10 साल बाद MP से लौटा राजस्थान का टाइगर, 2010 में इसलिए छोड़ना पड़ा था इलाका

टाइगर रिजर्व (सांकेतिक तस्वीर)
टाइगर रिजर्व (सांकेतिक तस्वीर)

राजस्थान (Rajasthan) के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व रणथंबोर (Tiger Reserve Ranthambore) में इन दिनों एक बाघ की मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) से 10 साल बाद वापसी कौतूहल का विषय बना हुआ है.

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जयपुर. राजस्थान (Rajasthan) के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व रणथंबोर (Tiger Reserve Ranthambore) में इन दिनों एक बाघ की मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) से 10 साल बाद वापसी कौतूहल का विषय बना हुआ है. पिछले दिनों रणथंबोर के चिरौली इलाके में एक अनजान बाघ ने दस्तक दी. कैमरा ट्रैप में जब इस बाघ की मौजूदगी दर्ज हुई तब शुरुआत में इसे पहचाना नहीं जा सका, लेकिन जब पुराना रिकॉर्ड खंगाला गया तो सभी यह देखकर हैरान रह गए यह तो बाघ T38 है, जो साल 2010 में रणथंबोर से निकलकर चंबल के बीहड़ों में होता हुआ मध्य प्रदेश जा पहुंचा था. तब यह बाघ काफी युवा था और रणथंबोर में दूसरे बाघों के दबाव में इसे अपना इलाका छोड़ना पड़ा था.

10 साल से यह बाघ रणथंबोर के बाहर करीब 100 किलोमीटर दूर मध्य प्रदेश की की कूनो पालपुर के जंगल में रह रहा था. 2014 की बाघों की गणना में इस बाघ का एक फोटो कैमरा ट्रैप में कूनो पालपुर के जंगल में आया था. उसके बाद से ही यह पाल मध्य प्रदेश में रह रहा था. यूं तो कई बाघ रणथंबोर से बाहर निकल कर कर मध्य प्रदेश का रुख कर चुके हैं, लेकिन यह अपने आप में पहला प्रमाण है जब कोई बाघ 10 साल बाद रणथंबोर में वापस आया है.

कैमरा ट्रैप में मिली जानकारी
रणथंबोर टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर टीसी वर्मा ने बताया कि यह बाघ साल 2010 में मध्य प्रदेश चला गया था, उसके बाद साल 2020 में पिछले दिनों रणथंबोर के भीड़ और चिरौली इलाके के के कैमरा ट्रैप में बाघ की फोटो आयी है. 19 अक्टूबर को रणथंभौर की कुंडेरा रेंज में इस बाघ की फोटो आयी थी. शुरू में इसे कोई अनजान बाघ के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन रणथंभौर के पुराने रिकॉर्ड से जब पुष्टि की गई तो इसका मिलान T38 से हुआ. रणथंभौर में बाघिन T13 के दो शावक में से एक T38 था. इसी बाघ की बहन T39 जिसे नूर के नाम से जाना जाता है वो तब से यही है.
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