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Rajasthan Local body elections: बीजेपी को सता है खरीद फरोख्त का डर, आज ही करेगी प्रत्याशियों की बाड़ाबंदी

पूनिया का कहना है कि उनका काम प्रयास करने और बेहतरीन परिणाम देने का है. चुनाव परिणाम क्या होगा यह भविष्य के गर्भ में है.
पूनिया का कहना है कि उनका काम प्रयास करने और बेहतरीन परिणाम देने का है. चुनाव परिणाम क्या होगा यह भविष्य के गर्भ में है.

Rajasthan Local body elections: बीजेपी आज मतदान के तुरंत बाद अपने प्रत्याशियों की बाड़ाबंदी करने जा रही है. उसे डर है कि कहीं उसके प्रत्याशियों की खरीद-फरोख्त (Horse trading) नहीं हो जाये.

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जयपुर. प्रदेश के 20 जिलों के 90 निकायों में मतदान (Voting) खत्म होने के साथ ही बीजेपी (BJP) अपने प्रत्याशियों की प्रशिक्षण के नाम पर बाड़ेबंदी करने जा रही है. बीजेपी को इस बात का डर सता रहा है कि उसके प्रत्याशियों की कहीं खरीद-फरोख्त (Horse trading) नहीं हो जाये. बीजेपी में प्रत्याशियों की बाडेबंदी की जिम्मेदारी पार्टी ने निकाय चुनाव प्रभारी और जिला अध्यक्ष को दी है. बीजेपी में ये चुनाव प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया (Satish Poonia) की परीक्षा के तौर पर देखे जा रहे हैं.

प्रदेश के 20 जिलों के 90 निकायों के चुनाव के लिए आज शाम को पांच बजे तक मतदान होगा. मतदान समाप्ति के साथ ही बीजेपी अपनी रणनीति के तहत सभी 90 निकायों के प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी करने जा रही है. इन प्रत्याशियों को प्रशिक्षण के नाम पर तब तक रिसॉर्ट और होटल्स में रखा जाएगा जब तक कि चुनाव परिणाम नहीं आ जाते.

यह घड़ी बीजेपी के लिये एक बड़ी चुनौती है
निकाय चुनाव की यह घड़ी बीजेपी के लिये एक बड़ी चुनौती है. मौजूदा समय में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है और बीजेपी विपक्ष में है. लेकिन पिछले चुनाव की बात की जाये तो बीजेपी के पास इन 90 निकायों में से 60 पर उसका कब्जा था. वहीं कांग्रेस के पास 25 निकाय थे और 5 पर निर्दलीयों का कब्जा था. बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने माना कि पंचायत राज और निकायों के चुनाव का अब तक का इतिहास रहा है कि उसके परिणाम सत्ता के पक्ष में आते हैं. पिछले समय बीजेपी की सरकार थी तो उसके बोर्ड भी ज्यादा बने थे.
पूनिया बोले प्रत्याशियों को सुरक्षित जगह भी ले जाना पड़ता है


सतीश पूनिया ने कहा कि बाड़ेबंदी जैसे शब्द कांग्रेस पर ज्यादा सटीक बैठते हैं बीजेपी पर नहीं. आजादी के बाद से लगातार चुनाव के बाद इस तरह के शिविर पार्टियां आयोजित करती रही हैं. पूनिया ने माना कि यह छोटे चुनाव हैं और इनका मनोवैज्ञानिक रूप से दबाव रहता है. इसलिए प्रत्याशियों को सुरक्षित जगह भी ले जाना पड़ता है. इन चुनावों में अधिकांश नए लोग आते हैं. उन्हें पार्टी की रीति नीति के बारे में भी बताया जाता है.

बीजेपी हर कदम सोच-समझकर उठा रही है
पिछले निकाय चुनाव में बीजेपी को मिली शिकस्त के बाद अब वह हर कदम सोच-समझकर उठा रही है. इन चुनाव को प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया के लिए अग्निपरीक्षा भी बताया जा रहा है. जबकि पूनिया का कहना है कि यह राजनीति की सामान्य परिपाटी है. बकौल पूनिया मेरा काम प्रयास करने का और बेहतरीन परिणाम देने का है. चुनाव परिणाम क्या होगा यह भविष्य के गर्भ में है.
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