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BHU में विवाद से चर्चा में आया जयपुर का यह संस्कृत स्कूल, यहां 80% छात्र हैं मुस्लिम

Mahesh Dadhich | News18 Rajasthan
Updated: November 18, 2019, 7:11 PM IST
BHU में विवाद से चर्चा में आया जयपुर का यह संस्कृत स्कूल, यहां 80% छात्र हैं मुस्लिम
इस स्कूल के कुल 277 विद्यार्थियों में से 222 मुस्लिम हैं.

बीएचयू (BHU) में मुस्लिम संस्कृत प्रोफेसर (Muslim Sanskrit Professor) की नियुक्ति को लेकर विवाद हो रहा है. लेकिन, जयपुर का एक संस्कृत स्कूल (Sanskrit School) ऐसा है, जहां पढ़ने वाले 80 फीसदी से ज्यादा छात्र (Muslim Students) मुस्लिम हैं.

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जयपुर. एक तरफ बीएचयू (BHU) में जयपुर जिले के एक मुस्लिम शख्‍स की संस्कृत प्रोफेसर (Muslim Sanskrit Professor) के तौर पर नियुक्ति को लेकर विवाद हो रहा है. दूसरी ओर, जयपुर का ही एक संस्कृत स्कूल (Sanskrit School) ऐसा है, जहां पढ़ने वाले 80 फीसदी से ज्यादा छात्र (Students) मुस्लिम (Muslim) हैं. यहां भाषाएं किसी बंधन में नहीं दिखतीं और संस्कृत के प्रति मुस्लिम छात्रों की मोहब्बत और लगाव इस कदर है कि वे संस्कृत में ही करियर बनाना चाहते हैं. स्कूल की छात्राएं संस्कृत की ही शिक्षिकाएं बनना चाहती हैं. भले ही बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत डिपार्टमेंट में डॉक्टर फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति विवाद का विषय बनी हो, लेकिन जयपुर का यह स्कूल संस्कृत और मुस्लिम के बीच किसी विवाद के लिए नहीं, बल्कि खास लगाव के लिए अपनी पहचान रखता है.

संस्कृत स्कूल के 277 में से 222 छात्र मुस्लिम
खास बात ये है कि विद्यालय के कुल 277 विद्यार्थी हैं, जिनमें से 222 मुस्लिम हैं. यानी करीब 80 फीसदी मुस्लिम विद्यार्थी यहां संस्कृत का अध्ययन कर रहे हैं. ये छात्र संस्कृत के श्लोक ही नहीं बल्कि इसी भाषा में बातचीत भी सीख रहे हैं. छात्रों का संस्कृत भाषा के प्रति लगाव इस कदर है कि ये स्‍कूल दो पालियों में चलाया जा रहा है.

Muslim Students
बीएचयू में मुस्लिम संस्कृत प्रोफेसर की नियुक्ति को लेकर विवाद हो रहा है.


संसाधनों की कमी, लेकिन तादाद हर साल बढ़ रही
वर्षों से चल रहे इस स्कूल में संसाधनों की कमी के चलते ज्यादा प्रवेश नहीं दिए जा सके हैं. यहां हर साल छात्रों कि तादाद बढ़ रही है, लेकिन स्कूल में बैठने तक की पर्याप्‍त जगह भी नहीं है. यहां संस्कृत में पढ़ाई करने वाले छात्र शाम को मदरसों में उर्दू की पढ़ाई भी करते हैं. इन छात्रों से जब बातचीत की तो सामने आया कि वे सिर्फ अपनी शिक्षा को भाषा तक ही सीमित नहीं रखना चाहते हैं, बल्कि बड़े होकर दूसरे बच्चों को भी दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा से रूबरू करना चाहते हैं.

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जयपुर के इस संस्कृत स्कूल में 80 फीसदी से ज्यादा विद्यार्थी मुस्लिम हैं.

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छतरियों के नीचे तालीम
यह स्कूल 'राजकीय ठाकुर हरि सिंह शेखावत मंडावा प्रवेशिका संस्कृत विद्यालय' (Rajkiya Thakur Harisingh Shekhawat Mandawa Praveshika Sanskrit Vidyalaya) राजस्थान की राजधानी जयपुर के नाहरी का नाका स्थित है. यह जगह कभी श्मशान भूमि की रही होगी, लेकिन आज संस्कृत श्लोक ओर वैदिक ऋचाओं से गूंजती है. पूर्वजों की याद में बनाई गई छतरियों के नीचे ही तालीम की तस्वीर निखर रही है. यहां पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चे धारा-प्रवाह संस्कृत श्लोकों का उच्चारण करते हैं.

अभिभावकों की मानें तो कभी भी भाषाओं को लेकर मन में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए. इसी नजरीये से अपने बच्चों को सभी भाषाओं में प्रवीण कर रहे हैं. यहां पढ़ाने वाले हिन्‍दू शिक्षक भी कभी धर्म या जाति को लेकर किसी तरह के बंधन नहीं मानते हैं. यही कारण है कि विद्यार्थियों के साथ अभिभावकों का भी शिक्षकों के प्रति सम्मान और नम्रता देखी जाती है. शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों के बीच भी एक जुड़ाव इस स्कूल में महसूस किया जा सकता है.


22 साल से चल रहा स्कूल, अब ली गई सुध
यह संस्कृत विद्यालय यूं तो 1997 से चल रहा है, लेकिन तब स्कूल के पास खुद की कोई जमीन नहीं थी. मौजूदा जगह भामाशाह ठाकुर हरि सिंह मंडावा के परिजनों से वर्ष 2004 में मिली थी. इस बीच कई सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन शिक्षा विभाग के पास इस तरह के स्कूल के लिए कोई समय नहीं मिल पाया. लिहाजा, बच्चों को सर्दी-गर्मी में खुले में या फिर छतरी की ओट में ही बैठकर पढ़ाई करनी पड़ी. बीते दिनों ही स्थानीय विधायक अमीन कागजी ने इस विद्यालय की सुध ली और इसके भवन निर्माण के लिए दस लाख रुपए स्वीकृत किए, जिस पर काम किया जाना है. विद्यालय प्रशासन को उम्मीद है कि विद्यालय भवन बन जाने के बाद और भी विद्यार्थियों को यहां दाखिला मिल सकेगा.

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First published: November 18, 2019, 3:07 PM IST
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