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Rajasthan News Live Updates: MLA गजेन्द्र सिंह के निधन से कांग्रेस को लगा एक और बड़ा झटका, विधानसभा की 4 सीटें हुईं खाली

Rajasthan News, 20-January-2021: नये साल में कांग्रेस (Congress) को एक और बड़ा झटका लगा है. कांग्रेस विधायक गजेन्द्र सिंह शक्तावत (MLA Gajendra Singh Shaktawat) का आज निधन हो गया. शक्तावत के निधन की सूचना के बाद कांग्रेस में शोक की लहर दौड़ गई.

Hindi.news18.com | January 20, 2021, 4:39 PM IST
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Last Updated January 20, 2021
2:52 pm (IST)
गजेंद्र सिंह शक्तावत दूसरी बात वल्लभनगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने थे. इससे पहले पूर्ववर्ती गहलोत सरकार में विधायक बनने के बाद शक्तावत को संसदीय सचिव बनाकर राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया था. पिछले चुनाव में शक्तावत जनता सेना के रणधीर सिंह भिंडर से हार गए थे. लेकिन इस चुनाव में एक बार फिर रणधीर सिंह भिंडर को शिकस्त देकर गजेंद्र सिंह शक्तावत ने मेवाड़ में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई. 


शक्तावत ने तीनों चुनाव रणधीर सिंह भिंडर के सामने ही लड़े. मेवाड़ अंचल में जब बीजपी का प्रभुत्व बढ़ रहा था उस दौर में भी गजेंद्र सिंह ने जीत हासिल कर शक्तावत परिवार का प्रभुत्व इस अंचल में बनाये रखा. गजेंद्र सिंह शक्तावत मेवाड़ अंचल में कांग्रेस की युवा टीम के सबसे चहेते नेता थे. प्रदेश स्तर पर जब कांग्रेस में बड़ी गुटबाजी सामने आई तो मेवाड़ के युवाओं की एक बड़ी टीम गजेंद्र सिंह के समर्थन में खड़ी नजर आई.


गत वर्ष प्रदेश में सीएम अशोक गहलोत और पूर्व पीसीसी चीफ सचिन पायलट के बीच हुये सियासी घमासान में वे पायलट खेमे के साथ नजर आये. पायलट खेमे में जाने के बाद गजेंद्र सिंह शक्तावत सुर्खियों में आए थे. इस दौरान वे खुलकर सचिन पायलट के समर्थन में नजर आए और राज्य सरकार के कार्यों को लेकर असंतोष व्यक्त किया था. हालांकि उन्होंने कभी भी कांग्रेस से अलग होने की बात नहीं की. उसके बाद वे जब खेमेबंदी से लौटे तब भी कांग्रेस के साथ रहकर कार्यकर्ताओं के लिए हर लड़ाई लड़ने का वादा किया था.

12:47 pm (IST)
उदयपुर. पूर्व पीसीसी चीफ सचिन पायलट के करीबियों में शामिल माने जाने वाले विधायक गजेन्द्र सिंह शक्तावत उदयपुर जिले के वल्लभनगर विधानसभा क्षेत्र से 2 बार विधायक रहे हैं. पिछली गहलोत सरकार में संसदीय सचिव रह चुके शक्तावत ने विधानसभा के तीन चुनाव लड़े थे. इनमें से दो में वे विजयी रहे, और एक में उनको हार का सामना करना पड़ा था. 

 

दिल्ली में बुधवार को उपचार के दौरान शक्तावत के निधन के बाद जैसे ही इसका सूचना मेवाड़ पहुंची तो यहां शोक की लहर छा गई. शक्तावत के निधन की सूचना मेवाड़ में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ट्वीट से मिली. उसके बादद उदयपुर के न्यू फतेहपुरा इलाके में स्थित शक्तावत के निवास के बाहर उनके समर्थक जमा होने लगे. शक्तावत कुछ महीनों से लगातार बीमार चल रहे थे. उसके बाद उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई. 

 

गजेंद्र सिंह शक्तावत का निधन लिवर खराब होने के कारण हुआ बताया जा रहा है. कुछ माह पहले पीलिया बिगड़ने के बाद से शक्तावत का इलाज चल रहा था. हालांकि उसमें कुछ रिकवरी जरूर हुई थी लेकिन इस बीच शक्तावत को कोरोना ने अपनी चपेट में ले लिया. उसके बावजूद उनकी तबीयत सुधरने लगी थी, लेकिन मंगलवार रात को अचानक फिर तबीयत बिगड़ने के बाद बुधवार को सुबह उनका निधन हो गया. 

