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OPINION: राजस्थान में अब कॉमन मिनिमन प्रोग्राम के आधार पर आगे बढ़ेगी कांग्रेस की सत्ता

सचिन पायलट के बगावत के चलते राजस्थान कांग्रेस में एक महीने तक घमासान होता रहा (न्यूज़ 18 क्रिएटिव)

सचिन पायलट के बगावत के चलते राजस्थान कांग्रेस में एक महीने तक घमासान होता रहा (न्यूज़ 18 क्रिएटिव)

राजनीतिक विश्लेषक राजस्थान की राजनीति (Rajasthan Politics) में पूरे घटनाक्रम पर कह रहे हैं कि इस मामले में कांग्रेस और हाईकमान (Congress High Command) की जीत हुई है, बाकी सब कयास हैं

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जयपुर. राजस्थान कांग्रेस (Rajasthan Congress) का सियासी संकट आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद फिलहाल सुलझ गया है. सचिन पायलट कैंप (Sachin Pilot Camp) के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) से मतभेद सुलझााने और उनकी मांगों पर विचार करने के लिए कांग्रेस हाईकमान (Congress High Command) ने तीन बड़े नेताओं की कमेटी बनाने की घोषणा की है. इस कमेटी की रिपोर्ट और सिफारिशों के बाद उन पर होने वाले अमल पर निर्भर करेगा कि कांग्रेस की सियासत किस तरफ मोड़ लेती है. राजनीतिक विश्लेषक इस पूरे घटनाक्रम पर कह रहे हैं कि इस मामले में कांग्रेस और हाईकमान की जीत हुई है, बाकी सब कयास हैं.

एक महीने तक कांग्रेस को चुनौती देने के बाद पायलट कैंप को वापस लाने में आलाकमान कामयाब रहा. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने इस पूरे प्रकरण में अहम भूमिका निभाई. सचिन पायलट और उनके समर्थकों की शिकायतों को सुनकर उनके निराकरण के लिए कमेटी बनाई गई है. अब सचिन पायलट और सत्ता खेमे के बीच तालमेल के लिए एक कॉमन मिनिमम प्रोग्राम तैयार किया जा रहा है. तीन सदस्यीय कमेटी पर कॉमन मिनिमम प्रोग्राम तैयार करने की जिम्मेदारी है. जिसे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने रखा जाएगा. गहलोत हाईकमान के फैसले पर अमल करेंगे, इसके संकेत उन्होंने पायलट की वापसी के बाद मीडिया के सवालों के जवाब में भी दिया है. यह अलग बात है कि गहलोत गुट के विधायक बागियों को वापस लेने के पक्ष में नहीं थे, अब भी कई आवाजें उठ रही हैं लेकिन हाईकमान के बदले रुख को देखकर अब वो मुखर नहीं हो रहे हैं.

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कुछ समय पहले तक सचिन पायलट के खिलाफ तल्ख तेवर अपनाने वाले सीएम अशोक गहलोत हाल में नरम हो गए थे (फाइल फोटो)


युवा जोश और अनुभव के मॉडल पर राजस्थान कांग्रेस की सियासत को आगे बढ़ाने की कवायद 

राजस्थान में सचिन पायलट मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ कॉलेबरेटर बनकर रहने का मैसेज देते आए हैं. अब तक के पीसीसी चीफ मुख्यमंत्री के सामने कमोवेश फॉलोवर की भूमिका में रहते आए हैं. सचिन पायलट की कॉलेबरेटर की भूमिका के कारण उनकी अलग इमेज बनी. कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसी के चलते राजस्थान में युवा जोश और अनुभव के हाइब्रिड मॉडल पर पार्टी को चलाने का फैसला किया था. इसके लिए बाकायदा राहुल गांधी ने कई बार सार्वजनिक मंचों से भी घोषणा की थी. सियासी संकट के पीछे अहम कारण कॉलेबरेटर की भूमिका को ही जिम्मेदार माना जा रहा है.

राजस्थान के राजनीतिक इतिहास में सबसे लंबी बाड़ेबंदी  

पायलट कैंप की बगावत के बाद पैदा हुए सियासी संकट के कारण राजस्थान की राजनीति में सबसे लंबी बाड़ेबंदी का इतिहास बना. कांग्रेस विधायकों की बाड़ेबंदी को एक माह पूरा हो रहा है. राजनीतिक इतिहाकारों के मुताबिक अब तक राजस्थान में कई बार विधायकों की बाड़ेबंदियां हुई है. लेकिन पहले कभी भी इतने दिनों तक विधायकों को लगातार बाड़बंदी में नहीं रखा गया.

सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों की बगावत के तरीके और फिर वापसी का मामला देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है. यह पहला मौेका था जब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद पर रहते हुए किसी नेता ने बगावत की हो, और इसमें चारों अग्रिम संगठनों के अध्यक्षों ने भी उनका साथ दिया हो. बगावत के इस अनूठे प्रकरण पर कांग्रेस आलाकमान ने एक माह की देरी से फैसला लिया लेकिन इतना तय है कि हाईकमान ने देर से ही सही बागियों की घर वापसी करवाकर राजस्थान में मध्य प्रदेश जैसे हालात बनाने से रोक लिया.

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