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किसान आंदोलन से राजस्थान में जमीन तलाश रहे राकेश टिकैत, आज दूसरी किसान महापंचायत की नागौर में

राकेश टिकैत. (फाइल फोटो)

राकेश टिकैत. (फाइल फोटो)

किसान आंदोलन के बहाने भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बाद अब राजस्थान में भी राजनीति​क जमीन तलाश रहे हैं. इसलिए टिकैत ने राजस्थान में किसान महापंचायत शुरू कर दी है.

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हरीश मलिक, जयपुर. देश-विदेश में विख्यात किसान आंदोलन के बहाने अब नेता अपनी राजनीति चमकाने का भी कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं. भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बाद अब राजस्थान में भी राजनीति​क जमीन तलाश रहे हैं. टिकैत दूसरे प्रदेशों से ज्यादा राजस्थान के जिलों में किसान महापंचायत कर रहे हैं. ताकि केंद्र के कृषि कानूनों के विरोध में बने माहौल का वे भी फायदा उठा सकें.

दिल्ली और आसपास के सीमावर्ती राज्यों में आंदोलनरत किसानों का संघर्ष अन्य राज्यों में भी फैलाने के लिए भारतीय किसान यूनियन सक्रिय है. इसी के तहत इसके नेता राकेश टिकैत पिछले एक माह में राजस्थान में भी किसान महापंचायतें करने में लगे हुए हैं. उन्होंने गत दिवस शेखावाटी के झुंझुनूं में किसान महापंचायत की और बुधवार को नागौर में करने जा रहे हैं. काबिले गौर है कि नागौर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक दल के सांसद हनुमान बेनीवाल का प्रभाव क्षेत्र है. वे भी किसानों के समर्थन मेंं सीधे केंद्र से टक्कर ले रहे हैं.

टिकैत नागौर के बाद राजस्थान में तीन किसान महापंचायत और करेंगे. वे 12 मार्च को पीपाड़ सिटी जोधपुर में, 17 मार्च को सांगरिया श्रीगंगानगर में और फिर जयपुर के विद्याधर नगर स्टेडियम में 23 मार्च को विशाल महापंचायत करेंगे. टिकैत इन महापंचायतों में किसानों से जातिवाद से बाहर निकलकर संघर्ष करने का ऐलान कर रहे हैं और केंद्र के कथित किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ जन समर्थन जुटा रहे हैं.



टिकैत के राजस्थान में सक्रिय होने से कांग्रेस, भाजपा और थर्ड फ्रंट की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि उन्हें अपनी राजनीतिक जमीन के शेयर होने का डर है. हालांकि टिकैत की इन महापंचायत में कई जगह ​कांग्रेस और वाम दलों के नेता भी साथ दिखे. क्योंकि राजस्थान में वैसे भी कृषि कानूनों के खिलाफ माहौल है. अखिल भारतीय किसान सभा संयुक्त यूनियन सचिव संजय माधव का कहना है कि राकेेश टिकैत की महापंचायत राजनीतिक के तौर पर नहीं, यह केवल किसान आंदोलन है.
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