राजस्‍थान: सांभर झील में फिर से पक्षियों की मौत का तांडव, सकते में विशेषज्ञ
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राजस्‍थान: सांभर झील में फिर से पक्षियों की मौत का तांडव, सकते में विशेषज्ञ
मौके पर एक शेल्टर बनाया गया है, जहां बीमार पक्षियों का इलाज भी किया जा रहा है.

सांभर झील (Sambhar Lake) में पिछले दो-तीन दिन से लगातार झील के आसपास मृत पक्षियों के अवशेष पाए गए हैं. इसकी सूचना पर पक्षी विशेषज्ञों को मौके पर भेजा गया है.

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जयपुर. रामसर साइट सांभर झील (Sambhar Lake) में एक बार फिर से बड़े पैमाने पर पक्षियों की मौत होने लगी है. पिछले दो-तीन दिन से लगातार झील के आसपास मरे हुए पक्षियों के मिलने से हड़कंप मच गया है. अभी तक करीब 150 पक्षियों के शव बरामद किए जा चुके हैं. इसकी सूचना पर पक्षी विशेषज्ञ मौके पर पहुंच रहे हैं और इसके बाद मामले की जांच शुरू की जाएगी. पिछले साल के अंत में बॉटुलिज्म बैक्टीरिया (Botulism Bacteria) के कारण इसी झील में 30 हज़ार से ज्यादा पक्षियों की मौत हो गई थी. ऐसे में एक बार फिर से पक्षियों की मौत होने से वन विभाग में हड़कंप मच हुआ है.

इस विश्वविख्यात झील पर लाखों की तादाद में स्थानीय और प्रवासी पक्षी आते हैं. पिछले साल बॉटुलिज्म बैक्टीरिया के अटैक के कारण पूरी झील का इको सिस्टम तबाह हो गया था. ऐसे में वन विभाग ने मामले में तत्परता दिखाते हुए फिलहाल मौके पर कई विशेषज्ञों को भेजा है, ताकि फिर से हो रही पक्षियों की मौत का कारण पता चल सके. पक्षियों की मृत्यु का कारण लगभग वही बताया जा रहा है, जिस तरह पहले पक्षी मारे गए थे.

काफी संख्या में मछलियां भी मिलीं मृत
नेचर सोसायटी के सेक्रेटरी राज चौहान ने कहा कि उन्‍होंने जब मौके पर जाकर देखा तो झील किनारे सैकड़ों पक्षी मृत पड़े मिले. ज़्यादातर पक्षियों की चोंच से खून निकलता हुआ भी दिखा, जो पिछली बार की तुलना में थोड़ा अलग है. मामले की जानकारी मिलते ही वन विभाग ने मौके पर अपनी टीम सहित कई एनजीओ की टीमें भेजी हैं. मौके पर एक शेल्टर बनाया गया है, जहां बीमार पक्षियों का इलाज भी किया जा रहा है. मृत पक्षियों के शव लेकर उन्हें जांच के लिए लैब में भेजा गया है. मौके पर नालियासर डेम में ज़्यादातर पक्षी मृत मिले हैं. वहां पर काफी संख्या में मछलियां भी मृत मिली हैं.
जांच के लिए लैब में भेजे गए सैंपल


वाइल्ड लाइफ क्रिएचर ऑर्गेनाइजेशन के ओमप्रकाश ने बताया कि पिछली बार भी मामले लेकर हमने ही सबसे पहले चेताया था. सैंपल जांच के लिए पशुपालन विभाग की लैब में भेज दिए गए हैं. एक ओर पहले से ही दुनिया कोरोना वायरस से परेशान है, वहीं इन हालात में अगर ये बोटुलिज़्म बैक्टीरिया फिर से ज़्यादा नुकसान पहुंचता है तो झील पर बचा खुचा इको सिस्टम भी नष्ट हो जाएगा. सांभर झील पर बॉटुलिज्म बैक्टीरिया का अटैक यहां दर्ज अब तक की सबसे बड़ी पक्षी त्रासदी थी.

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