राजस्थान: गहलोत सरकार पर सियासी संकट का साइड इफेक्ट, पढ़ें इनसाइड स्टोरी
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राजस्थान: गहलोत सरकार पर सियासी संकट का साइड इफेक्ट, पढ़ें इनसाइड स्टोरी
कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र से बने जन घोषणा पत्र के 503 में से करीब 150 बिंदुओं पर एक काम पूरा हो पाया है. (फाइल फोटो)

कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र से बने जन घोषणा पत्र के 503 में से करीब 150 बिंदुओं पर एक काम पूरा हो पाया है. लेकिन ऊर्जा मंत्री बीडी कल्ला (BD Kalla) की अध्यक्षता में गठित कैबिनेट सब कमेटी की बैठके नहीं होने की वजह से बाकी के काम आगे नहीं बढ़ पाए.

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जयपुर. अशोक गहलोत सरकार (Ashok Gehlot Government) पर संकट के काले बादल फिलहाल छंट तो गए हैं, लेकिन इसके साइड इफेक्ट भी देखने को मिल रहे हैं. सियासी खींचतान की वजह से जन घोषणा पत्र के अहम बिंदु राइट टू हेल्थ और जवाबदेही कानून जमीनी धरातल पर नहीं उतर पाए. जन घोषणा पत्र पर 40 फ़ीसदी ही काम हो पाया है. दरअसल, सियासी संकट से सरकार ने राइट टू हेल्थ और जवाबदेही कानून (Right to Health and Accountability Law) को जमीनी धरातल पर उतारने की पूरी तैयारी कर ली थी. लेकिन ऊर्जा मंत्री बीडी कल्ला (BD Kalla) की अध्यक्षता में गठित कैबिनेट सब कमेटी की बैठके नहीं होने की वजह से काम आगे नहीं बढ़ पाया.

कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र से बने जन घोषणा पत्र के 503 में से करीब 150 बिंदुओं पर एक काम पूरा हो पाया है. जबकि 216 बिंदु पर काम प्रगति पर है. हालांकि, जन घोषणा पत्र के क्रियान्वयन के लिए गठित कैबिनेट सब कमेटी अध्यक्ष ऊर्जा मंत्री बीडी कल्ला का कहना है कि सरकार के पास काफी समय है. ऐसे में जन घोषणा पत्र के बिंदुओं को लागू करने की ज्यादा जल्दबाजी नहीं है. काम चल रहा है. लगभग दो लाख जन सुझावों के आधार पर बनाए गए मेनिफेस्टो को कांग्रेस ने जनघोषणा पत्र का नाम दिया था. इसमें किसानों, युवाओं, बेरोजगारों, महिलाओं व आमजन से जुड़ी कई अहम घोषणाएं शामिल की गई थीं.

सरकार ने ये वादे किए पूरे
किसानों को कर्ज माफी, बुजुर्ग किसानों को पेंशन, बेरोजगारों को साढ़े 3 हजार रुपए मासिक भत्ता, स्वरोजगार के लिए सस्ता कर्जहर जिले में खुलेगी, महिला आईटीआईकृषि उपकरण और जीएसटी मुक्त बालिकाओं को आजीवन मुफ्त शिक्षा का वादा सरकार ने पूरा कर दिया है.
घोषणा पत्र के ये बिंदु अभी होने हैं पूरे


स्वास्थ्य का अधिकार कानून जवाबदेही (अकाउंटेबिलिटी), पलायन रोकने के लिए संगठित मजदूरों के लिए बोर्ड का गठन प्रदेश में बनाया जाएगा. गोचर भूमि बोर्ड एवं पत्रकारों की सुरक्षा के लिए जर्नलिस्ट प्रोटेक्शन एक्ट बनाया जाएगा.
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