मानसून में भी सूखा रह गया राजस्थान, महज 55% जमा हुआ पानी, 82 बांध बिल्कुल सूखे
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मानसून में भी सूखा रह गया राजस्थान, महज 55% जमा हुआ पानी, 82 बांध बिल्कुल सूखे
कम क्षमता वाले डेम की स्थिति ज्यादा खराब है.

राजस्थान (Rajasthan) के 22 बांधों में मात्र 55 फीसदी पानी जमा हो पाया है.  मध्यम और लघू बांधों (Dam) की प्यास बुझाने के लिए अभी भी 60 फीसदी जलभराव की जरूरत है.

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जयपुर. राजस्थान के कई इलाकों में भले ही झमाझम बारिश हो रही है फिर भी कुछ इलाकों में मानसून की बेरुखी के चलते राजस्थान (Rajasthan) के बांध अभी भी प्यास से तड़प रहे हैं. ठीक एक साल पहले जहां मानसून की मेहरबानी के कारण अधिकांश बांध (Dam) लबालब होने के कारण छलक रहे थे. वहीं इस वर्ष राज्य में संभाग स्तर के प्रमुख बड़े बांधों की कुल भराव क्षमता का आधा पानी भी जमा नहीं हुआ है, जबकि वृहद स्तर के सभी प्रमुख 22 बांधों में मात्र 55 फीसदी पानी जमा हुआ है. सबसे बुरी स्थिति मध्यम और लघू बांधों की है जिनमें से अधिकांश का गला अभी भी सूखा पड़ा है. मध्यम और लघू बांधों की प्यास बुझाने के लिए अभी भी 60 फीसदी और पानी की जरूरत महसूस हो रही है. हालात ये है कि इस मानसून में कई जिलों के बांध अभी भी पानी की एक-एक बूंद को तरस रहे हैं.

प्रदेश में इस साल अधिकांश बांधों की स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं हैं. हालांकि झमाझम बारिश के कारण कुछ बांध लबालब भर गए हैं, लेकिन कोटा को छोड़कर पाली, भीलवाड़ा, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, टोंक, दौसा, बूंदी, धौलपुर, चित्तौड़गढ़ जिलों के बांधों में पिछले साल की तुलना में जल भराव चिंताजनक है. वहीं जयपुर, करौली, भरतपुर अलवर क्षेत्र के बांध अभी भी पानी को तरस रहे हैं. नजर डालते हैं प्रदेश के प्रमुख बड़े बांधों की स्थिति पर:
जिला बांध का नाम                 वर्ष 2020 में भराव     वर्ष 2019 में भराव    वर्ष 2020 में कुल भराव 

चित्तौड़गढ राणा प्रताप सागर      2210.9Mcum       2700Mcum              72.66%
कोटा कोटा बैराज                     109Mcum            107Mcum                  98%


जवाहर सागर                           52.7Mcum           51.034Mcum          78.48%
बांसवाड़ा माही बजाज सागर       1068.542Mcum   2141.39Mcum       49.01%
हारो बांध                                   6.020Mcum         11.92Mcum             50%
टोंक बीसलपुर                            613.830Mcum     1010.300Mcum     56.01%
ग्वाला                                  12.050Mcum            35.200Mcum           24.73%
टोरडीसागर                        6.838Mcum               5.920Mcum            14.51%
दौसा मोरेल बांध                23.120Mcum           76.35Mcum              30.16%
भरतपुर सीकरी बांध          0.00Mcum          0.00Mcum                   0.00%
धौलपुर पारवती बांध          69.240Mcum     62.350Mcum              57.28%
बूंदी गुढा बांध                50.432Mcum        95.510Mcum             52.80%
जयपुर रामगढ               0.00Mcum           0.00Mcum                0.00%
छापरवाड़ा                  0.142Mcum            5.47Mcum             0.41%
कालखसागर            0.00Mcum           0.00Mcum               0.00%
पाली जवाई बांध       32.280Mcum      63.030Mcum          15.56%
सरदारसमंद            7.228Mcum       44.690Mcum           8.20%
भीलवाड़ा मेजा बांध    2.461Mcum    4.120Mcum             2.93%
डूंगरपुर सोमकमला अंबा  131.302Mcum 159.100Mcum 76.13%
राजसमंद राजसमंद     17.734Mcum     18.190Mcum           16.53%
उदयपुर जयसमंद       296.90Mcum  203.130Mcum         71.52%
प्रतापगढ जाखमबांध 53.320MCum 142.030MCum            37.54%

कम क्षमता वाले बांध का बुरा हाल

राज्य के 810 बांधों में पानी भराव की कुल क्षमता 12641.73 MCum है जिनमें से 4.25 MCum से कम क्षमता वाले बांधों है. इनकी संख्या 464 हैं जो सबसे ज्यादा बुरी हालत में है. इन बांधों में अपनी क्षमता का कुल 15.56 फीसदी पानी ही भरा है. किसानों के खेतों के नजदीक ये बांध खुद प्यास मर रहे हैं. 4.25 MCum से कम क्षमता वाले 464 बांधों में से 253 तो बिल्कुल ही सूखे पड़े हैं, जबकि 200 बांधों में आंशिक रूप से पानी पहुंचा है. 4.25 MCum से कम क्षमता वाले 464 बांधों में से मात्र 11 बांध ही पूर्ण रूप से भर सके हैं. 4.25 MCum से अधिक क्षमता वाले 278 बांधों की स्थिति भी ज्यादा अच्छी नहीं है. इस श्रेणी के बांधों में से अभी भी 82 बांध बिल्कुल सूखे पड़े हैं, जबकि 192 में आंशिक रूप से पानी पहुंचा है. 4.25 MCum से अधिक क्षमता वाले 278 बांधों में से मात्र 4 बांध ही पूर्ण रूप से भर पाए हैं.

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कई इलाकों में मानसूम का इंतजार

इस बार अन्य राज्यों में स्थित राजस्थान की हिस्सेदारी वाले बांधों में भी पानी की स्थिति ज्यादा चिंताजनक है. पंजाब में राजस्थान की हिस्सेदारी वाले भांखड़ा, पोंग और रणजीत सागर में पिछले साल की तुलना में पानी बेहद कम है. यही नहीं मध्य प्रदेश में स्थित प्रदेश के साझीदार बांध गांधी सागर में पिछले साल की तुलना में पानी कम पहुंचा है. पंजाब में स्थित भांखड़ा बांध में पिछले साल 5.59MAF पानी था जो इस वर्ष अभी तक 4.32MAF है, यनि भांखड़ा बांध को पूर्ण रूप से भरने के लिए अभी भी 42 फीसदी पानी की और जरूरत है. कुछ ऐसा ही हाल पोंग बांध का है. पोंग बांध में पिछले साल कुल 4.2MAF पानी पहुंच गया था, लेकिन फिलहाल पोंग बांध में 3.693MAF पानी ही पहुंचा है. पोंग बांध अभी भी 45 फीसदी खाली पड़ा है. रणजीतसागर बांध में पिछले साल कुल 2.23MAF पानी भरा था जो अब सिर्फ 1.618MAF रह गया है. रणजीत सागर बांध में अभी भी चालीस फीसदी पानी की जरूरत है. मध्य प्रदेश के गांधी सागर बांध में पिछले साल 4.84MAF पानी भरा था जो अभी 3.826MAF ही है. गांधी सागर बांध के पूर्ण भराव के लिए लिए अभी भी 65 फीसदी और पानी की जरूरत है.
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