राजस्थान के एकलौते संस्कृत यूनिवर्सिटी का खस्ताहाल, दाखिला नहीं ले रहे छात्र

संस्कृत यूनिवर्सिटी में सुविधा और शिक्षकों का घोर अभाव है.
संस्कृत यूनिवर्सिटी में सुविधा और शिक्षकों का घोर अभाव है.

राजधानी जयपुर में स्थित जगद्गुरू रमानांदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय (Sanskrit University) में मौजूदा सत्र के लिए दाखिले की तिथियां बार-बार बढ़ाई जा रही हैं. लेकिन अब तक 40 फीसदी सीट पर भी एडमिशन नहीं हुआ है.

  • Share this:
जयपुर. जर्मन भाषा से लेकर सिलेबस में सीबीसीएस सिस्टम की कवायद करने वाले राजस्थान के एक मात्र संस्कृत विश्वविद्यालय (Sanskrit University) को स्टूडेंट्स नहीं मिल रहा है. राजधानी जयपुर में 20 वर्ष की यात्रा पूरी कर चुके इस विश्वविद्यालय पर हर साल कुछ इसी तरह का संकट बना रहता है. मौजूदा सत्र में दाखिले की तिथियां बार-बार बढाई जा रही हैं. लेकिन अब तक चालीस फीसदी सीट भी नहीं भरी पाई है.

नये कोर्सेस शुरू करने के बावजूद नहीं आ रहे छात्र 

जगद्गुरू रमानांदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय में नए कुलपति के तौर पर प्रोफेसर अनुला मौर्या के कार्यभार संभालने के बाद ही ये घोषणा की गई थी कि च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम, जर्मन और पत्रकारिता के डिप्लोमा कोर्सेज शुरू होंगे. अम्बेडकर, गांधी और महिला अध्ययन केन्द्र स्थापित होंगे, ताकि इस बहाने ही स्टूडेंट्स की संख्या में बढ़ोतरी हो. लेकिन नतीजा कोई खास नहीं मिल सका है. इन घोषणाओं को वास्तविकता में बदलने की कवायद चल रही है. लेकिन दूसरी तरफ दाखिले की स्थिति दयनीय बन गई है.



यूनिवर्सिटी में मुख्य कोर्स संयुक्ताचार्य का है, जिसमें अब तक 1245 सीटों पर महज 380 दाखिले ही हुए हैं. यानि आधी से ज्यादा सीटें अभी भी खाली हैं. जबकि दो बार आवेदन की तिथि बढ़ाई गई है. फिर भी स्टूडेंट्स का रूझान नहीं बढ़ा.
संसाधनों की कमी है बड़ी वजह

दरअसल संस्कृत से नहीं, बल्कि संस्कृत यूनिवर्सिटी में संसाधनों की कमी के चलते छात्रों की ये बेरूखी है. यहां का खस्ताहाल हॉस्टल और शिक्षकों की भारी कमी छात्रों को यहां आने से रोक रहे हैं. यूनिवर्सिटी में स्थाई शिक्षकों के आधे पद खाली है. कुल 44 में से 22 ही स्थायी शिक्षक नियुक्त हैं. अशैक्षणिक कर्मचारी भी यहां गिने-चुने ही बचे हैं.



संस्कृत यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ उपाध्यक्ष रवि शर्मा बताते हैं कि विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रशासन को विशेष कवायद की जरूरत है. जबकि छात्रसंघ अध्यक्ष घनश्याम गौतम इस मामले में यूनिवर्सिटी प्रशाासन के साथ- साथ सरकार को जिम्मेदार ठहराते हैं.

शिक्षा मंत्री डॉ सुभाष गर्ग का कहना है कि संस्कृत के साथ बाकी विषयों पर फोकस करके यूनिवर्सिटी में दाखिला बढ़ाने पर ध्यान देना होगा. जिस पर सरकार कार्य कर रही है.

विश्वविद्यालय में योग जैसे कोर्स पर विद्यार्थियों का कुछ रूझान है भी, लेकिन लंबे अर्से से संस्कृत के विद्यार्थी इस विश्वविद्यालय की ओर कोई सकारात्मक रूझान नहीं दिखा पा रहे हैं. यह संस्कृत से जुड़े विद्वानों के अलावा राज्य सरकार के लिए भी चिंता का विषय है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज