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Ramgarh Election Results: पहलू, रकबर-सगीर की 'मॉब लिंचिंग' BJP को पड़ी भारी?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (File Photo)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (File Photo)

रामगढ़ सीट के ही लालवंडी गांव के रहने वाले रकबर उर्फ़ अकबर खान की कथित गौरक्षकों की एक भीड़ ने 20 जुलाई 2018 को पीट-पीट कर ...अधिक पढ़ें

    राजस्थान के अलवर की रामगढ़ विधानसभा सीट पर 28 जनवरी को हुए उपचुनाव के नतीजे आ गए हैं और कांग्रेस की सफिया जुबेर खां ने बीजेपी के सुखवंत सिंह को 12,228 वोटों से हरा दिया है. बता दें कि रामगढ़ सीट के ही लालवंडी गांव के रहने वाले रकबर उर्फ़ अकबर खान की कथित गौरक्षकों की एक भीड़ ने 20 जुलाई 2018 को पीट-पीट कर हत्या कर दी थी. गौरक्षा के नाम पर पीट-पीट कर मारे गए पहलू खान और भीड़ का शिकार हुए सागीर खान भी अलवर के ही रहने वाले हैं.

    कांग्रेस का शतक
    राजस्थान की रामगढ़ विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस की सफिया जुबैर खान की जीत से बीजेपी को एक सन्देश भी मिला है. सफिया को 83,311 वोट हासिल हुए. कांग्रेस का मुकाबला बीजेपी के सुखवंत सिंह से था. सुखवंत सिंह को 71,083 वोट मिले. बता दें कि 2.35 लाख मतदाता वाले रामगढ़ उपचुनाव में 78.9 फीसदी मतदान हुए थे. इसी के साथ 200 सीटों वाली राजस्थान विधानसभा में अब कांग्रेस के कुल 100 विधायक हो गए हैं.

    गौरतलब है कि बीएसपी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री नटवर सिंह के पुत्र जगत सिंह को चुनाव मैदान में उतारा था जिससे ये मामला त्रिकोणीय माना जा रहा था लेकिन चुनावी नतीजों से पता चलता है कि लिंचिंग की घटनाओं के बाद इलाके में वोटों का ध्रुवीकरण कांग्रेस के पक्ष में हुआ है. पिछले दो चुनाव से रामगढ़ सीट पर बीजेपी जीतती आई थी. 2008 और 2013 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से बीजेपी के नेता ज्ञानदेव आहुजा जीते थे लेकिन इस बार उनका टिकट काट दिया गया था.

    लिंचिंग का गढ़ बन गया अलवर!

    रामगढ़ सीट राजस्थान के अलवर जिले में आती है. यह अलवर की सबसे हॉट सीट भी मानी जा रही थी. पिछले कुछ वक़्त से ये इलाक़ कथित गौरक्षकों की हिंसा और मॉब के कारण सुर्ख़ियों में रहा है. बता दें कि रामगढ़ के ही गांव लालवंडी के रहने वाले रकबर खान की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में पूरे देश का ध्यान रामगढ़ की ओर खींचा था और संसद में भी इस मामले को उठाया गया था.



    पहली वारदात: 3 अप्रैल 2017, पहलू खां की मौत
    3 अप्रैल 2017 को अलवर जिले के बहरोड़ में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या आठ पर कथित गौरक्षकों ने गोतस्करी के आरोप में 6 वाहनों को रोककर उनमें मौजूद लोगों के साथ मारपीट की. इनमें मेवात जिले के नूंह के जयसिंहपुर के रहने वाले 50 साल के पहलू खां भी थे. पहलू खां की निर्मम पिटाई के चलते अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी.

    दूसरी वारदात: 9 नवंबर, 2017, उमर खान की हत्या
    दूसरा बड़ा मामला 9 नवंबर, 2017 की रात को गोविंदगढ़ थाना इलाके में सामने आया था. कथित गौररक्षकों ने उमर खान की पिटाई के बाद गोली मारकर उसकी हत्या कर दी थी. बाद में शव को रेलवे पटरी पर डाल दिया था. इस मामले में बाद में हंगामा हुआ जब मौत की वजह सामने आई.



