राजे सरकार औषधि खेती में करेगी क्रांति का आगाज, आयुर्वेद से लोगों को जोड़ने का है प्रयास

वसुंधरा राजे, राजस्थान मुख्यमंत्री. फोटो-(ईटीवी)
वसुंधरा राजे, राजस्थान मुख्यमंत्री. फोटो-(ईटीवी)

वसुंधरा सरकार औषधीय खेती में क्रांति का आगाज करने जा रही है. पहाड़, जंगल और रेतीली धोरों पर मिलने वाली औषधि की खेती के लिए अब अलग से सरकार एक्सीलेंसी सेंटर की स्थापना करने जा रही है.

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वसुंधरा सरकार औषधीय खेती में क्रांति का आगाज करने जा रही है. पहाड़, जंगल और रेतीली धोरों पर मिलने वाली औषधि की खेती के लिए अब अलग से सरकार एक्सीलेंसी सेंटर की स्थापना करने जा रही है.

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का आयुर्वेद प्रेम पिछले महीने सम्पन्न हुए ग्लोबल एग्रीटेक के एतिहासिक आयोजन में सामने आया. राजे जब बीमार हुईं, तो ठीक होने के लिए उन्होंने एलोपैथी के बजाय आयुर्वेदिक जड़ी बूटिंयों पर भरोसा जताया. इस बात को उन्होंने हजारों लोगों के सामने रखा और लोगों से आयुर्वेद की और लौटने की अपील कर डाली.

सीएम राजे के इसी विजन को अब मंत्री प्रभुलाल सैनी धरातल पर उतारने में जी जान से जुटे हैं. प्रदेश में मौजूद पन्द्रह हजार प्रकार की औषधियों को एक ही जगह उगाने का अभियान शुरू हो रहा है. भीलवाड़ा जिले के जहाजपुर के पास सरकार सेंटर फॉर एक्सीलेंस फॉर हर्ब्स की स्थापना का सपना साकार करने जा रही है.



वसुंधरा सरकार करीब सौ बीघा में औषधियों पौधों की खेती करेगी. अश्वगंधा से लेकर नीम गिलोय तक, और ग्वार पाठे से लेकर सफेद मूसली तक सभी औषधीय पौधों को एक ही जगह उगाकर सरकार लोगों को आयुर्वेद से जोड़ने के प्रयास करेगी. सरकार की कोशिश से विलुप्त होने की कगार पर खड़े औषधीय पौधों को भी बचाया जा सकेगा.
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मंत्री प्रभुलाल सैनी प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार करने में जुटे हैं. मुख्यमंत्री का यहां स्थापित होने वाला एक्सीलेंसी सेंटर ड्रीम प्रोजेक्ट है.

वसुंधरा सरकार ने मेडीशनल प्लांटस की खेती के लिए बीकानेर आयुर्वेद विश्वविद्यालय से एमओयू साइन किया है. वहीं जनजातीय क्षेत्र में इसे रोजगार से जोड़ने पर भी कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी का खास ध्यान है. ट्राइबल बैल्ट में औषधीय पौधों की उपज के बेचान के लिए मंडियों में बीस फीसदी दुकानों का आवंटन सरकार वनवासी युवाओं को करेगी, ताकि उनका मेडीशनल प्लांटस की खेती से जुड़ाव बरकरार रह सके.

आयुर्वेद हमारी जीवन पद्धति का हिस्सा रहा है, लेकिन अफसोस है कि दर्जनों ग्रंथों में इलाज और औषधियों का ज्ञान होने के बावजूद अब तक किसी भी सरकार ने इनसे सीख लेने की कोशिश नहीं की, लेकिन वसुंधरा सरकार ने इस धरोहर को बचाने के लिए जो प्रयास शुरू किए हैं वो सदियों तक लोगों की सेहत का खयाल रखेगा.

उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार की कोशिशों से औषधीय पौधों के लिए जंगल, पहाड़ और रेतीले धोरों की खाक नहीं छाननी पड़ेगी.
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