11:44 am (IST)

गत वर्ष 6 अक्टूबर को भीलवाड़ा के सहाड़ा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक कैलाश त्रिवेदी का गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में कोरोना के कारण निधन हो गया था. कांग्रेस इस झटके से उबर ही नहीं पाई थी कि अशोक गहलोत सरकार के कैबिनेट मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल का लंबी बीमारी के कारण इलाज के दौरान गुरुग्राम में निधन हो गया. मेघवाल चूरू जिले के सुजानगढ़ विधानसभा क्षेत्र से विधायक थे. वे वहां से कई बार विधायक और कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे. मेघवाल वर्ष 2020 की शुरुआत में हार्ट अटैक आने के बाद लगातार बीमार थे.

 

 

प्रदेश की राजनीति को हिलाकर रख दिया है
कांग्रेस पार्टी अपने दो विधायकों के दर्द से उबरने का प्रयास कर रही थी कि इस दौरान पिछले दिनों कोरोना ने राजसमंद विधायक किरण माहेश्वरी को छीन लिया. माहेश्वरी बीजेपी की दिग्गज नेता रही थी. वे उदयपुर से सांसद भी रह चुकी थीं. एक के बाद एक तीन विधायकों के निधन से राजस्थान की राजनीति में शोक की लहर टूटने का नाम ही नहीं ले रही थी. उसके बाद अब उदयपुर के वल्लभनगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक गजेन्द्र सिंह शक्तावत के निधन ने प्रदेश की राजनीति को हिलाकर रख दिया है.

11:32 am (IST)
जयपुर. राजस्थान की राजनीति के लिये बीते छह माह काफी मुश्किल भरे रहे हैं. इन छह माह में प्रदेश अपने चार विधायकों को खो चुका है. चारों ही विधायकों का निधन बीमारी के कारण हुआ है. चार विधायकों के निधन के कारण अब राजस्थान विधानसभा की चार सीटें खाली हो गई हैं. बीमारी के कारण इस दुनिया को अलविदा कहने वाले चार विधायकों में से तीन कांग्रेस और एक बीजेपी के थे. इनमें दो विधायकों का निधन कोरोना के कारण हुआ है. 


9:54 am (IST)

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी शक्तावत के निधन पर शोक जताया है.

9:53 am (IST)
9:36 am (IST)
9:36 am (IST)
जयपुर. कांग्रेस विधायक गजेंद्र सिंह शक्तावत का निधन हो गया है. वे पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे. शक्तावत के निधन पर सीएम अशोक गहलोत ने शोक जताया है. सीएम ने अपने ट्वीट में ईश्वर से शोकाकुल परिजनों को इस बेहद कठिन समय में सम्बल देने और दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करने की प्रार्थना की है. सीएम गहलोत ने कहा कि वे शक्तावत के स्वास्थ्य को लेकर पिछले 15 दिन से परिवारजन और डॉक्टर शिव सरीन के संपर्क में थे. विधायक शक्तावत के निधन की सूचना के बाद आज होने वाली कैबिनेट की बैठक स्थगित कर दी गई है. वहीं प्रस्तावित दिशा समिति की बैठक को भी स्थगित कर दिया गया है. 

8:28 am (IST)
जोधपुर. कोरोना काल के बाद पश्चिमी राजस्थान में फिल्मों की शूटिंग शुरू होने से टूरिज्म इंडस्ट्री में बूम देखने को मिल रहा है. जोधपुर संभाग के जैसलमेर में अक्षय कुमार की फिल्म 'बच्चन पांडे' और सैफ अली खान की 'भूत' फिल्म की शूटिंग के चलते पश्चिमी राजस्थान में टूरिस्ट इंडस्ट्री को थोड़ी राहत मिली है. फिल्मों की यूनिटें आने से एक बार फिर जहां जैसलमेर गुलजार हो रहा है. वहीं जोधपुर में देसी पर्यटकों की तादाद भी दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है.  

7:54 am (IST)
जयपुर. प्रदेश के 20 जिलों के 90 निकायों (1 नगर निगम, 9 नगर परिषद और 80 नगरपालिकाओं) के चुनावी तस्वीर साफ हो गई है. सदस्य पदों के लिए होने वाले चुनाव में नाम वापसी के बाद कुल 9930 उम्मीदवार चुनावी मैदान में रह गए हैं. नाम वापसी की आखिरी तिथि 19 जनवरी तक 2341 प्रत्याशियों ने नाम वापस लिए, जबकि 50 उम्मीदवार निर्विरोध निवार्चित हो चुके हैं. इन सभी निकायों में 28 जनवरी को सुबह 8 से शाम 5 बजे तक मतदान होगा. मतगणना 31 जनवरी को सुबह 9 बजे से होगी.

