Rajasthan: टिड्डी टेरर को कंट्रोल करने में सोशल मीडिया बनेगा हथियार, यहां पढ़ें कैसे किया जाएगा काबू
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Rajasthan: टिड्डी टेरर को कंट्रोल करने में सोशल मीडिया बनेगा हथियार, यहां पढ़ें कैसे किया जाएगा काबू
प्रदेश में टिड्डियों ने फिर हमला कर दिया है.

राजस्थान में टिड्डी टेरर (Locust terror) बढ़ता जा रहा है. अब तक करीब आधा दर्जन जिलों में टिड्डी दल दस्तक दे चुके हैं. इन टिड्डियों के प्रकोप से निपटना केन्द्र सरकार के साथ ही राज्य सरकार के लिए भी बड़ी चुनौती है.

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जयपुर. राजस्थान में टिड्डी टेरर (Locust Terror) बढ़ता जा रहा है. अब तक करीब आधा दर्जन जिलों में टिड्डी दल दस्तक दे चुके हैं. इन टिड्डियों के प्रकोप से निपटना केन्द्र सरकार के साथ ही राज्य सरकार के लिए भी बड़ी चुनौती है. पिछली बार टिड्डी हमले के दौरान संसाधनों के साथ ही प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी सामने आई थी. इस समस्या से निपटने के लिए टिड्डी नियंत्रण संगठन ने किसानों को ही टिड्डी नियंत्रण के लिए प्रशिक्षण (Training) देना शुरू किया था ताकि उन्हें राहत पहुंचने का इंतजार न करना पड़े और वे अपने स्तर पर ही टिड्डियों पर काबू पा सकें.

वीडियो क्लिपिंग के जरिए प्रशिक्षण दिया जाएगा
इसके साथ ही कृषि विभाग के स्टाफ को भी प्रशिक्षित करने की मुहिम शुरू की गई ताकि टिड्डी नियंत्रण में उनका भी भरपूर योगदान हो. लेकिन देश में शुरू हुए लॉकडाउन के चलते प्रशिक्षण का यह काम बीच में ही अटक गया है. इसी बीच प्रदेश में टिड्डियों ने हमला कर दिया है. अब टिड्डी नियंत्रण संगठन इनलोगों को वीडियो क्लिपिंग के जरिए प्रशिक्षित करेगा ताकि वो टिड्डी नियंत्रण में हाथ बंटा सके.

सोशल मीडिया का लेंगे सहारा
टिड्डी नियंत्रण संगठन के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. केएल गुर्जर का कहना है कि प्रदेश के 10 जिलों के किसानों को प्रशिक्षण देने की शुरुआत की गई थी. लेकिन लॉकडाउन के चलते किसानों और स्टाफ का प्रशिक्षण बाधित हुआ है. अब उन तक सोशल मीडिया के सहारे वीडियो क्लिप्स बनाकर पहुंचाई जाएगी, ताकि उन्हें देखकर वो टिड्डी नियंत्रण के तरीके सीख सकें. गौरतलब है कि पिछली बार भी टिड्डी नियंत्रण में किसानों का बड़ा योगदान रहा था और बड़े क्षेत्रफल में किसानों ने अपने स्तर पर टिड्डियों पर काबू पाया था. अब उन्हें प्रशिक्षण देकर टिड्डी कंट्रोल में कुशल बनाया जा रहा है.



प्रशिक्षण इसलिए जरूरी
टिड्डी नियंत्रण में उपयोग लिए जाने वाले रसायन जमीन के साथ ही मानव स्वास्थ्य और जीव-जंतुओं के लिए हानिकारक हो सकते हैं. मेलाथियान 96 प्रतिशत केमिकल काफी जहरीला होता है और इसका उपयोग केवल टिड्डी नियंत्रण संगठन के विशेषज्ञों की निगरानी में गैरकृषि क्षेत्र में ही किया जा सकता है. इसके छिड़काव के लिए भी विदेश से आयातित विशेष मशीनें हैं. वहीं कुछ रसायन के छिड़काव की छूट किसानों को दी गई है, जिन्हें वे अपने खेत में छिड़क सकते हैं. लेकिन इनका कितना उपयोग होना चाहिए और किस तरह उपयोग होना चाहिए इसके लिए प्रशिक्षण जरूरी है ताकि ये केमिकल हानिकारक साबित न हों.

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