राजस्थान: सचिन पायलट समर्थक विधायकों ने अजय माकन को अकेले में दिया फीडबैक
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राजस्थान: सचिन पायलट समर्थक विधायकों ने अजय माकन को अकेले में दिया फीडबैक
अजय माकन ने कहा कि इस फीडबैक का मकसद वरिष्ठ नेताओं का मन टटोलना था. (फाइल फोटो)

पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष रामनारायण मीणा (Ramnarayan Meena) ने आदिवासी अफसरों को अच्छी पोस्टिंग देने का सुझाव दिया. साथ ही उन्होंने संगठन में गुटबाजी खत्म करने को लेकर भी सलाह दी.

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जयपुर. राजस्थान कांग्रेस के नए प्रभारी अजय माकन (Ajay Maken) ने फीडबैक बैठक के पहले दिन पीसीसी में 46 वरिष्ठ नेताओं से वन टू वन संवाद किया. इस दौरान उन्होंने हरेक कांग्रेस नेताओं के मन की बात पूछने के साथ ही संगठन को लेकर उनका सुझाव भी जाना. ज्यादातर नेताओं ने पार्टी में गुटबाजी खत्म करके एकजुटता से काम करने की जरूरत बताई. खास बात यह है कि अजय माकन ने सचिन पायलट (Sachin Pilot) खेमे के दो वरिष्ठ नेताओं और मौजूदा विधायकों से अकेले में बात की. इन दोनों नेताओं से बातचीत के वक्त कांग्रेस प्रदेशााध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और दोनों सहप्रभारी बाहर चले गए थे. कई नेताओं से फीडबैक के वक्त डोटासरा और दोनों सहप्रभारी मौके पर ही मौजूद थे. ऐसे में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि जैसे ही सचिन पायलट खेमे के विधायक हेमाराम और दीपेंद्र सिंह शेखावत से फीडबैक के लिए माकन उनके पास पहुंचे तो कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा, सह प्रभारी सचिव विवेक बंसल और तरुण कुमार को बाहर चले गए.

वरिष्ठ नेताओं ने खुलकर दिए सुझाव
जानकारी के मुताबिक, फीडबैक बैठक के दौरान पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष रामनारायण मीणा ने आदिवासी अफसरों को अच्छी पोस्टिंग देने का सुझाव दिया. मीणा ने पार्टी संगठन में गुटबाजी खत्म करने का भी सुझाव दिया. वहीं, सचिन पायल खेमे के वरिष्ठ नेता और विधायक दीपेंद्र सिंह शेखावत और हेमाराम चौधरी ने माकन को पार्टी कार्यकर्ताओं के काम करवाने, जनता से किए गए वादे को पूरे करने, विधाायकों की सिफारिश और सबकी राय को सत्ता- संगठन में महत्व देने का सुझाव दिया. पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी ने किसानों से जुड़ी समस्याओं का टॉप प्रायरिटी पर हल करने का सुझाव दिया. साथ ही पार्टी के कोर वोट बैंक पर पकड़ बनाने के उपाय करने को कहा.

नेताओं की अहमियत जाना
वहीं, अजय माकन ने कहा कि इस फीडबैक का मकसद वरिष्ठ नेताओं का मन टटोलना था. अब आगे आने वाले दिनों में देखना होगा कि सत्ता संगठन में वरिष्ट नेताओं के इन सुझावों पर कितना अमल होता है. यह अलग बात है कि निर्णय प्रक्रिया में वरिष्ठ नेताओं को उनकी राय लिए जाने का एहसास करवाने का प्रयास जरूर इन फीडबैक बैठकों के जरिए दिया गया है.
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