Rajasthan Local Bodies Election: बीजेपी और कांग्रेस की नजरें टिकी हैं जिताऊ निर्दलीय प्रत्याशियों पर

करीब 300 वार्ड ऐसे हैं जहां पर बीजेपी और कांग्रेस पार्टी ने अपने प्रत्याशी खड़े नहीं किये हैं.

करीब 300 वार्ड ऐसे हैं जहां पर बीजेपी और कांग्रेस पार्टी ने अपने प्रत्याशी खड़े नहीं किये हैं.

Rajasthan Local Bodies Election: चुनाव के लिये मतदान प्रक्रिया संपन्न होने के बाद अब बीजेपी और कांग्रेस की नजरें जिताऊ निर्दलीय प्रत्याशियों (Winning Independent candidates) पर टिकी है.

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जयपुर. प्रदेश के 20 जिलों के 90 नगर निकायों में मतदान (Voting) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. अब इंतजार इस रण के नतीजों (Result) का है. मतदान की प्रक्रिया सम्पन्न होते ही राजनीतिक दल जैसे-तैसे इन निकायों में अपने बोर्ड बनाने की कवायदों में जुट गए हैं. नगर निकाय चुनाव में निर्दलीय भी बड़ी संख्या में जीतकर आते हैं लिहाजा राजनीतिक दलों की नजर अपने प्रत्याशियों के साथ ही निर्दलीयों (Winning Independent candidates) पर भी टिकी हुई है. ये निर्दलीय कई स्थानों पर राजनीतिक दलों के तारणहार साबित होंगे. लिहाजा उनके जीतते ही पार्टियां उन्हें अपने पाले में करने की कवायद करेंगी. बीजेपी और कांग्रेस (BJP and Congress) दोनों ही दलों की नजरें जिताऊ निर्दलीय प्रत्याशियों पर है. मतगणना 31 जनवरी को होगी.

पिछले दिनों हुए निकाय चुनावों में भी कई स्थानों पर निर्दलीयों को साथ लेकर बीजेपी और कांग्रेस ने अपने बोर्ड बनाए थे. अब एक बार फिर निर्दलीय समीकरण बना और बिगाड़ सकते हैं. लिहाजा उन पर राजनीतिक दलों की निगाहें हैं. उधर पार्टियों को अपने ही प्रत्याशियों पर भी भरोसा नहीं है. निकायों में बोर्ड बन जाने तक पार्टियां प्रत्याशियों को बाड़ेबंदी में रखने की तैयारियों को अमली जामा पहनाने में जुटी है.

नाम प्रशिक्षण शिविर का लेकिन मकसद एकजुट रखना है

हालांकि इस बाड़ेबंदी को नाम प्रशिक्षण शिविर का दिया जाता है लेकिन हकीकत में इनका मकसद अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखना होता है. पिछले दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जब जीतने के बाद पार्टी प्रत्याशियों ने अपनी निष्ठा बदली और लालच के चलते निकाय प्रमुख के चुनाव में दूसरी पार्टी के प्रत्याशी का साथ दिया. ऐसे में अब पार्टियां निर्दलीयों के साथ ही अपनी ही पार्टी के प्रत्याशियों को भी साधने की कवायद में जुटी है. निकाय प्रमुख चुन लिए जाने तक फूंक-फूंक कर कदम रख रही हैं.
निकाय चुनाव की फैक्ट फाइल

- कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियों ने कई वार्डों में अपने प्रत्याशी नहीं उतारे हैं.

- करीब 300 वार्ड ऐसे हैं जहां पार्टी ने अपने प्रत्याशी खड़े नहीं किये हैं.



- इन वार्डों में जीतकर आने वाले निर्दलीय प्रत्याशियों पर पार्टियों की नजर है.

- पिछले बरसों में निर्दलीय अच्छी खासी संख्या में चुनाव जीतकर आते रहे हैं.

- 1995 में 35 और साल 2000 में 33 जगहों पर निर्दलीय पार्षद निकाय प्रमुख बने थे.

- 2005 में 29, 2010 में 21 और 2015 में 14 स्थानों पर निर्दलीय पार्षद निकाय प्रमुख बने थे.
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