जौहर पर गहलोत सरकार के फैसले के खिलाफ खड़े हुए सरकार के ही एक मंत्री

राजस्थान के सैनिक कल्याण मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने जौहर की तस्वीर हटाने पर अपनी ही सरकार फैसले के खिलाफ ताल ठोक दी है और अपनी ही सरकार के शिक्षा मंत्री की खिंचाई की है.

Bhawani Singh | News18India
Updated: May 17, 2019, 3:51 PM IST
जौहर पर गहलोत सरकार के फैसले के खिलाफ खड़े हुए सरकार के ही एक मंत्री
प्रताप सिंह खाचरियावास. (फोटो-एफबी से साभार)
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Bhawani Singh | News18India
Updated: May 17, 2019, 3:51 PM IST
राजस्थान के स्कूली पाठ्यक्रम में से जौहर की तस्वीर हटाने पर गहलोत सरकार के दो मंत्री ही आमने सामने हैं. राजस्थान के सैनिक कल्याण मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने जौहर की तस्वीर हटाने पर अपनी ही सरकार  फैसले के खिलाफ ताल ठोक दी है और अपनी ही सरकार के शिक्षा मंत्री की खिंचाई की है. प्रताप सिंह ने कहा कि जौहर राजस्थान के इतिहास का गौरव है, किसी मंत्री को इसको बदलने का हक नहीं है.





राजस्थान सरकार के पाठ्यक्रम में नवीं कक्षा की अंग्रेजी की पुस्तक के कवर पेज से  चितौड़ की रानी पदमनी की जौहर की तस्वीर हटाने पर अब खुद गहलोत सरकार के मंत्री ही अपनी सरकार के फैसले के खिलाफ खड़े हो गए. गहलोत सरकार में सैनिक कल्याण मंत्री प्रताप सिंह खाचरिवास ने कहा कि जौहर राजस्थान के इतिहास का गौरव है. इसे पढ़ाया जाना चाहिए.

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जौहर सती प्रथा नहीं है. किसी भी मंत्री या सरकार को जौहर का इतिहास बदलने का हक नहीं.
प्रताप सिहं खाचरिवास, सैनिक कल्याण मंत्री, राजस्थान


राजस्थान सरकार ने पाठ्यक्रम में जौहर की तस्वीर हटा कर चितौड़ किले की तस्वीर लगा दी. राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने इस फैसले के पीछे सफाई दी कि जौहर सती प्रथा है. किसी भी महिला को आग में जलते हुए हम अपनी नई पीढ़ी को नहीं पढ़ा सकते है.


ऐसा इतिहास नहीं पढ़ा सकते हैं जिससे बेटियों को आग में कूदने की प्रेरणा मिले.
 गोविंद सिंह डोटासरा, शिक्षा मंत्री राजस्थान
दरसअल, राजस्थान में सती प्रथा पर कानूनी प्रतिबंध है. लेकिन जौहर को एक पर्व के रूप में हर साल मनाया जाता है. चितौड़ किले में जौहर मेला आयोजित किया जाता है. पदमनी की पूजा की जाती है. जौहर कुंड की मिट्टी देशभर से आने वाले श्रद्धालु लेकर जाते हैं. अलाउद्दीन खिलजी के चितौड़ किले पर आक्रमण के बाद जब राजपूतोॆ ने केसरिया बाना पहनकर यानी कफन पहलनकर जंग लड़ी, तब खिलजी से अपनी अस्मत और चितौड़ का गौरव बचाने के लिए पदमनी ने चितौड़ किले में 16 हजार रानियों के साथ चिता में कूद कर जौहर किया था. चित्तौड़ में ऐसे तीन जौहर हुए. इसे बलिदान और नारी सम्मान के पर्व के रूप में मनाया जाता है. राजस्थान सरकार इस फैसले के बाद विपक्ष के निशाने पर तो है ही अब अपनों के निशाने पर भी.

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