    तीसरी वारदात: 23 दिसम्बर 2017, जाकिर खान पर जानलेवा हमला
    तीसरा बड़ा मामला अलवर जिले के रामगढ़ थाना क्षेत्र में 23 दिसम्बर 2017 को सामने आया. रामगढ़ थाना इलाके में एक बार फिर गाय ले जा रहे एक युवक की 40-50 लोगों ने पिटाई कर दी. कथित गोरक्षकों ने जाकिर की जमकर पिटाई की और पुलिस ने काफी मुश्किल से उसे भीड़ से बचाया था. पिटाई के बाद गंभीर हालत में युवक जाकिर खान को पुलिस ने अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. जाकिर अपने तीन साथियों के साथ अलवर जिले के बानसूर क्षेत्र से गाय लेकर हरियाणा जा रहा था.

    चौथी वारदात: 20 जुलाई 2018, अकबर उर्फ रकबर की मौत
    20 जुलाई 2018, शुक्रवार रात को अलवर के रामगढ़ इलाके में कथित गौररक्षकों की भीड़ ने अकबर उर्फ रकबर पर हमला बोल दिया था. बाद में अकबर की मौत हो गई थी. घटना के अगले दिन इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका और उसकी कार्रवाई पर सवाल उठने लग गए थे. इस मामले में मारपीट के बाद मौत के शिकार हुए रकबर खान को अस्पताल ले जाने में देरी के आरोप में एक सहायक पुलिस उप निरीक्षक को निलंबित और तीन पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया.



    पांचवीं वारदात 29 दिसंबर 2018 को सगीर खान की पिटाई
    सगीर और उसका साथी 29 दिसंबर की रात को गायों से भरी पिकअप वाहन लेकर आ रहा था. इस दौरान साइड देने को लेकर कार सवारों से उसका झगड़ा हो गया था. इसके बाद ग्रामीणों ने गौतस्कर के आरोप में सगीर की पिटाई कर दी थी. इस दौरान उसका साथी मुस्ताक मौके से फरार हो गया था. सगीर के साथ मारपीट की सूचना के बाद किशनगढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घायल सगीर को अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. जहां से उसे जयपुर से एसएमएस अस्पताल रेफर किया गया. पुलिस इस मामले में करीब पांच लोगों को शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार किया था. पुलिस ने मारपीट के जिन 5 आरोपी लोगों को गिरफ्तार किया था उनमें से तीन को जमानत मिल चुकी है. उधर, पुलिस ने 3 जनवरी को 23 वर्षीय सगीर खान को किशनगढ़ पुलिस ने गौतस्करी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. पुलिस की गिरफ्तारी के बाद ट्रायल कोर्ट ने सगीर को 15 जनवरी तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा है.

    सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे सख्त निर्देश
    इन घटनाओं के बाद भीड़ की हिंसा पर काबू पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शांति बनाये रखना और समाज की रक्षा करना राज्य की जिम्मेदारी है.तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने भीड़ की हिंसा पर केंद्र को सलाह दी थी कि अगर ज़रूरी है तो इसके लिए अलग से कानून बनाया जाए. कोर्ट ने केंद्र को इस मसले पर सलाह दी थी कि आर्टिकल 257 के तहत उसे एक स्कीम लानी चाहिए. हालांकि एएसजी नरसिम्हा ने सरकार की तरफ से कहा था कि इस मामले में किसी स्कीम की जरूरत नहीं है, ये लॉ एंड ऑर्डर का मामला है. केंद्र सरकार मानना है कि ऐसी घटनाओं से निपटने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है. केंद्र सरकार के मुताबिक मॉब लिंचिंग के लिए अलग से कानून बनाने की जरूरत नहीं है.

    10 बार कांग्रेस यहां से जीत चुकी है
    कांग्रेस का मानना है कि इस मामले में बीजेपी और उसके स्थानीय नेता ज्ञानदेव आहूजा की काफी किरकरी हुई थी जो बीजेपी की हार की मुख्य वजह रही. जीत के बाद कांग्रेस की प्रत्याशी शाफिया खां ने मीडिया से कहा कि ध्रुवीकरण की राजनीति के चलते ही बीजेपी को यहां हार मिली है. उन्होंने कहा कि रकबर खान की हत्या के मामले में रामगढ़ को काफी बदनाम किया गया था. उन्होंने कहा, 'लोगों को पता है कि हम काम करने में यकीन करते हैं.'

    Tags: BJP, Cow vigilance, General Election 2019, Mob lynching, Narendra modi, Rajasthan bjp

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