

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    Tags: Ashok gehlot, BJP, Congress, Jaipur news, Jhalawar news, Lok Sabha Election 2019, PCC chief sachin pilot, Pm narendra modi, Rajasthan Lok Sabha Elections 2019, Rajasthan news, Sachin pilot

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