राजस्थान विधानसभा का सत्र आज से, नए कृषि कानूनों के खिलाफ विधेयक लाएगी गहलोत सरकार

सदन की बैठक को लेकर भाजपा विधायक दल की बैठक सुबह दस बजे विधानसभा में ही होगी. (फाइल फोटो)
सदन की बैठक को लेकर भाजपा विधायक दल की बैठक सुबह दस बजे विधानसभा में ही होगी. (फाइल फोटो)

राजस्थान विधानसभा का सत्र शुरू होने से पहले स्पीकर सीपी जोशी (CP Joshi) ने सदन में कोरोना वायरस (Coronavirus) से बचाव के लिए बरती जाने वाली सावधानियों का जायजा लिया.

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जयपुर. राजस्थान विधानसभा का सत्र (Rajasthan Assembly session) शनिवार से फिर शुरू होगा. राज्य सरकार इस दौरान केंद्र द्वारा हाल ही में पारित कृषि संबंधी कानूनों (Agricultural Laws) के खिलाफ संशोधन विधेयक (Amendment Bill) पेश करेगी. राजस्थान विधानसभा सचिवालय के अनुसार पन्‍द्रहवी राजस्‍थान विधानसभा के पंचम सत्र की बैठक पुन: 31 अक्‍टूबर की सुबह 11.00 बजे से होगी. वहीं विधानसभा अध्‍यक्ष सीपी जोशी ने शुक्रवार को विधानसभा भवन और सदन की व्‍यवस्‍थाओं का अवलोकन किया. जोशी ने अधिकारियों को निर्देश भी दिए.

अधिकारियों के अनुसार स्पीकर सीपी जोशी ने सदन में की जाने वाली आवश्‍यक व्‍यवस्‍थाओं का जायजा लिया. विधानसभा भवन व सदन में कोरोना वायरस (COVID-19) से बचाव के लिए बरती जाने वाली सावधानियों को ध्‍यान में रखते हुए पुख्‍ता व्‍यवस्‍थाएं की गई हैं. इस बैठक के लिए जारी अधिसूचना के अनुसार जोशी ने विधानसभा की यह बैठक राज्य सरकार द्वारा अति आवश्यक शासकीय विधाई कार्य संपादित किए जाने हेतु की गई अनुशंसा पर बुलाई है. हालांकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ट्वीट कर कह चुके हैं कि कांग्रेस सरकार इस दौरान केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में पारित कृषि संबंधी कानूनों को राज्य में 'निष्प्रभावी' करने के लिए संशोधन विधेयक लाएगी. इसके अलावा सरकार राज्य में मास्क पहनने को अनिवार्य बनाने के लिए भी एक विधेयक सदन की बैठक में ला सकती है. सदन की बैठक को लेकर भाजपा विधायक दल की बैठक सुबह दस बजे विधानसभा में ही होगी.

बहस के बाद सर्वसम्मति से चार विधेयक पारित किए गए थे
बता दें कि बीते दिनों पंजाब सरकार ने विधानसभा में केंद्र सरकार के तीन नए कृषि सुधार कानूनों को प्रभावहीन करने के लिए करीब साढ़े पांच घंटे की बहस के बाद सर्वसम्मति से चार विधेयक पारित किए गए थे. इन विधेयकों के माध्यम से केंद्र सरकार के कानूनों के प्रावधानों को बेअसर करने के कई प्रावधान किया गया है. हालांकि, विशेषज्ञों की मानना है कि पंजाब सरकार के लिए केंद्रीय कृषि कानूनों को बेअसर कर पाना इतना आसान भी नहीं है, जितना समझा जा रहा है.
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