राजस्थान निकाय चुनाव: सचिन पायलट के विरोध के बावजूद कुचामन सिटी में कांग्रेस आजमा रही है हाईब्रिड फॉर्मूला

कुचामन सिटी नगरपालिका नावां विधानसभा क्षेत्र के तहत आती है. वहां से उप मुख्य सचेतक महेंद्र चौधरी विधायक हैं और वे गहलोत खेमे के हैं.

कुचामन सिटी नगरपालिका नावां विधानसभा क्षेत्र के तहत आती है. वहां से उप मुख्य सचेतक महेंद्र चौधरी विधायक हैं और वे गहलोत खेमे के हैं.

Rajasthan Local Body Election: कांग्रेस नागौर जिले की कुचामन सिटी में नगरपालिका प्रमुख के चुनाव के लिये हाईब्रिड फॉर्मूले (Hybrid formula) का इस्तेमाल करने जा रही है.

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जयपुर. निकाय चुनाव (Rajasthan Local Body Election) में इस बार कई रोचक रंग देखने में मिल रहे हैं. कांग्रेस पहली बार नागौर जिले की कुचामन नगरपालिका में हाईब्रिड फॉर्मूले (Hybrid formula) से निकाय प्रमुख बनाने की तैयारी कर रही है. साल 2019 में जब गहलोत सरकार यह नया फॉर्मूला लेकर आई थी, तब तत्कालीन पीसीसी चीफ एवं उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने इसका विरोध किया था. उस समय हाईब्रिड फॉर्मूले के विरोध में दिया गया सचिन पायलट का बयान काफी सुर्खियों में रहा था.

पायलट ने इसे बैकडोर एंट्री बताते हुए लोकतंत्र के खिलाफ बताया था, लेकिन फिलहाल पायलट राजस्थान में साइडलाइन हैं और पार्टी प्रदेश में पहला निकाय प्रमुख इस फॉर्मूले से बनाने जा रही है. कुचामन सिटी नगरपालिका में कांग्रेस ने बिना पार्षद का चुनाव जीते आसिफ खान नाम के व्यक्ति को निकाय प्रमुख का उम्मीदवार बनाया है. कुचामन सिटी नगरपालिका नावां विधानसभा क्षेत्र के तहत आती है. वहां से उपमुख्य सचेतक महेंद्र चौधरी विधायक हैं और वे गहलोत खेमे के हैं.

क्‍या है हाईब्रिड फॉर्मूला?

नगरपालिका एक्ट में बिना पार्षद का चुनाव जीते हुए व्यक्ति को निकाय प्रमुख बनाने का प्रावधान है, लेकिन यह साल 2019 में तब चर्चाओं में आया जब इसे हाईब्रिड फार्मूला नाम दिया गया. इसके तहत बिना पार्षद का चुनाव जीते हुए व्यक्ति को निकाय प्रमुख बनाया जा सकता है. हालांकि, उसे 6 महीने के अंदर चुनाव जीतना होता है. सचिन पायलट ने इसका यह कहते हुए विरोध किया था कि जो व्यक्ति पार्षद का चुनाव नहीं जीत सकता उसे निकाय प्रमुख बनाया जाना गलत है और लोकतंत्र के नियमों के खिलाफ है.
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कुचामन में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं

कुचामन सिटी नगरपालिका में किसी भी पार्टी को बोर्ड बनाने के लिए पूर्ण बहुमत नहीं मिला है. यहां कुल 45 वार्ड हैं. इनमें 18 में बीजेपी, 20 में कांग्रेस और 7 पर निर्दलीय पार्षद जीत कर आये हैं. बोर्ड बनाने के लिए 23 पार्षदों की जरूरत है जो किसी भी पार्टी के पास नहीं हैं. कांग्रेस विचारधारा के निर्दलीय पार्षदों को साधने के लिए पार्टी ने गैर पार्षद को निकाय प्रमुख का उम्मीदवार बनाया गया है.



उठने लगे हैं सवाल

पार्टी के संभाग प्रभारी हरिमोहन शर्मा का कहना है कि कानून से असहमति जताने का पायलट का अधिकार था जो उन्होंने किया. जब उनसे पूछा गया कि क्या पार्टी को जीते हुए पार्षदों में से कोई योग्य उम्मीदवार नहीं मिला तो उन्होंने कहा कि आखिर बिना चुनाव जीते व्यक्ति को अयोग्य क्यों माना जा रहा है?

झुंझुनू के चिड़ावा में भी हाईब्रिड फॉमूले के तहत आवेदन

झुंझुनू की चिड़ावा नगरपालिका में भी हाईब्रिड फॉर्मूले से निकाय प्रमुख बनने के लिए आवेदन किया गया है. निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर पार्षद का चुनाव हारे सुरेश भूकर ने हाईब्रिड फार्मूले से निकाय प्रमुख के लिए आवेदन किया है. उसे स्वीकार भी कर लिया गया है. खास बात यह है कि कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीती सुरेश की पत्नी सरिता और निर्दलीय के तौर पर चुनाव जीती उनकी मां संतोष देवी ने भी निकाय प्रमुख पद के लिए आवेदन किया है. इस तरह एक ही परिवार से 3 लोगों द्वारा निकाय प्रमुख बनने के लिए आवेदन किया गया है.
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