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300 गुमशुदा लड़कियों को तलाशने वाले इस पुलिसवाले का कोई सानी नहीं

News18 Rajasthan
Updated: December 11, 2019, 5:42 PM IST
300 गुमशुदा लड़कियों को तलाशने वाले इस पुलिसवाले का कोई सानी नहीं
पदम सिंह ने 300 गुमशुदा बेटियों को वापस उनके परिवार से मिलाने का काम किया है.

राजस्थान पुलिस (Rajasthan Police) के एएसआई पदम सिंह (ASI Padam Singh) के पास है 300 से अधिक परिवारों को उनकी खुशियां वापस लौटाने का श्रेय, इन्होंने करीब 300 गुमशुदा बेटियों (Missing Grils) को वापस उनके परिवार से मिलाने का काम किया है.

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जयपुर. पुलिस को लेकर अधिकांश तौर पर हमारे जेहन में नेगेटिव सोच ही उभरती है. लेकिन फिर भी कई बार ऐसे वाकये होते हैं जब हम हम पुलिसकर्मियों को सिंघम बताते हैं तो कभी हैदराबाद जैसी घटना होने पर पूरी पुलिस की तारीफ करने लगते हैं. आज हम ऐसे की एक पुलिसकर्मी की बात कर रहे हैं जिसके पास ऐसा अनोखा रिकॉर्ड है जिसके बारे में कम लोग ही जानते हैं. जी हां, हम बात कर रहे हैं जयपुर के झोटवाड़ा थाने में तैनात एएसआई पदम सिंह की. प्रदेश से लापता और अगवा हुई बच्चियों को खोजने में पूरे पुलिस बेडे़ में इनका कोई सानी नहीं हैं. बकौल पदम सिंह ने अब तक तीन सौ से अधिक बच्चियों को उनके परिवार से मिलाने का काम किया है. जिसमें खुद 175 बच्चियों को ढूंढ़कर उनके परिवारों के पास लाए तो 150 बच्चियों की बरामदगी में अहम भूमिका निभाई है.

19 वर्ष की आयु से पुलिस में भर्ती पदम सिंह बच्चियों और उनसे जुड़े अपराधों में अपराधी को पकड़ने के लिए देश के हर राज्य में जा चुके हैं. तो कई हजार किलोमीटर का सफर कर चुके हैं. यहां तक की जम्मू-कश्मीर और नेपाल से भी बच्चियों को ढूंढ़कर वापस उनके परिवारों के पास ला चुके हैं. एक बार तो केंद्रीय गृहमंत्री द्वारा जयपुर पुलिस को दिए गए टास्क को महज 24 घंटे के दौरान हीं पूरा कर लिया. युवती के परिजनों ने तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह तक से संपर्क कर बच्ची को बरामद करने की गुहार की थी और तब अधिकारियों ने एएसआई पदम सिंह को जिम्मा सौंपा था.

दरअसल, कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं जहां नाबालिग बच्चियों को बहला-फुसलाकर भगा लिया जाता है. ऐसे मामलों में एएसआई पदम सिंह सभी राज्यों में जाकर बच्चियों को वापस अपने परिवार के पास ला चुके हैं. पदम सिंह बच्चियों को तलाश करने के पीछे खास वजह बताते हैं.


उन्होंने बताया कि कुछ साल पहले वे परिवार के साथ वैष्णो देवी यात्रा पर गए थे. जहां कटरा पहुंचने पर उनकी मासूम दोहिती भीड़भाड़ में गुम हो गई. काफी देर तक पता नहीं चलने पर वे बैचेन हो गए थे. हालांकि कुछ मशक्कत के बाद दोहिती तो मिल गई लेकिन एक बच्ची के गुम होने पर उसके परिवार का दर्द क्या होता है उसका अहसास हुआ.

अपने सेवाकाल के दौरान पदम सिंह ने अधिकारियों की शाबाशी और कैश अवार्ड प्राप्त किए हैं. अब एएसआई पदम सिंह इस महीने के आखिरी में रिटायर हो रहे हैं. हाल ही डीजीपी ने भी उन्हें सामाजिक सरोकार के काम करने पर लंच का न्यौता दिया था.

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First published: December 11, 2019, 5:39 PM IST
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