राजस्थान विधानसभा बजट सत्र: कोरोना काल के बाद पहली बार प्रश्नकाल, सवालों पर घिरे गहलोत सरकार के मंत्री

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जब मंत्रियों की जवाब देने की तैयारी ही नहीं है तो सवाल क्यों लगाए गये.

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जब मंत्रियों की जवाब देने की तैयारी ही नहीं है तो सवाल क्यों लगाए गये.

Rajasthan Legislative Budget Session: बजट सत्र के दूसरे दिन विधानसभा में आज प्रश्नकाल से शुरुआत हुई. आज प्रश्नकाल (Question Hour) में तारांकित प्रश्नों की सूची में 17 सवाल सूचीबद्ध किए गए थे. इनमें से करीब 14 सवालों पर विधानसभा में चर्चा हुई. इस दौरान कई बार सदस्यों में नोक झोंक भी हुई.

  • Share this:
जयपुर. कोरोना काल (Corona period) के बाद गुरुवार को विधानसभा (Assembly) में पहली बार प्रश्नकाल (Question Hour) चला. बजट सत्र के दूसरे आज विधायकों ने जनता से जुड़े सवाल प्रश्नकाल में उठाये. उनका संबधित विभागों के मंत्रियों ने जवाब दिया. प्रश्नकाल में आशा सहयोगिनियों के मानदेय और जनता क्लिनिक से जुड़े सवालों पर अच्छी खासी बहस हुई. कई सवालों के जवाब पर मंत्री भी घिरते नजर आये.

विधानसभा में आज बजट की कार्यवाही की शुरुआत प्रश्नकाल के साथ हुई. कोरोना काल के बाद यह पहली बार है जब विधानसभा में प्रश्नकाल हुआ. प्रश्नकाल में तारांकित प्रश्नों की सूची में कुल 17 सवाल सूचीबद्ध किए गए थे. इनमें से करीब 14 सवालों पर विधानसभा में चर्चा हुई. खास बात यह रही कि आज सूचीबद्ध किया गया पहला सवाल ही स्थगित कर दिया गया. नेता प्रतिपक्ष ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मंत्रियों की जवाब देने की तैयारी ही नहीं है तो सवाल क्यों लगाए गये.

29 भट्टे बिना कन्वर्जन के संचालित हो रहे हैं

सांगानेर से बीजेपी विधायक अशोक लाहोटी ने जनता क्लिनिक से जुड़ा सवाल पूछा. विधायक गौतम लाल ने आशा सहयोगिनियों के मानदेय में बढ़ोतरी का मसला उठाया. इसके जवाब में मंत्री ममता भूपेश ने माना कि 2014 के बाद मानदेय में बढ़ोतरी नहीं हुई. ममता भूपेश ने इसके लिये केन्द्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया. गंगानगर जिले में ईंट भट्टों से जुड़े एक सवाल के जवाब में मंत्री परसादीलाल मीणा ने कहा कि 29 भट्टे बिना कन्वर्जन के संचालित हो रहे हैं. उन पर कार्यवाही की जाएगी.
Youtube Video


सरकार कंपनियों को बाध्य नहीं कर सकती

पॉलिटेक्नीक महाविद्यालयों में अधिगमन प्रकोष्ठ की स्थापना से जुड़े सवाल के जवाब में मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने कहा कि सरकार कंपनियों को बाध्य नहीं कर सकती है. इसी सवाल के पूरक सवाल में नेता प्रतिपक्ष ने पूछा कि चार साल में केवल 4368 बच्चों का प्लेसमेंट हुआ. क्या यह संतोषप्रद है. इस पर मंत्री ने कहा कि कैम्पस प्लेसमेंट में डिग्री होल्डर्स ज्यादा सलेक्ट किए जाते हैं लेकिन अब डिप्लोमा किए स्टूडेण्ट्स को भी जेईएन बनाने के लिए लिखा गया है.



छात्रावासों में गद्दे और कम्बल ऐसे हैं कि उन कुत्ता भी बैठना पसंद नहीं करता

सहकारी समितियों में गबन से जुड़े एक सवाल में 41 साल बाद डिप्टी रजिस्ट्रार के फैसले पर विधायक रामनारायण मीणा ने प्रश्नचिन्ह लगाया. इस पर सहकारिता मंत्री ने जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया. उधर जनजाति आवासीय छात्रावासों से जुड़े प्रश्न के दौरान नेता प्रतिपक्ष के साथ ही स्पीकर डॉ. सीपी जोशी ने भी व्यवस्थाओं पर सवाल उठाये. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि छात्रावासों में गद्दे और कम्बल ऐसे हैं जिन पर कुत्ता भी बैठना पसंद नहीं करता.

विधायक सुमित गोदारा ने लगाया ये आरोप

वहीं उद्योगों में स्थानीयों को रोजगार संबधी सवाल में विधायक सुमित गोदारा ने आरोप लगाया कि प्रशासन और पुलिस की मिलीभगत से कम्पनियां स्थानीयों को रोजगार नहीं दे रही है. इस पर मंत्री परसादीलाल मीणा ने कहा कि नई नीति में 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार देने पर ही पुनर्भरण का प्रावधान है. लेकिन स्पीकर डॉ. सीपी जोशी ने इसमें टोकते हुए पूछा कि जो कम्पनियां पुनर्भरण लेना ही नहीं चाहती उनके लिए क्या प्रावधान है. इस पर मंत्री ने कहा कि इस पर कानून नहीं बनाया जा सकता है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज