Rajasthan: जानिए क्या है बारिश और टिटहरी के अंडों के बीच का गणित ? इस बार फिर है भरपूर मानसून के संकेत
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Rajasthan: जानिए क्या है बारिश और टिटहरी के अंडों के बीच का गणित ? इस बार फिर है भरपूर मानसून के संकेत
कितने महीने बारिश होने वाली है इसका अंदाजा अंडों की संख्या से लगाया जाता है.

ग्रामीण और किसान मौसम का अनुमान (Weather forecast) लगाने के लिए प्राकृतिक संकेतों का सहारा पारम्परिक रूप से लेते आए हैं. टिटहरी के अंडों (Sand Piper Egg) से मानसून का अंदाजा लगाने की परम्परा भी काफी पुरानी है.

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जयपुर. भीषण गर्मी (Scorching heat) की आंच में तप रहे हैं देश-प्रदेश के सभी लोगों को मानसून (Monsoon) के आने का बेसब्री से इंतजार है. किसान भी खरीफ की बुवाई के लिए बार-बार आसमान को ताक रहे हैं. ग्रामीण और किसान मौसम का अनुमान (Weather forecast) लगाने के लिए प्राकृतिक संकेतों का सहारा पारम्परिक रूप से लेते आए हैं. टिटहरी के अंडों (Sand Piper Egg) से मानसून का अंदाजा लगाने की परम्परा भी काफी पुरानी है. मानसून का मिजाज भांपने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में यह तरीका परम्परागत रूप से अपनाया जाता रहा है. टिटहरी के अंडों से बारिश की मात्रा से लेकर बारिश की अवधि तक का पूरा गणित निर्धारित होता है.

इस बार भी मानसून के अच्छे रहने की संभावना जताई गई है
किसानों का मानना है कि उनका यह अनुमान आमतौर पर सटीक भी बैठता है. ऐसा माना जाता है कि टिटहरी को बारिश का पूर्वाभास हो जाता है और उसी को ध्यान में रखते हुए वह अपने अंडे देने का स्थान तय करती है. टिटहरी के इन अंडों के आधार पर ग्रामीण कई तरह से मानसून का विश्लेषण करते हैं. इसमें अंडों की संख्या से लेकर उनके रखे होने की स्थिति और स्थान के आधार पर भी मानसून के अच्छे रहने या नहीं रहने की संभावना जताई जाती रही है. इस बार प्रदेश में टिटहरी के अंडे देने के आधार पर मानसून के अच्छे रहने की संभावना जताई गई है. ग्रामीण क्षेत्र में किसान टिटहरी के अंडों के आधार पर अपने खेत में बुवाई की रूपरेखा भी तय करने लगते हैं.

ये है अंडों और बारिश के बीच का गणित



ग्रामीणों के मुताबिक टिटहरी के ऊंचे स्थान पर अंडे देने से अच्छी बारिश और नीचे स्थान पर अंडे देने से कम बारिश होने का अनुमान लगाया जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में मान्यता है कि यदि टिटहरी ने किसी छत या खेत की मेढ़ पर अंडे दिए हैं तो मानसून का अच्छा रहना तय है क्योंकि टिटहरी बारिश का पूर्वानुमान कर अपने अंडों को बचाने के लिए ऊंचे स्थान पर अंडे देती है. वहीं यदि टिटहरी खेत में या किसी गड्ढे वाली जगह पर अंडे देती है तो इसे सूखे जैसे हालात के संकेत समझे जाते हैं.



हर तरह से विश्लेषण किया जाता है
वहीं कितने महीने बारिश होने वाली है इसका अंदाजा अंडों की संख्या से लगाया जाता है. टिटहरी ने यदि 4 अंडे दिए तो 4 महीने और 3 अंडे दिए तो इसे 3 महीने बारिश का संकेत समझा जाता है. वहीं अंडों की स्थिति से तेज या धीमी बारिश का अनुमान लगाया जाता है. जितने अंडे खड़े हैं उतने महीने तेज बारिश और जितने अंडे बैठे हैं उतने महीने धीमी बारिश मानी जाती है. उदाहरण के तौर पर 2 अंडे खड़े और 2 अंडे बैठी स्थिति में हैं तो 2 महीने तेज और 2 महीने धीमी बारिश होगी.

अध्ययन की है जरूरत
किसान प्राचीन काल से टिटहरी के अंडों से मानसून का मिजाज भांपते आए हैं लेकिन वैज्ञानिक इसे अवैज्ञानिक तरीका बताते हुए खारिज करते हैं. हालांकि कई वैज्ञानिक इसे पूरी तरह नकारने की बजाय इस पर रिसर्च की आवश्यकता बताते हैं. मौसम विभाग के निदेशक डॉ. शिव गणेश का कहना है कि जीव-जंतुओं में प्रकृति के संकेतों को समझने की शक्ति होती है, लेकिन टिटहरी के अंडों से बारिश के अनुमान की कोई प्रामाणिक स्टडी मौजूद नहीं है. उन्होंने कहा कि इस विषय पर बहुत अध्ययन की जरूरत है. वहीं कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. बीआर कड़वा के मुताबिक ग्रामीणों और किसानों में यह तरीका प्रचलित जरूर है लेकिन यह अवैज्ञानिक तरीका है. यह हमेशा सटीक नहीं होता है.

इस बार यहां देखे गए हैं टिटहरी के अंडे
इस बार राजस्थान में जयपुर के नाड़ी का फाटक इलाके में टिटहरी ने खेत की बजाय मकान की छत पर अंडे दिए हैं जो अच्छी बारिश की ओर इशारा कर रहे हैं. वहीं बूंदी के वन्यजीव विशेषज्ञ पृथ्वी सिंह राजावत ने बताया कि बूंदी जिले के गुढ़ानाथावतान कस्बे के खेतों में इस बार लगातार दूसरे साल टिटहरी ने 5 अंडे दिए हैं. गत वर्ष भी जिले में टिटहरी ने 5 अंडे दिए थे और कई दशकों बाद मानसून ने भरपूर मेहरबान होकर पूरे देश को तरबतर कर दिया था.

पूरी जिंदगी जमीन पर ही गुजार देती है टिटहरी
जानकारों की मानें तो टिटहरी एक ऐसा पक्षी है जो कभी पेड़ पर नहीं बैठता है। वह अपनी पूरी जिंदगी जमीन पर ही गुजार देती है. यह टिटहरी गर्मी के दिनों में मानसून के आने से पहल खुले मैदान या खेत में अंडे देती है. यह रात के समय जंगल या खेत में किसी भी तरह की आहट पर तेज आवाज कर सभी को सचेत कर चौकीदार की भी भूमिका निभाती है.

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