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जयपुर. राजस्‍थान के 20 जिलों के 90 निकायों (1 नगर निगम, 9 नगर परिषद और 80 नगरपालिका) की चुनावी (Local Bodies Election-2021) तस्वीर साफ हो गई है. सदस्य पदों के लिए होने वाले चुनाव में नाम वापसी के बाद कुल 9930 उम्मीदवार चुनावी मैदान में रह गए हैं. नाम वापसी की आखिरी तिथि 19 जनवरी को 2341 प्रत्याशियों ने नाम वापस लिए, जबकि 50 उम्मीदवार निर्विरोध निवार्चित (Elected unopposed) हो चुके हैं. इन सभी निकायों में 28 जनवरी को सुबह 8 से शाम 5 बजे तक मतदान होगा. मतगणना 31 जनवरी को सुबह 9 बजे से होगी.

राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त पीएस मेहरा ने बताया कि सदस्य पद के लिए 11 जनवरी को लोक सूचना जारी होने के साथ नामांकन-पत्र भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी. नामांकन-पत्र भरने की अंतिम तिथि तक 15101 उम्मीदवारों ने 18510 नामांकन-पत्र दाखिल किए. उन्होंने बताया कि नामांकन-पत्रों की जांच-पड़ताल और नाम वापसी के बाद अब 9930 उम्मीदवार चुनावी मैदान में शेष रह गए हैं.

इन जिलों में होंगे चुनाव
चुनाव आयुक्त पीएस मेहरा ने बताया कि प्रदेश के 20 जिलों अजमेर, बांसवाड़ा, बीकानेर, भीलवाड़ा, बूंदी, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, चूरू, डूंगरपुर, हनुमानगढ़, जैसलमेर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनूं, नागौर, पाली, राजसमंद, सीकर, टोंक और उदयपुर के 90 निकायों में चुनाव होंगे. इनमें 1 नगर निगम, 9 नगर परिषद और 80 नगरपालिकाये हैं. 87 नगर निकायों की निर्वाचक नामावली का अंतिम प्रकाशन गत वर्ष 20 जुलाई और 3 निकायों की नामावलियों का प्रकाशन 19 नवंबर को किया जा चुका है.

कुल 30 लाख 28 हजार 544 मतदाता
1 जनवरी 2021 की अर्हता के संबंध में 4 जनवरी तक जोड़े गए नामों के बाद कुल 30 लाख 28 हजार 544 मतदाता हैं. इनमें से 15 लाख 47 हजार 974 पुरुष, 14 लाख 80 हजार 514 महिला और 56 अन्य मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे. 90 निकायों के 3035 वार्डों के लिए 5253 मतदान केन्द्रों पर मतदान होगा.

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चिंता के विचार आपकी ख़ुशी को बर्बाद कर सकते हैं। ऐसा न होने दें, क्योंकि इनमें अच्छी चीज़ों को ख़त्म करने की और समझदारी में निराशा का ज़हरीला बीज बोने की क्षमता होती है। ख़ुद को हमेशा अच्छा परिणाम पाने के लिए प्रोत्साहित करें और ख़राब हालात में भी कुछ-न-कुछ अच्छा देखने का गुण विकसित करें। ख़ास लोग ऐसी किसी भी योजना में रुपये लगाने के लिए तैयार होंगे, जिसमें संभावना नज़र आए और विशेष हो। भूमि से जुड़ा विवाद लड़ाई में बदल सकता है। मामले को सुलझाने के लिए अपने माता-पिता की मदद लें। उनकी सलाह से काम करें, तो आप निश्चित तौर पर मुश्किल का हल ढूंढने में क़ामयाब रहेंगे। किसी से अचानक हुई रुमानी मुलाक़ात आपका दिन बना देगी। काम के लिए समर्पित पेशेवर लोग रुपये-पैसे और करिअर के मोर्चे पर फ़ायदे में रहेंगे। सफ़र के लिए दिन ज़्यादा अच्छा नहीं है। जीवनसाथी के ख़राब व्यवहार का नकारात्मक असर आपके ऊपर पड़ सकता है। स्वयंसेवी कार्य या किसी की मदद करना आपकी मानसिक शांति के लिए अच्छे टॉनिक का काम कर सकता है। परेशान? आप पंडित जी से प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
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