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राजस्थान: सरकार ने दिया इन खास लोगों को फ्लैट में शिफ्ट होने का अंतिम मौका, जानिए डिटेल

जेडीए ने भी कच्ची बस्तियों को शिफ्ट करने के लिए 350 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम खर्च करके 7640 से ज्यादा फ्लैट बनाए.

जेडीए ने भी कच्ची बस्तियों को शिफ्ट करने के लिए 350 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम खर्च करके 7640 से ज्यादा फ्लैट बनाए.

राजस्थान में कच्ची बस्तियों को शिफ्ट करने में निकाय फेल साबित हो रहे हैं. कच्ची बस्ती के बांशिदों के लिए बने घर धूल खा रहे हैं. ऐसे में धूल खा रहे मकानों में कच्ची बस्ती के लोगों को शिफ्ट होने का सरकार की अंतिम मौका दिया जा रहा है.

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जयपुर. राजस्थान की राजधानी जयपुर सहितपूरे प्रदेश में कच्ची बस्तियों में रहने वाले लोगों को पक्के घरों में शिफ्ट करने के लिए केंद्र और राज्य की सरकारों ने कई योजनाएं चला रखी हैं लेकिन इन योजनाओं की जमीनी स्तर पर हालात बेहद खराब है. कच्ची बस्तियों को शिफ्ट करने में निकाय सफल नहीं हो पाए हैं जिसका जीता जागता उदाहरण है जयपुर का जेडीए. जयपुर जेडीए ने भी राज्य के अन्य निकायों की भांति कच्ची बस्तियों को शिफ्ट करने के लिए 350 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम खर्च करके 7640 से ज्यादा फ्लैट बनाए. कच्ची बस्तियों के लोग इन फ्लैट में शिफ्ट नहीं हो रहे. शहर की कच्ची बस्तियों का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है. अब जेडीए ने कच्ची बस्ती के लोगों को आखरी मौका देने का फैसला किया है.

कच्ची बस्तियों को शिफ्ट करने के लिए कुल 7640 फ्लैट्स बनाए. दिल्ली-अजमेर और सीकर रोड पर 5816 फ्लैट्स बनाए गए थे. आगरा रोड पर बगराना में 1824 फ्लैट्स बनाए गए, इनमें अधिकतर मकान धूल खा रहे हैं. ये आंकड़े तो मात्र जयपुर विकास प्राधिकरण के हैं. बाकी निकायों का हाल तो जेडीए से भी बुरा है. अकेले जयपुर में जेडीए के अधीन 31 कच्ची बस्तियां हैं. जेडीए खुद की 17 बस्तियों को भी पूरी तरह शिफ्ट नहीं करा पाया है लेकिन जेडीए आयुक्त गौरव गोयल की मानेंं तो बार-बार मौका देने के बाद भी लोग कच्ची बस्ती छोड़कर पक्के मकान में शिफ्ट नहीं हो रहे हैं. ऐसे में कच्ची बस्ती के लोगो को अंतिम मौका दिया जाएगा.

गोयल ने आगे कहा, "अगर वो मकान शिफ्ट करते हैं तो ठीक वर्ना इन खाली मकानों को कमजोर आय वर्ग के अन्य लोगों को या जरूरतमंदों को आवंटित किए जाएंगे.



बर्बादी की कहानी बयां कर रहे मकान
कच्ची बस्ती से पक्के मकान में कौन नहीं आना चाहता मगर शहर के बाहर बनाए गए इन फ्लैट्स में अधिक दूरी और सुविधाए ना होना भी एक कारण माना जा रहा है. कच्ची बस्ती शिफ्ट कराने में फेल अफसर नए रास्ते पर निकल पड़े हैं. समय-समय पर केंद्र सरकार पैसे के दुरुपयोग पर आपत्ति जता चुकी है, क्योंकि बीएसयूपी, राजीव आवास योजना के तहत बनाए फ्लैट की योजना में आधा पैसा केंद्र की सरकार ने भेजा था. ये मकान धूल खा रहे हैं.
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