राजस्‍थान संकट: वे 5 सवाल जो सीएम गहलोत के लिए बन सकते हैं चुनौती
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राजस्‍थान संकट: वे 5 सवाल जो सीएम गहलोत के लिए बन सकते हैं चुनौती
सीएम अशोक गहलोत

Rajsthan Political Crisis: राजस्थान की राजनीति में भले ही बागवत के स्वर कम हो गए हों, लेकिन अभी भी सीएम गहलोत (CM Ashok Gehlot) के लिए राह आसान होती नज़र नहीं आ रही है. गहलोत के लिए जहां एक तरफ पार्टी में संतुलन एक चुनौती के रूप में सामने है वहीं 5 ऐसे सवाल भी हैं जो साफ करते है कि गहलोत के लिए आगे आने वाली डगर कितनी मुश्किल हो सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 14, 2020, 8:33 AM IST
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जयपुर. कांग्रेस सरकार में बगावत से उठे संकट के बाद फौरी तौर पर माहौल भले ही शांत हो गया है, लेकिन अभी भी अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के लिए राह आसान नहीं दिख रही है. पार्टी में सामंजस्य बिठाना गहलोत की सबसे बड़ी चुनौती हो सकती है. जहां एक तरफ सचिन पायलट (Sachin Pilot) खेमे के बागी विधायकों को पार्टी में फिर से जगह मिलने से गहलोत खेमे के कई विधायक नाराज़ हैं वहीं सीएम गहलोत ने भी भूलो, माफ़ करो और आगे बढ़ो का सन्देश देकर नाराज विधायकों को मनाने की कोशिश की है. सवाल यही है कि इस सन्देश के बाद क्या गहलोत समर्थक बागी विधायकों को माफ़ कर सकेंगे?

बगावत के बाद अब सीएम गहलोत के सामने बड़ी चुनौतियां हैं. जहां एक तरफ उन्हें अपने समर्थक विधायकों को मनाए रखना है वहीं बागी विधायक भी पार्टी में खास जगह की मांग कर रहे हैं. गहलोत के लिए इस वक़्त संतुलन सबसे बड़ा सवाल है, लेकिन वहीं 5 और सवाल हैं जो गहलोत के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं हैं.

1. कैसे पूरी करेंगे समर्थक विधायकों की उम्मीदें

सीएम गहलोत के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि बगावात के दौर में जो समर्थक विधायक एकजुट बने रहे और जिनकी वजह से गहलोत की कुर्सी बच सकी उनकी उम्मीदों को कैसे पूरा किया जाए. जाहिर है कि इनमें से कुछ विधायक मंत्री तो कुछ अन्य पदों पर नियुक्ति के लिए गहलोत पर नज़र बनाए होंगे. वहीं बागी विधायकों के लौटने से समर्थकों में यह डर भी जरुर बना होगा कि कहीं उन्हें मिलने वाले पद बागी विधायकों को ना मिल जाएं.



2. गहलोत कैसे बनाएंगे पार्टी में संतुलन

बगावत के बाद सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों के लिए राजस्थान की राजनीति में आगे की राह मुश्किल हो सकती है. माना जा रहा है कि सचिन पायलट को संगठन में बड़ा पद देकर उन्हें राजस्थान की राजनीति से अलग किया जा सकता है. ऐसे में बड़ा सवाल खड़ा हो जाएगा कि पायलट समर्थक विधायकों का क्या होगा? इन विधायकों को गहलोत खेमे के विधायक पार्टी में कोई भी पद देने पर विरोध करेंगे और पार्टी में जगह देना ख़ुद गहलोत के लिए जिम्मेदारी का विषय बन जाएगा. ऐसे में गहलोत के लिए संतुलन बनाए रखना ही बड़ी चुनौती होने वाला है. ?



3. उठ सकते हैं विरोध के स्वर

बगावत के बाद अब अगर पायलट समर्थक विधायकों को सम्मान मिलता है तो गहलोत के वो विधायक नाराज हो जाएंगे जिन्होंने एकजुट होकर गहलोत की कुर्सी को बचाए रखा. जैसलमेर में गहलोत समर्थक विधायक पहले ही चेता चुके हैं कि- अगर 22 लोग मिलकर दबाव बना सकते हैं तो हमारी संख्या तो बहुत ज्यादा है. आलाकमान को हमारा पक्ष भी सुनना पड़ेगा. ऐसे में साफ है कि गहलोत समर्थक विधायकों की नहीं सुनी गयी तो पार्टी में एक बार फिर बड़े स्तर पर विरोध के स्वर उठ जाएंगे.

4. गहलोत और पायलट के रिश्ते

राजस्थान की राजनीति में अचानक उठे बगावत के दौर में अपनी सरकार बचा कर गहलोत ने पार्टी में अपनी दावेदारी काफी मज़बूत कर ली है. यहां उनका कद और भी बड़ा होता नज़र आ रहा है. पार्टी हाईकमान भी अब उनसे कुर्सी छोड़ने के लिए कहने से पहले हजार बार सोचेगा. लेकिन यहां अब चुनौती यह है कि गहलोत बागी विधायकों को माफ कर पाएंगे. वहीं लोगों की नज़र इस बात पर भी बनी रहेगी कि क्या एक बार फिर गहलोत और सचिन के रिश्तों में वही मिठास बनी रहेगी जो बगावत से पहले हुआ करती थी?

5. गहलोत बनेंगे कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष?

राजस्थान की राजनीति से गहलोत की एक शर्त पर विदाई हो सकती है कि पार्टी हाई कमान उन्हें राष्ट्रिय अध्यक्ष के पद पर बिठा दे. कई नेताओं की मांग है कि पार्टी एक साल से अस्थाई अध्यक्ष के भरोसे चल रही है ऐसे में स्थाई अध्यक्ष होना चाहिए. चूंकि राहुल गांधी इस पद के लिए तैयार नहीं हैं और सोनिया गांधी की तबीयत कुछ नासाज है. ऐसे में माना जा रहा है कि पार्टी के महत्वपूर्ण पद पर अगर किसी बाहरी का आना होता है तो गहलोत ही पहली पसंद साबित हो सकते हैं. हालांकि इसको लेकर गहलोत कई बार मना कर चुके हैं और अपनी मंशा में राजस्थान से बाहर जाने को नकार चुके हैं.

आज से शुरू होगा विधानसभा का विशेष सत्र
उल्लेखनीय है कि राजस्थान में आज से विधानसभा सत्र शुरू हो रहा है. इसमें बीजेपी गहलोत सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी. बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि सरकार कई मुद्दों पर जूझ रही है. उनके विश्वास प्रस्ताव लाने की उम्मीद है. लेकिन हम भी अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए तैयार हैं. नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि पार्टी ने पूरी तैयारी कर रखी है. उन्होंने कहा कि सरकार एक महीने से बाड़े में बंद है. प्रदेश में केंद्र सरकार की योजनाओं की अनदेखी की जा रही है. ये सरकार विरोधाभास की सरकार है.
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