राजस्थान बेरोजगारी भत्ता योजना पर कोरोना का ग्रहण, 2 लाख युवाओं की उम्‍मीदें खा रहीं हिचकोले

योजना पर हर साल 650 करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि खर्च होनी प्रस्तावित है.

योजना पर हर साल 650 करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि खर्च होनी प्रस्तावित है.

Rajasthan Unemployment Allowance Scheme 2021: कोरोना ने बेरोजगारों के भत्ते में बाधाएं खड़ी कर दी हैं. राजस्‍थान के दो लाख से ज्यादा बेरोजगार युवाओं को भत्ते का इंतजार है.

  • Share this:
जयपुर. राजस्‍थान में बेरोजगार युवाओं (Unemployed youth) के लिए कोरोना 'करेला और वो भी नीम चढ़ा' की कहावत को चरितार्थ कर रहा है. बेरोजगारी भत्ते की आस कोरोना वायरस से फैले संक्रमण के फेर में उलझकर रह गई है. प्रदेश के ज्यादातर ई-मित्र केंद्रों पर चिरंजीवी योजना (Chiranjeevi Scheme) को छोड़कर अन्य कार्य बंद होने की वजह से युवा बेरोजगार आवेदन नहीं कर पा रहे हैं. दूसरी ओर जिन बेरोजगारों ने पिछले माह आवेदन किया था, उनके फार्म भी जांच के फेर में उलझे हुए हैं. फिलहाल प्रदेश के दो लाख से ज्यादा बेरोजगार युवाओं को भत्ते (Unemployment Allowance) का इंतजार है.

राज्य सरकार द्वारा भत्ते की योजना से पहले प्रदेश के 1.60 लाख युवाओं को फायदा मिल रहा था. पिछले दिनों सरकार की ओर से की गई घोषणा के अनुसार इस साल से दो लाख बेरोजगारों को फायदा मिलना था. यह बात अलग है कि राज्य में दस लाख से ज्यादा बेरोजगार युवाओं को भत्ते का इंतजार है. योजना पर हर साल 650 करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि खर्च करने का प्रस्ताव था.

स्नातक परीक्षा ने दूर की भत्ते की आस

कोरोना के चलते युवाओं को भत्ते का इंतजार करना पड़ रहा है. उधर, तीन लाख से अधिक युवाओं को स्नातक परीक्षा स्थगित होने से भत्ते की आस दूर हो गई है. पिछले साल भी कोरोना के चलते बेरोजगार युवा करीब छह माह तक आवेदन नहीं कर पाए थे. सरकार ने इस वित्तीय वर्ष से नए प्रावधानों के तहत भत्ता बांटने की बात कही थी, लेकिन कागजी खानापूर्ति के चलते युवाओं की आस फिलहाल पूरी नहीं हो पा रही है.
अभी तक शुरू नहीं हुआ प्रशिक्षण

राज्य सरकार ने इस वित्तीय वर्ष से बेरोजगारी भत्ते से पहले तीन महीने का बेरोजगारों को प्रशिक्षण देने की घोषणा की थी. कोरोना के कारण ज्यादातर जिलों में युवाओं का प्रशिक्षण भी नहीं हो पाया है. वैसे भी राज्य में 19 मार्च से जनसुरक्षा पखवाड़े के तहत लॉकडाउन लगा हुआ है. योजना के मुताबिक बेरोजगारों को पहले तीन महीने तक रोजाना चार-चार घंटे का प्रशिक्षण मिलना था.

कोरोना ने रोकी कंपनियों की राह



युवा बेरोजगारों को नियमित रूप से प्रशिक्षण देने वाली कंपनियों की पीड़ा यह है कि कोरोना के बढ़ते प्रभाव की वजह से कामकाज पूरी तरह प्रभावित हो गया है. ऐसे में वह मौखिक कक्षाएं तो शुरू कर सकते हैं, लेकिन प्रायोगिक कक्षाएं शुरू करने में दिक्कत आ रही है.

भत्ते के इंतजार में टॉप टेन जिले

जिले बेरोजगार युवा

जयपुर 153676

सीकर 121456

अलवर 101841

झुंझुनूं 88475

नागौर 70985

भरतपुर 66931

दौसा 66224

चूरू 61726

जोधपुर 55425

हनुमानगढ़ 55029
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज